छत्तीसगढ़ के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
छत्तीसगढ़ में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें महामाया मंदिर (रतनपुर) देवी महामाया को समर्पित है। डोंगरगढ़ का बमलेश्वरी मंदिर एक प्रमुख शक्ति पीठ है। राजीव लोचन मंदिर (राजिम) भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर है। आइये जानते हैं ऐसे मंदिरों के बारे में...
छत्तीसगढ़ को भारत के उन राज्यों में गिना जाता है जो अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। इसे ‘मंदिरों की धरती’ भी कहा जाता है क्योंकि यहां के मंदिर न केवल आध्यात्मिक आस्था के प्रतीक हैं, बल्कि स्थापत्य कला, ऐतिहासिक धरोहर और लोक संस्कृति का भी अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। छत्तीसगढ़ के मंदिरों में देवी-देवताओं की भव्य प्रतिमाएं, सुंदर नक्काशी और धार्मिक मान्यताओं की गहरी छाप देखने को मिलती है। ये धार्मिक स्थल न केवल पूजा-अर्चना के स्थान हैं, बल्कि वो भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के गौरवशाली प्रतीक भी हैं।
छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। ये प्रदेश कई प्राचीन मंदिरों का घर है, जहां भक्त आस्था, अध्यात्म और अद्भुत स्थापत्य कला का संगम देख सकते हैं। इन मंदिरों की मान्यताएं और ऐतिहासिक महत्व इन्हें खास बनाते हैं।
आइए जानते हैं छत्तीसगढ़ के 11 प्रमुख मंदिरों के बारे में—
डोंगरगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख शक्ति स्थलों में से एक है। ये मंदिर समुद्र तल से लगभग 1600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए भक्तों को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिससे यह यात्रा रोमांचक और आध्यात्मिक दोनों बन जाती है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
विशेषता: 1600 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर देवी दुर्गा का शक्तिपीठ माना जाता है।
यह मंदिर प्रसिद्ध क्यों है?
यहां नवरात्रि के दौरान विशाल मेले का आयोजन होता है और मान्यता है कि माता की कृपा से श्रद्धालुओं की इच्छाएं पूरी होती हैं।
छत्तीसगढ़ के रतनपुर में स्थित महामाया देवी मंदिर को शक्ति उपासना का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कलचुरी राजाओं ने किया गया था। इसकी वास्तुकला अद्भुत है, जिसमें पत्थरों पर जटिल नक्काशी और विशाल प्रवेश द्वार मंदिर की भव्यता को दर्शाते हैं। यहां देवी महामाया की पूजा की जाती है और नवरात्रि के दौरान हजारों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं।
विशेषता: यह मंदिर 11वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के शासकों द्वारा निर्मित किया गया था।
प्रसिद्ध क्यों?
शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध ये मंदिर तांत्रिक साधना और भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए विख्यात है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर न केवल अपनी आधुनिकता के लिए बल्कि अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं धरोहरों में से एक है दूधाधारी मठ और मंदिर, जो श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह प्राचीन मंदिर भगवान राम को समर्पित है और अपनी अनूठी स्थापत्य शैली, धार्मिक आस्था और शांत वातावरण के कारण जाना जाता है।
विशेषता: सफेद पत्थरों से निर्मित यह मंदिर भगवान राम को समर्पित है।
प्रसिद्ध क्यों?
यहां रहने वाले संत केवल दूध का सेवन करते थे, जिससे यह स्थान ‘दूधाधारी’ मठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
राजिम को ‘छत्तीसगढ़ का प्रयाग’ भी कहा जाता है क्योंकि यह महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम पर स्थित है। यहां स्थित राजीव लोचन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। मंदिर की मूर्तियां और वास्तुशिल्प दुर्लभ और अनूठे हैं। हर साल यहां राजिम कुंभ मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें देशभर से साधु-संत और श्रद्धालु भाग लेते हैं।
विशेषता: यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और त्रिवेणी संगम (महानदी, सोंढूर, पैरी) के किनारे स्थित है।
प्रसिद्ध क्यों?
यहां प्रतिवर्ष ‘राजिम कुंभ’ का आयोजन होता है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक आयोजन है।
छत्तीसगढ़ के सिरपुर में स्थित लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यह पूरी तरह से ईंटों से बना हुआ है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। मंदिर की दीवारों पर सुंदर नक्काशी और उत्कृष्ट डिजाइन इसे कला प्रेमियों और इतिहासकारों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल बनाते हैं।
विशेषता: यह 7वीं शताब्दी में निर्मित एक दुर्लभ ईंटों का मंदिर है, जो नागर स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।
प्रसिद्ध क्यों?
यह भारत के प्राचीनतम विष्णु मंदिरों में से एक है, जिसकी दीवारों पर की गई अद्भुत नक्काशी इसे विशिष्ट बनाती है।
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित शिवरीनारायण मंदिर एक प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम से जुड़ा हुआ है। यह मंदिर महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के संगम पर स्थित है, जिसे राजा शिवरीनारायण ने बनवाया था। मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम ने यहां शबरी माता से भेंट की थी। मंदिर की विलक्षण स्थापत्य कला, सुंदर नक्काशी और आध्यात्मिक शांति इसे विशेष बनाते हैं। हर साल माघ पूर्णिमा मेला और राजिम कुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। यह स्थल आस्था, इतिहास और संस्कृति का अनूठा संगम है।
विशेषता: भगवान विष्णु के नर-नारायण स्वरूप को समर्पित यह मंदिर महानदी के तट पर स्थित है।
प्रसिद्ध क्यों?
यह स्थान रामायणकालीन माना जाता है और माना जाता है कि यहां भगवान राम माता शबरी से मिले थे।
दंतेवाड़ा में स्थित दंतेश्वरी मंदिर भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर आदिवासी संस्कृति और शक्ति उपासना का अद्भुत संगम है। कहा जाता है कि यहां माता सती के दांत गिरे थे, जिस कारण इस स्थान का नाम दंतेवाड़ा पड़ा। यह मंदिर नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से लोकप्रिय रहता है और यहां दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन करने आते हैं।
विशेषता: यह मंदिर भारत के 52 शक्तिपीठों में से एक है, जो माँ दंतेश्वरी को समर्पित है।
प्रसिद्ध क्यों?
बस्तर दशहरा उत्सव के दौरान इस मंदिर की विशेष पूजा होती है, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
छत्तीसगढ़ के चंद्रपुर (जांजगीर-चांपा) में स्थित चंद्रहासिनी देवी मंदिर एक प्राचीन शक्ति पीठ है, जो महानदी के तट पर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। मां चंद्रहासिनी की दिव्य प्रतिमा यहां श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है, जिन्हें शक्ति और समृद्धि की देवी माना जाता है। मंदिर की भव्य वास्तुकला, प्राकृतिक वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा इसे विशेष बनाते हैं। नवरात्रि और चैत्र पूर्णिमा के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यह स्थल भक्ति, श्रद्धा और शक्ति का अद्भुत प्रतीक है।
विशेषता: महानदी के किनारे स्थित इस मंदिर में देवी चंद्रहासिनी की पूजा की जाती है।
प्रसिद्ध क्यों?
श्रद्धालु यहां नारियल चढ़ाकर अपनी इच्छाएँ पूरी होने की प्रार्थना करते हैं, और यह स्थान अपने आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित कुदरगढ़ मंदिर एक प्राचीन शक्ति पीठ है, जो मां कुदरगढ़ी देवी को समर्पित है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सैकड़ों सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। कहा जाता है कि मां कुदरगढ़ी की पूजा से भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। मंदिर का आध्यात्मिक माहौल, प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक महत्व इसे खास बनाते हैं। नवरात्रि और चैत्र पूर्णिमा के मौके पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह स्थल शक्ति, आस्था और प्रकृति का अनुपम संगम है।
विशेषता: यह मंदिर पहाड़ी की चोटी पर स्थित है, जहां जाने के लिए 500 से अधिक सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
प्रसिद्ध क्यों?
चैत्र नवरात्रि में यहां भारी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं और बलि प्रथा की परंपरा भी देखी जाती है।
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर भगवान शिव का एक प्राचीन तीर्थ स्थल है। यह मंदिर एक गुफा में स्थित है, जहां शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से जल की धारा गिरती रहती है, जो इसे खास बनाती है।
विशेषता: यह एक गुफा मंदिर है, जहां प्राकृतिक शिवलिंग स्थापित है।
प्रसिद्ध क्यों?
मान्यता है कि इस शिवलिंग का आकार सालभर घटता-बढ़ता रहता है, जो इसे रहस्यमयी और चमत्कारी बनाता है।
छत्तीसगढ़ हिंदू धर्म के साथ-साथ बौद्ध धर्म के इतिहास से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। सिरपुर स्थित बुद्ध विहार इस क्षेत्र के बौद्धिक और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। यहां भगवान बुद्ध की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है और इस क्षेत्र में कई बौद्ध अवशेष मिले हैं, जो इस स्थान को बौद्ध धर्म के अनुयायियों और इतिहास प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं।
छत्तीसगढ़ के ये मंदिर न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनके स्थापत्य, ऐतिहासिक महत्व और मान्यताएं भी इन्हें खास बनाती हैं। ये जगह श्रद्धालुओं के लिए आस्था के केंद्र हैं और भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अनमोल हिस्सा भी हैं। अगर आप अध्यात्म, इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखते हैं, तो इन मंदिरों की यात्रा जरूर करें। और अगर आप इन मंदिरों में से किसी भी मंदिर का भ्रमण कर चुके हैं तो अपना अनुभव हमारे साथ जरूर साझा करें।
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