राजस्थान के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
राजस्थान में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें मेहंदीपुर बालाजी हनुमानजी के चमत्कारी मंदिरों में से एक है। खाटू श्यामजी मंदिर भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। रणकपुर जैन मंदिर, ब्रह्मा मंदिर पुष्कर, करणी माता मंदिर और एकलिंगजी मंदिर भी राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं।
राजस्थान भारत का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक राज्य है, जो अपनी भव्य स्थापत्य कला, किलों, महलों और प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहां कई प्राचीन और दिव्य मंदिर स्थित हैं, जिनमें मेहंदीपुर बालाजी, खाटू श्याम जी, रणकपुर जैन मंदिर, ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर), सालासर बालाजी और करणी माता मंदिर (देशनोक) प्रमुख हैं। ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि वास्तुकला और ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु इन पवित्र स्थलों पर दर्शन करने आते हैं, जिससे राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत समृद्ध बनी रहती है।
यह मंदिर हनुमान जी को समर्पित है और तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां भक्तों पर से भूत-प्रेत बाधाओं को दूर किया जाता है। मंदिर में विशेष रूप से शनिवार और मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।
यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण के अवतार खाटू श्याम जी को समर्पित है। यह भक्तों के बीच असीम भक्ति और श्रद्धा का केंद्र है। फाल्गुन माह में यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आते हैं।
यह भव्य जैन मंदिर भगवान आदिनाथ को समर्पित है। सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर अपनी उत्कृष्ट नक्काशी और 1444 स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें से कोई भी एक समान नहीं है।
यह मंदिर "चूहों वाले मंदिर" के नाम से प्रसिद्ध है, जहाँ हजारों काले चूहे बिना किसी डर के रहते हैं। सफेद चूहों को यहां विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह करणी माता का मंदिर है, जिन्हें दुर्गा का अवतार माना जाता है।
भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर राजस्थान के सबसे पवित्र शिव मंदिरों में से एक है। इसे मेवाड़ राजाओं का कुलदेवता मंदिर माना जाता है। यहां भगवान शिव की चार मुखों वाली काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है।
पुष्कर का ब्रह्मा मंदिर दुनिया के कुछ ही ब्रह्मा मंदिरों में से एक है। यह मंदिर हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है, जिसे पुष्कर मेला कहा जाता है।
इसे 'मंकी टेंपल' भी कहा जाता है क्योंकि यहां बहुत सारे बंदर रहते हैं। यह मंदिर पहाड़ियों के बीच स्थित है और इसके पास कई जलकुंड भी हैं, जिन्हें पवित्र माना जाता है।
अंबाजी माता को शक्ति स्वरूपा माना जाता है। यह राजस्थान और गुजरात की सीमा पर स्थित है और नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
यह प्रसिद्ध हनुमान मंदिर चमत्कारी माना जाता है और विशेष रूप से चैत्र पूर्णिमा व आश्विन पूर्णिमा को यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
यह मंदिर नागणेची माता को समर्पित है, जो राठौड़ राजपूतों की कुलदेवी मानी जाती हैं। यहां नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और मेले का आयोजन किया जाता है।
यह मंदिर एक गुफा में स्थित है और इसे भगवान परशुराम की तपस्या स्थली माना जाता है। यहां जाने के लिए कठिन चढ़ाई करनी पड़ती है, लेकिन मंदिर की दिव्यता और सुंदरता भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
राजस्थान में आमेर किला (जयपुर), मेहरानगढ़ किला (जोधपुर), चित्तौड़गढ़ किला, कुंभलगढ़ किला, और सिटी पैलेस (उदयपुर) जैसे भव्य किले और महल हैं, जो इसकी समृद्ध राजपूत विरासत को दर्शाते हैं।
थार रेगिस्तान राजस्थान की पहचान है। जैसलमेर और बीकानेर में ऊँट सफारी और सम सैंड ड्यून्स प्रमुख आकर्षण हैं।
राजस्थान में खाटू श्याम जी, सालासर बालाजी, मेहंदीपुर बालाजी, ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर), करणी माता मंदिर (देशनोक) और रणकपुर जैन मंदिर जैसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं।
राजस्थानी लोक नृत्य जैसे गोरी, घूमर, कालबेलिया और लोक संगीत यहां की पहचान हैं। कठपुतली नृत्य और मांड गायकी भी काफी प्रसिद्ध हैं।
राजस्थानी भोजन में दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, मिर्ची बड़ा, घेवर, और प्याज की कचौरी विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।
यहां के प्रमुख मेले और उत्सव हैं – पुष्कर मेला, डेजर्ट फेस्टिवल (जैसलमेर), तीज, गणगौर, और मकर संक्रांति।
जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के बाजारों में बांधनी साड़ियां, ब्लू पॉटरी, जूतियां, और मिनिएचर पेंटिंग्स मिलती हैं।
रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, सरिस्का टाइगर रिजर्व और केवलादेव पक्षी अभयारण्य प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण हैं।
राजस्थान अपनी विरासत, आतिथ्य और रंगीन संस्कृति के कारण भारत का एक अनोखा और अद्भुत राज्य है।
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