अरुणाचल प्रदेश के सबसे सुंदर और ऐतिहासिक मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं ये खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
अरुणाचल प्रदेश, जहां प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में नजर आती है, वहीं इसकी धार्मिक विरासत भी उतनी ही समृद्ध और रहस्यमयी है। यहां के मंदिर केवल श्रद्धा के केंद्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर और अध्यात्म के अद्भुत संगम का प्रतीक हैं। तो आइए जानते हैं अरुणाचल प्रदेश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में।
अरूणाचल प्रदेश को उगते सूरज की धरती कहा जाता है क्योंकि भारत में सबसे पहले सूरज यहीं उगता है। यह राज्य उत्तर में चीन से लगा हुआ है और दक्षिण में असम व नागालैंड से घिरा हुआ है। अरूणाचल प्रदेश अपनी खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर है। इसके अलावा, यह एक आध्यात्मिक स्थान भी है। यहां कई बौद्ध मठ हैं, जहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं। भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ, तवांग मठ, भी यहीं स्थित है। इसके अलावा, यहां कुछ मंदिर भी हैं, जिनका अपना धार्मिक महत्व है।
परशुराम कुंड मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जो अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में लोहित नदी के किनारे स्थित है। माना जाता है कि भगवान परशुराम ने यहां के पवित्र जल में स्नान करके अपने पाप धोए थे, इसलिए इसे परशुराम कुंड कहा जाता है। कुछ कथाओं के अनुसार, भगवान कृष्ण ने यहां रुक्मिणी से विवाह किया था और महर्षि व्यास ने यहां ध्यान किया था। हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं, जिनमें नेपाल से आने वाले भक्त भी शामिल होते हैं। खासतौर पर मकर संक्रांति के दिन 70,000 से ज्यादा भक्त यहां पवित्र स्नान करते हैं, क्योंकि माना जाता है कि इस जल में डुबकी लगाने से पाप मिट जाते हैं।
यह मंदिर अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग जिले में स्थित है और देवी दुर्गा को समर्पित है। यह हिंदू श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है। इस मंदिर की बनावट ओडिशा की वास्तुकला जैसी है। मान्यता है कि जब देवी सती का निधन हुआ, तो भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर घूमने लगे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को कई हिस्सों में बांट दिया ताकि शिव उनके मोह से मुक्त हो सकें। कहा जाता है कि देवी सती का एक हिस्सा इस स्थान पर गिरा था, इसलिए इसे आकाशगंगा कहा जाता है।
अरुणाचल प्रदेश के जीरो में स्थित श्री सिद्धेश्वरनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक महिमा और अद्भुत प्राकृतिक चमत्कार के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर में अब तक खोजा गया सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग स्थापित है, जो इसे विशेष और अनोखा बनाता है। यही कारण है कि यह स्थान शिव भक्तों और पर्यटकों के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
यह विशाल शिवलिंग घने जंगलों के बीच स्थित है और इसकी ऊंचाई लगभग 25 फीट और परिधि 22 फीट मानी जाती है। कहा जाता है कि यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से धरती से प्रकट हुआ था, जिसे स्वयंभू शिवलिंग माना जाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह वर्षभर भगवान शिव को समर्पित भक्तों और श्रद्धालुओं से घिरा रहता है, जो यहां आकर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं।
अरुणाचल प्रदेश के सिंगचुंग में स्थित नाग मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जो नाग देवता को समर्पित है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का केंद्र माना जाता है।
सिंगचुंग का शांत वातावरण इस मंदिर को पूजा और ध्यान के लिए आदर्श स्थान बनाता है। यहां भक्तगण नाग देवता की पूजा करते हैं और उनसे सुरक्षा, सुख-समृद्धि और बुरी शक्तियों से बचाव का आशीर्वाद मांगते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, नाग देवता जीवन की कठिनाइयों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं।
यह मंदिर विशेष रूप से नाग पंचमी और अन्य धार्मिक अवसरों पर बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इन दिनों यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। स्थानीय लोग भी इस मंदिर को बहुत पवित्र मानते हैं और इसे अपनी धार्मिक परंपराओं का हिस्सा समझते हैं।
अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में स्थित मालिनीथन मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र स्थल है। यह मंदिर अपने ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण हिंदू श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है। मालिनीथन मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, जब भगवान कृष्ण रुक्मिणी का हरण करके द्वारका ले जा रहे थे, तो वे कुछ समय के लिए इस स्थान पर रुके थे। कहा जाता है कि यहां देवी दुर्गा ने स्वयं प्रकट होकर भगवान कृष्ण और रुक्मिणी को आशीर्वाद दिया था। इसी कारण यह स्थान देवी दुर्गा के एक विशेष रूप 'मालिनी' के नाम से प्रसिद्ध हुआ और इस मंदिर का नाम मालिनीथन मंदिर पड़ा।
मालिनीथन मंदिर की वास्तुकला ओडिशा शैली की है, जो इसे एक ऐतिहासिक और कलात्मक धरोहर बनाती है। मंदिर परिसर में पुराने पत्थरों की नक्काशी, शिलालेख, और मूर्तियाँ देखने को मिलती हैं, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाती हैं।
अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले के दिरांग में स्थित कोराडेवी मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित एक प्राचीन और पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिक शक्ति, ऐतिहासिक महत्व और गहरी धार्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी दुर्गा की भव्य मूर्ति स्थापित है, और भक्तगण उन्हें शक्ति, साहस और संरक्षण की देवी के रूप में पूजते हैं।
कोराडेवी मंदिर को देवी दुर्गा की असीम शक्ति और दिव्य कृपा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह मंदिर सदियों से भक्तों को संकटों से मुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता आ रहा है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहाँ अवश्य फलीभूत होती है।
अरुणाचल प्रदेश में स्थित भैरव कुंड मंदिर भगवान भैरव को समर्पित एक प्राचीन और रहस्यमय तीर्थ स्थल है। यह मंदिर अपनी तांत्रिक साधना, रहस्यमयी अनुष्ठानों और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है। यहां विशेष रूप से तांत्रिक पूजा-पद्धति का पालन किया जाता है, जिससे यह स्थान साधकों और भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
भगवान भैरव को शिव का रौद्र और शक्तिशाली रूप माना जाता है, जो भक्तों की सुरक्षा, भय से मुक्ति और आध्यात्मिक सिद्धि प्रदान करते हैं। मान्यता है कि इस मंदिर में की गई पूजा से नकारात्मक शक्तियों, बुरी आत्माओं और दुर्भाग्य से रक्षा होती है। विशेष रूप से तांत्रिक और साधकगण यहाँ अपनी साधनाओं को सिद्ध करने के लिए आते हैं।
अरुणाचल प्रदेश के नामसाई जिले में स्थित सूर्य मंदिर भगवान सूर्य नारायण को समर्पित एक पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यता और आस्था के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान सूर्य की नियमित पूजा-अर्चना होती है, और भक्तगण सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित कर सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को ऊर्जा, जीवन और सेहत का देवता माना जाता है। मान्यता है कि सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है, और सभी संकट दूर होते हैं। इस मंदिर में लोग सूर्य मंत्रों का जाप करते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
इस मंदिर में सालभर पूजा होती है, लेकिन मकर संक्रांति और छठ पूजा के दौरान यहाँ विशेष अनुष्ठान और भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है। इन त्योहारों पर हजारों श्रद्धालु मंदिर में एकत्र होते हैं, और भगवान सूर्य को जल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अरुणाचल प्रदेश के तवांग में स्थित हनुमान मंदिर भगवान हनुमान को समर्पित एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह मंदिर न केवल हिंदू श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि यह तवांग आने वाले पर्यटकों के बीच भी बहुत लोकप्रिय है। भगवान हनुमान की भक्ति, शक्ति और साहस का प्रतीक यह मंदिर भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा, आशीर्वाद और आत्मिक शांति प्रदान करता है। हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और समर्पण के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं और भक्तों को संकटों से मुक्ति मिलती है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा के दर्शन कर अपने जीवन में शक्ति और साहस प्राप्त करने की कामना करते हैं।
अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर में स्थित माता काली मंदिर एक महत्वपूर्ण धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र है। यह मंदिर देवी काली को समर्पित है, जिन्हें शक्ति, ऊर्जा और रक्षण की देवी माना जाता है। हिंदू धर्म में देवी काली को अधर्म और बुरी शक्तियों के नाश का प्रतीक माना जाता है, और यह मंदिर उन्हीं की भक्ति और साधना का प्रमुख स्थल है।
माना जाता है कि माता काली अपने भक्तों की सभी बाधाओं को दूर कर जीवन में शक्ति, साहस और सफलता प्रदान करती हैं। इस मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा, मंत्रोच्चार और आरती की जाती है, जिससे वातावरण भक्तिमय और दिव्य हो जाता है।
अरुणाचल प्रदेश के नामसाई जिले में स्थित विष्णु मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र तीर्थ स्थल है। यह मंदिर हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए गहरी आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है। मंदिर की शांत और सुरम्य प्राकृतिक छटा इसे एक आध्यात्मिक साधना स्थल बनाती है, जहाँ भक्तजन ध्यान और प्रार्थना करके मानसिक शांति और ईश्वरीय कृपा प्राप्त करते हैं।
इस मंदिर में भगवान विष्णु की शालिग्राम शिला के रूप में पूजा की जाती है। शालिग्राम शिला एक विशेष प्रकार का पत्थर होता है, जिसे भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, शालिग्राम की पूजा करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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