बिहार के प्रसिद्ध मंदिर
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बिहार के 11 प्रसिद्ध मंदिर

बिहार के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!

बिहार के मंदिरों के बारे में

बिहार में कई ऐसे मंदिर हैं जहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इन मंदिरों की दिव्यता और महिमा दूर-दूर तक फैली हुई है। बिहार में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं। आइए, बिहार के 11 प्रमुख मंदिरों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

बिहार के 11 प्रसिद्ध मंदिर

बिहार, भारतीय उपमहाद्वीप का एक ऐसा राज्य है जो अपनी गहरी सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। यहाँ के प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र हैं, बल्कि ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प दृष्टि से भी अत्यंत रोचक हैं। बिहार का ऐतिहासिक महत्व शाही राजवंशों और महान व्यक्तित्वों से जुड़ा हुआ है, और यही कारण है कि यहाँ प्राचीन मंदिरों का एक विशाल और विविध संग्रह देखने को मिलता है।

पुराने मंदिरों की संरचनाओं में शाही शैली के तत्व और स्थापत्य कला की बेहतरीन मिसालें देखने को मिलती हैं। इन मंदिरों में वास्तुकला के अद्वितीय नमूने जैसे पत्थरों से बनी शिल्पकला, बारीक नक्काशी और भव्य शिखर दर्शनीय हैं। इसके अलावा, बिहार के मंदिरों का ऐतिहासिक महत्व भी है। यहाँ के मंदिरों में समय-समय पर कई ऐतिहासिक घटनाएँ और यात्राएँ हुई हैं, जो आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। प्रत्येक मंदिर में एक विशेष कथा जुड़ी हुई है, जो न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

इन मंदिरों में एक अद्वितीय शांति और संतोष का अनुभव होता है, जो किसी भी श्रद्धालु को आकर्षित करता है। यहाँ की प्राचीनता, धार्मिक महत्व और वास्तुकला के संगम में छिपा हुआ बिहार का अद्भुत इतिहास और संस्कृति हर किसी के दिल में एक अनोखी छाप छोड़ जाता है।

बिहार के 11 प्रसिद्ध मंदिर: जानें महत्व, विशेषताएं एवं इतिहास

1. कुशेश्वरस्थान शिव मंदिर

दरभंगा का कुशेश्वरस्थान शिव मंदिर, मिथिलांचल के बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध है, और इसकी स्थापना को लेकर दो प्रमुख कथाएँ प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, भगवान राम के पुत्र कुश ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी, और इसी कारण इसका नाम कुशेश्वरस्थान पड़ा। दूसरी कथा में, खगा हजारी नामक एक चरवाहा ने देखा कि एक बाछी रोज़ एक निश्चित स्थान पर आकर दूध गिराती थी। जब उसने उस स्थान पर खुदाई की, तो एक शिवलिंग प्राप्त हुआ। यह घटना जंगल में आग की तरह फैल गई, और बाद में भगवान शिव ने खगा हजारी को स्वप्न में आदेश दिया कि वह यहां मंदिर निर्माण कर पूजा अर्चना शुरू करें।

कहा जाता है कि खगा हजारी ने पहले फूस से एक छोटा मंदिर बनाया और पूजा आरंभ की। 18वीं शताबदी में, नरहन सकरपुरा ड्योढ़ी की रानी कलावती ने इस स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया। बाद में 1970 के दशक में, कलकत्ता के बिड़ला ट्रस्ट ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया और इसे आधुनिक रूप दिया। बिड़ला ट्रस्ट के प्रयासों से मंदिर का विस्तार हुआ, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलीं।

कुशेश्वरस्थान शिव मंदिर का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के दिन यहां लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।

2. बूढ़ानाथ मंदिर, भागलपुर 

भागलपुर के निवासी बाबा वृद्धेश्वरनाथ (बूढ़ानाथ) को अपने दिलों में बसाकर रखते हैं, और उनकी महिमा अनंत है। यह मंदिर शहर के प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां हर महीने भक्तों की भीड़ जुटती है, लेकिन सावन माह में इस मंदिर का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दौरान यहां जलाभिषेक करने से हर व्यक्ति की इच्छाएं पूरी होती हैं। एक प्रसिद्ध मान्यता है कि जो लोग यहां आकर विवाह के लिए प्रार्थना करते हैं, उनकी शादी अवश्य तय हो जाती है। यही नहीं, यहां आने से भक्त की हर एक मनोकामना भी पूरी होती है।

बूढ़ानाथ को बाबा वृद्धेश्वरनाथ के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह देवता भागलपुर की सुरक्षा करते हैं। ऐसी मान्यता है कि ये भगवान राम के युग से पहले के हैं, और इस मंदिर की स्थापना भगवान राम के गुरु वशिष्ठ ने की थी। वशिष्ठ जी ने भगवान राम के अवतार के लिए 108 शिवलिंगों की स्थापना की थी, जिनमें से एक शिवलिंग इस मंदिर में भी मौजूद है। यही कारण है कि यह मंदिर अत्यधिक खास और पवित्र माना जाता है।

इस शिवलिंग की विशेषता यह है कि यह आम शिवलिंग से पूरी तरह अलग है। जबकि अधिकांश शिवलिंग समतल होते हैं, यह शिवलिंग रुद्राक्ष के आकार का है। यह अद्वितीय आकार इसे और भी विशेष बनाता है। प्रभाकर मिश्र के अनुसार, यह शिवलिंग अपनी आकृति के कारण भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है, और इसकी उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी नकारा नहीं जा सकता। बाबा वृद्धेश्वरनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोग दूर-दूर से यहां आते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। इस मंदिर की महिमा को सुनकर लोग श्रद्धा और विश्वास से यहां आते हैं, और इस दिव्य स्थल पर उनके मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

3. जानकी मंदिर, सीतामढ़ी

सीतामढ़ी में स्थित जानकी मंदिर माता सीता की जन्मस्थली मानी जाती है। इस मंदिर की भव्यता और सुंदरता देखते ही बनती है। यह लगभग 100 वर्ष पुराना मंदिर है और इसकी अनूठी वास्तुकला इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।

यहाँ हर वर्ष रामनवमी और विवाह पंचमी पर विशेष उत्सव होते हैं, जिनमें देश-विदेश से श्रद्धालु भाग लेते हैं। जानकी मंदिर का निर्माण नेपाल की स्थापत्य शैली में किया गया है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है।

4. मंगला गौरी मंदिर, गया

गया स्थित मंगला गौरी मंदिर 18 शक्तिपीठों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यहाँ माता सती के शरीर का एक अंश गिरा था, जिसे स्तन रूप में पूजा जाता है।

यह मंदिर न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी इसकी खास पहचान है। यहाँ हर सोमवार को विशेष पूजा होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं। विशेषकर सावन मास में यहाँ भक्तों की भीड़ उमड़ती है।

5. विष्णुपद मंदिर, गया

गया में स्थित विष्णुपद मंदिर एक ऐसी दिव्य धारा का प्रतीक है जिसे श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से पूजते हैं। यह मंदिर भगवान विष्णु के चरणों के निशान के लिए प्रसिद्ध है और हिन्दू धर्म के अनुयायियों के लिए एक अत्यधिक पवित्र स्थल माना जाता है। विष्णुपद मंदिर फल्गु नदी के किनारे स्थित है, और इसकी धार्मिक महत्ता इस तथ्य से और बढ़ जाती है कि इसे पिंडदान और तर्पण जैसे विशेष संस्कारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म यानि पिंडदान का यहां विशेष महत्व है, और यह स्थल हिंदू धर्म में आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए एक अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान है।

विष्णुपद मंदिर के बारे में एक प्रसिद्ध कथा है कि भगवान विष्णु ने स्वयं इस स्थान को आशीर्वाद दिया था, जिससे यह स्थल पवित्रता का प्रतीक बन गया। 

6. महावीर मंदिर, पटना

पटना जंक्शन के पास स्थित महावीर मंदिर हनुमान जी को समर्पित बिहार के सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी अद्वितीय आध्यात्मिकता और गहरी आस्था के लिए जाना जाता है। हनुमान जी के इस मंदिर में आने वाले भक्तों का विश्वास है कि यहाँ की पूजा से सभी प्रकार की बाधाएँ और संकट दूर हो जाते हैं। विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है, क्योंकि ये दिन हनुमान जी को समर्पित होते हैं। इन दिनों यहाँ विशेष पूजा अर्चना और भजन कीर्तन होते हैं, जो श्रद्धालुओं को शांति और आंतरिक बल प्रदान करते हैं। मंदिर का वातावरण भक्तिमय और ऊर्जा से भरपूर होता है, जिससे यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को मानसिक और आध्यात्मिक संतोष मिलता है। महावीर मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बिहार की सांस्कृतिक धरोहर का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

7. पटन देवी मंदिर, पटना

पटना में स्थित पटन देवी मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहाँ माता सती की दाहिनी जांघ गिरी थी।

यह मंदिर बिहार की राजधानी का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है और यहाँ माता की तीन प्रतिमाएँ स्थापित हैं – महा पटन देवी, छोटी पटन देवी और महाकाली।

8. मिथिला शक्तिपीठ मंदिर

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक है। यह स्थान माता सती की दिव्य शक्ति से जुड़ा हुआ है।

यहाँ भक्त विशेष रूप से माँ दुर्गा की आराधना करने आते हैं। नवरात्रि के समय इस मंदिर में विशेष पूजा-पाठ का आयोजन होता है।

9. जल मंदिर, पावापुरी

नालंदा जिले के पावापुरी में स्थित जल मंदिर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के निर्वाण स्थल पर स्थित है।

यह मंदिर एक सुंदर जलाशय के बीचों-बीच बना हुआ है, जिससे इसकी सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है। जैन धर्म के अनुयायियों के लिए यह मंदिर अत्यंत पवित्र स्थल है।

10. इंद्रदमनश्वर महादेव मंदिर (अशोक धाम), लखीसराय

लखीसराय जिले में स्थित इंद्रदमनश्वर महादेव मंदिर, जिसे अशोक धाम भी कहा जाता है, भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है।

यह मंदिर शिवरात्रि के समय विशेष रूप से प्रसिद्ध रहता है और यहाँ श्रद्धालु बड़ी संख्या में जलाभिषेक करने आते हैं।

11. बुढ़िया माई मंदिर, मुंगेर

बिहार के मुंगेर जिले में स्थित बुढ़िया माई मंदिर आस्था का एक प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।

यह मंदिर खासतौर पर नवरात्रि के समय अत्यधिक लोकप्रिय होता है और यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बुढ़िया माई बहुत जल्दी प्रसन्न होती हैं और भक्तों को उनकी इच्छाओं के अनुसार वरदान देती हैं। मंदिर की वास्तुकला भले ही अधिक भव्य न हो, लेकिन इसका आध्यात्मिक प्रभाव बहुत गहरा है।

निष्कर्ष

बिहार के यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं बल्कि ऐतिहासिक और स्थापत्य कला की दृष्टि से भी अद्वितीय हैं। यहाँ आने से भक्तों को असीम शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

अगर आप आध्यात्मिक यात्रा पर जाना चाहते हैं, तो बिहार के इन पवित्र मंदिरों का दर्शन अवश्य करें। यह स्थल आपको आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से भी अवगत कराएंगे।

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Published by Sri Mandir·March 21, 2025

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