नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ
नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ
नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ
नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ
नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ
नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ
शुक्ल अष्टमी देवी विशेष

1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ

नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए
temple venue
कालीमठ मंदिर , रूद्रप्रयाग
pooja date
Warning Infoइस पूजा की बुकिंग बंद हो गई है
srimandir devotees
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अब तक2,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं

नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शुक्ल अष्टमी देवी विशेष 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ

देवी पूजा के लिए अष्टमी तिथि को शुभ माना गया है। इस दिन देवी के किसी भी रूप की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है। देवी काली जो कि शक्ति का एक उग्र रूप हैं, यह नकारात्मकता का नाश करने के लिए प्रकट हुई थीं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि की रचना से पहले देवी काली अंधकार के रूप में सब तरफ विद्यमान थीं। सृष्टि को प्रारंभ करने के लिए देवी ने एक ज्योति प्रकट की, जिसके बाद सब कुछ प्रकाशमय हो गया। इसके बाद ही देवी ने सृष्टि एवं प्रकृति की रचना शुरू की। इसका एक उदाहरण रूद्रप्रयाग में स्थापित कालीमठ में देखने को मिलता है। इस पवित्र स्थल का उल्लेख स्कंद पुराण में भी है।

मान्यता है कि इस स्थान पर शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज राक्षसों से परेशान देवियों ने मां भगवती की तपस्या की थी। मां भगवती कालीशिला में 12 वर्ष की कन्या के रूप में प्रकट हुईं। असुरों के आतंक के बारे में सुनकर मां का शरीर क्रोध से काला पड़ गया और उन्होंने रौद्र रूप धारण कर लिया। माता एवं असुरों के बीच युद्ध हुआ जिसमें देवी ने दोनों राक्षसों का वध कर दिया। जिस प्रकार देवी काली ने असुरों का संहार किया, वैसे ही यहां पूजा करने से भक्तों के जीवन से मां काली बुरी शक्तियों, नकारात्मक ऊर्जा एवं भय से सुरक्षा का वरदान देती हैं। मान्यता है कि मां काली यहां स्थित कुंड में समाहित हैं, इसलिए अष्टमी के शुभ दिन पर इस पूजा में 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठ कर देवी काली को प्रसन्न किया जा सकता है।

पूजा लाभ

puja benefits
नकारात्मक ऊर्जाओं एवं बुरी शक्तियों का विनाश
मान्यता है कि मां काली की 1008 काली मूल मंत्र जाप के साथ काली सहस्रनाम पाठ करने से भक्तों को नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा का आशीष प्राप्त होता है। मां काली सभी बुरी एवं नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए जानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी काली की जो भक्त सच्चे दिल से आराधना करते हैं उनके जीवन में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएं एवं बुरी शक्तियां टिक नहीं पाती हैं।
puja benefits
भय से सुरक्षा
मान्यता है कि मां काली की विशेष पूजा से भक्तों साहस के साथ आत्मविश्वास की वृद्धि होती है जिससे उन्हें किसी भी तरह के अनजाने भय से मुक्ति मिलती है और देवी मां के आशीष से व्यक्ति भय मुक्त होकर जीवन में आगे बढ़ता है। भले ही मां काली का रूप उग्र हो लेकिन उनकी आराधना करने वाले भक्तों को जीवन में सभी तरह के भय से मुक्‍ति मिल जाती है।
puja benefits
ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति
मां काली, देवी आदिशक्ति का अवतार हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड और सभी ग्रहों पर शासन करती है। इसलिए उनकी पूजा करने से कुंडली के ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। कालीमठ में मां काली की 1008 काली मूल मंत्र जाप और काली सहस्रनाम पाठको करने से भक्तों को ग्रहों के अशुभ प्रभाव से सुरक्षा का आशीष प्राप्त होता है।

पूजा प्रक्रिया

Number-0

पूजा चयन करें

4 विभिन्न पूजा पैकेज ऑप्शन से चयन करें।
Number-1

अर्पण जोड़ें

अपनी पूजा के साथ गौ सेवा, वस्त्र दान, दीप दान भी करें। पूजा के लिए भुगतान करें।
Number-2

संकल्प विवरण दर्ज करें

भुगतान के बाद, अपना नाम और गोत्र दर्ज करें।
Number-3

पूजा दिन

अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक प्रक्रिया के अनुसार पूजा होगी। आपको अपने WhatsApp नंबर पर अपडेट्स मिलेंगे।
Number-4

पूजा वीडियो एबं तीर्थ प्रसाद डिलीवरी

अपने पंजीकृत WhatsApp नंबर पर पूजा के 4-5 दिनों में पूजा वीडियो एबं आपके दिए गए पते पर 8-10 दिनों बाद तीर्थ प्रसाद प्राप्त करें ।

कालीमठ मंदिर , रूद्रप्रयाग

कालीमठ मंदिर , रूद्रप्रयाग
रुद्रप्रयाग जिले में गुप्तकाशी शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है कालीमठ मंदिर। ये पवित्र मंदिर माँ काली को समर्पित है, जो उग्र देवी के रूप में विराजमान हैं। यहां विराजित मां काली अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनके जीवन से बुरी शक्तियों का विनाश करती हैं। यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहां मां काली अपनी बहनों माता लक्ष्मी और मां सरस्वती के साथ विराजित हैं। इस मंदिर से आठ किलोमीटर की ऊंचाई पर एक दिव्य चट्टान है। इस शीला को कालीशिला के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस स्थान पर शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज राक्षसों से परेशान देवी-देवताओं ने मां भगवती की तपस्या की थी।

तब यहां माँ भगवती 12 वर्ष की बालिका के रूप में प्रकट हुईं, कालीशिला में देवताओं के 64 यंत्र हैं। असुरों के आतंक के बारे में सुनकर माता का शरीर क्रोध से काला पड़ गया और उन्होंने क्रोध का रूप धारण कर लिया। युद्ध में माता ने दोनों राक्षसों का वध कर दिया। इन 64 यंत्रों से मां को मिली थी शक्ति कालीमठ मंदिर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें कोई मूर्ति नहीं है। कालीमठ मंदिर में एक कुंड है, जो चांदी के बोर्ड/श्रीयंत्र से ढका हुआ है। भक्त मंदिर के अंदर स्थित कुंड की पूजा करते हैं, यह पूरे वर्ष में केवल शारदीय नवरात्र में अष्टमी को खोला जाता है। दिव्य देवी को बाहर निकाला जाता है और पूजा भी आधी रात को ही की जाती है, तब केवल मुख्य पुजारी ही उपस्थित होते हैं।

कैसा रहा श्री मंदिर पूजा सेवा का अनुभव?

क्या कहते हैं श्रद्धालु?
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जय राज यादव

दिल्ली
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रमेश चंद्र भट्ट

नागपुर
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अपर्णा मॉल

पुरी
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शिवराज डोभी

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मुकुल राज

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सुनील कुमार सैनी

चंडीगढ़

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों