मध्य प्रदेश के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
मध्य प्रदेश, जिसे भारत का हृदय कहा जाता है, अद्भुत सांस्कृतिक विरासत और दिव्य आस्था का केंद्र है। यहां के प्रसिद्ध मंदिर न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि अपने अनूठे स्थापत्य और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी विशेष स्थान रखते हैं। आइए जानते हैं मध्य प्रदेश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में।
मध्य प्रदेश धार्मिक महत्व के लिहाज से देखें तो भारत का एक ऐसा राज्य है जहां एक नहीं बल्कि कई प्राचीन और विशाल मंदिर मौजूद हैं, जो पर्यटकों के लिए किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं हैं। वैसे तो यहां आपको कई मंदिर देखने को मिल जाएंगे लेकिन हम आपको बताते हैं मध्यप्रदेश के 11 सबसे चर्चित और अद्भुत मंदिर जहां अगर आप नहीं जाएंगे तो आपका मध्यप्रदेश जाना लगभग बेकार जाएगा।
महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश में स्थित एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और हिंदू धर्म में इसका विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। यह एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है। इस मंदिर का कई राजाओं द्वारा पुनर्निर्माण किया गया, जिसमें परमार वंश के राजा भोज और मराठा शासक रणोजी शिंदे प्रमुख थे। हाल ही में महाकाल लोक कॉरिडोर का निर्माण किया गया, जिससे मंदिर परिसर और भी भव्य हो गया है।
मुख्य विशेषताएं
महाकालेश्वर मंदिर पर होने वाली भस्म आरती सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह हर दिन ब्रह्म मुहूर्त में संपन्न होती है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित काल भैरव मंदिर एक प्राचीन और रहस्यमयी धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव के भैरव स्वरूप को समर्पित है और अपनी विशेष परंपराओं के कारण भक्तों के बीच अत्यंत प्रसिद्ध है।
मुख्य विशेषताएं
काल भैरव को उज्जैन के रक्षक देवता माना जाता है। मान्यता है कि वो महाकालेश्वर मंदिर के द्वारपाल भी हैं और शहर की रक्षा करते हैं।
मंदिरों के खजुराहो समूह में सबसे बेहतरीन मंदिरों में से एक के रूप में प्रसिद्ध, कंदरिया महादेव मंदिर मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित है। इसे चंदेल वंश के राजा विद्याधर द्वारा बनवाया गया था । यह मंदिर नागर शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला का प्रतीक है और अपनी अद्भुत शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है।
मुख्य विशेषताएं -
यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिसमें गर्भगृह के भीतर शिवलिंग स्थापित है। मंदिर सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुलता है।
4. इंदौर का अन्नपूर्णा मंदिर
अन्नपूर्णा मंदिर इंदौर का एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल है, जो देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है। यह मंदिर आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है।
मुख्य विशेषताएं-
अन्नापूर्णा मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है । इस मंदिर का मुख्य द्वार अद्वितीय शिल्पकला का उदाहरण है, जिसे चार विशाल हाथियों की भव्य मूर्तियों से सजाया गया है। मंदिर में विराजमान देवी अन्नपूर्णा की प्रतिमा श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देती है।
चतुर्भुज मंदिर मध्य प्रदेश के ओरछा में स्थित एक भव्य ऐतिहासिक मंदिर है, जिसे भगवान विष्णु को समर्पित किया गया है। यह अपनी अद्भुत स्थापत्य शैली और विशाल संरचना के लिए प्रसिद्ध है।
मुख्य विशेषताएं-
यह मंदिर अपनी ऊंची संरचना और किले जैसी बनावट के लिए जाना जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 105 मीटर है, जिससे यह भारत के सबसे ऊँचे मंदिरों में से एक माना जाता है।
भरत मिलाप मंदिर चित्रकूट के पवित्र स्थलों में से एक है, जिसे भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के पुनर्मिलन की स्मृति में बनाया गया है। यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत पूजनीय है और चित्रकूट यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।
मुख्य विशेषताएं-
यह मंदिर कामदगिरि पर्वत के समीप स्थित है, जो धार्मिक परिक्रमा मार्ग का हिस्सा है। हर साल दीपावली और रामनवमी के अवसर पर यहाँ विशेष आयोजन होते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
ग्वालियर किले के परिसर में स्थित सास बहू मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस भव्य मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कछवाहा वंश के राजा महिपाल द्वारा कराया गया था। मूल रूप से इसे भगवान विष्णु के "सहस्त्रबाहु" रूप को समर्पित किया गया था, लेकिन समय के साथ और गलत उच्चारण की वजह से इसका नाम "सास बहू मंदिर" पड़ गया।
मुख्य विशेषताएं-
यह दो मंदिरों का समूह है एक बड़ा और दूसरा छोटा। बड़े मंदिर को "सास" और छोटे मंदिर को "बहू" कहा जाता है। मंदिर की दीवारों, खंभों और छतों पर जटिल नक्काशी की गई है, जिसमें पौराणिक कथाओं और धार्मिक प्रतीकों को दर्शाया गया है।
मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर माता मंदिर शक्ति साधना और आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर माता शारदा को समर्पित है और विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के त्रिकूट पर्वत पर स्थित है।
मुख्य विशेषताएं-
मैहर माता मंदिर शक्ति उपासकों के लिए विशेष महत्व रखता है। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां मान्यता के अनुसार माता सती का हार गिरा था। इसी कारण इस स्थान का नाम "मैहर" यानि माई का हार पड़ा। इस मंदिर का संबंध प्रसिद्ध योद्धा और भक्त आल्हा-उदल से भी जोड़ा जाता है।
मध्य प्रदेश के खूबसूरत हिल स्टेशन पंचमढ़ी में स्थित जटाशंकर मंदिर एक प्रसिद्ध धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और एक संकरी गुफा में स्थित होने के कारण इसकी आध्यात्मिक और प्राकृतिक अहमियत और भी बढ़ जाती है।
मुख्य विशेषताएं-
ये मंदिर एक संकरी गुफा में स्थित है, जहां स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। गुफा में दो जल स्रोत प्रवाहित होते हैं, जिन्हें गंगा और यमुना के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने यहां आकर विश्राम किया था, और उनकी जटाओं से जलधारा प्रकट हुई थी, जिससे इस स्थान का नाम "जटाशंकर" पड़ा।
ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के बीच स्थित एक दिव्य तीर्थ स्थल है। यह मंदिर हिंदू धर्म के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है और इसकी आध्यात्मिक महत्ता अत्यधिक है।
मुख्य विशेषताएं -
यह मंदिर बारह पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है जो नागर शैली में निर्मित है और प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। ओंकारेश्वर का शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है।
भोजपुर मंदिर, जिसे भोजेश्वर मंदिर भी कहा जाता है, मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह भोपाल से लगभग 28 किलोमीटर दूर भोजपुर गाँव में स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है।
मुख्य विशेषताएं
इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग भारत के सबसे बड़े शिवलिंगों में से एक है। इसकी ऊँचाई लगभग 7.5 फीट और परिधि 18 फीट है, जिसे एक ही पत्थर से तराशकर बनाया गया है। 11वीं शताब्दी में परमार वंश के राजा भोज ने इस मंदिर का निर्माण शुरू कराया था, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका। अधूरे निर्माण के बावजूद इसकी स्थापत्य कला अद्भुत है।
मध्य प्रदेश अपनी प्राचीन विरासत और भव्य मंदिरों के कारण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग हिंदू आस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। ओरछा, भोजपुर और चित्रकूट जैसे धार्मिक स्थान श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इन ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के कारण मध्य प्रदेश आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
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