नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष माँ काली तंत्र युक्त यज्ञ
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नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष माँ काली तंत्र युक्त यज्ञ
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नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष माँ काली तंत्र युक्त यज्ञ
नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष माँ काली तंत्र युक्त यज्ञ
शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष

माँ काली तंत्र युक्त यज्ञ

नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए
temple venue
श्री तारापीठ मंदिर, पश्चिम बंगाल
pooja date
Warning Infoइस पूजा की बुकिंग बंद हो गई है
srimandir devotees
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अब तक2,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं

नकारात्मक ऊर्जा, बुरी शक्तियों एवं भय से सुरक्षा के लिए शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष माँ काली तंत्र युक्त यज्ञ

वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है। शनि को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय हैं, लेकिन शनि की कृपा पाने के लिए मां काली की कृपा होना भी जरूरी है। शनिवार का दिन भगवान शनि को समर्पित है और शनिग्रह को नियंत्रित करने वाली देवी मां काली शनि के प्रकोप से लोगों की रक्षा करती हैं। मां काली न केवल अपने भक्तों को शनि के दुष्प्रभावों से बचाती हैं बल्कि उन्हें नकारात्मक एवं बुरी शक्तियों से भी सुरक्षा प्रदान करती हैं।

पश्चिम बंगाल में स्थित श्री तारापीठ मंदिर उन शक्तिपीठों में से एक है, जहां मां काली को मां तारा के रूप में पूजा जाता है। इस शक्तिपीठ में मां काली तंत्र युक्त यज्ञ कराने से नकारात्मक ऊर्जाओं, बुरी शक्तियों से सुरक्षा प्राप्त होती है और सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। तंत्र साधना में काली पूजा रात में की जाती है, इसलिए यह यज्ञ रात में किया जाएगा। श्री मंदिर के माध्यम से इस शक्तिपीठ मां काली रात्रि विशेष यज्ञ में भाग लें और मां काली से आशीर्वाद प्राप्त करें।

पूजा लाभ

puja benefits
नकारात्मक ऊर्जाओं एवं बुरी शक्तियों का विनाश
तारापीठ में देवी काली के रूप में विराजित मां तारा की इस विशेष पूजा से भक्तों को नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा का आशीष प्राप्त होता है। मां तारा सभी बुरी एवं नकारात्मक शक्तियों के विनाश के लिए जानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी काली की जो भक्त सच्चे दिल से आराधना करते हैं उनके जीवन में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाएं एवं बुरी शक्तियां टिक नहीं पाती हैं।
puja benefits
भय से सुरक्षा
मान्यता है कि मां काली की विशेष पूजा से भक्तों साहस के साथ आत्मविश्वास की वृद्धि होती है जिससे उन्हें किसी भी तरह के अनजाने भय से मुक्ति मिलती है और देवी मां के आशीष से व्यक्ति भय मुक्त होकर जीवन में आगे बढता है। भले ही मां काली का रूप उग्र हो लेकिन उनकी आराधना करने वाले भक्तों को जीवन में सभी तरह के भय से मुक्‍ति मिल जाती है।
puja benefits
ग्रहों के अशुभ प्रभावों से मुक्ति
मां काली, देवी आदिशक्ति का अवतार हैं, जो संपूर्ण ब्रह्मांड और सभी ग्रहों पर शासन करती है। इसलिए उनकी पूजा करने से कुंडली के ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। तारापीठ में मां काली की इस पूजा को करने से भक्तों को ग्रहों के अशुभ प्रभाव से सुरक्षा का आशीष प्राप्त होता है।

पूजा प्रक्रिया

Number-0

पूजा चयन करें

4 विभिन्न पूजा पैकेज ऑप्शन से चयन करें।
Number-1

अर्पण जोड़ें

अपनी पूजा के साथ गौ सेवा, वस्त्र दान, दीप दान भी करें। पूजा के लिए भुगतान करें।
Number-2

संकल्प विवरण दर्ज करें

अपना नाम और गोत्र दर्ज करें।
Number-3

पूजा दिन

अनुभवी पंडितों द्वारा वैदिक प्रक्रिया के अनुसार पूजा होगी। आपको अपने WhatsApp नंबर पर अपडेट्स मिलेंगे।
Number-4

पूजा वीडियो एबं तीर्थ प्रसाद डिलीवरी

अपने पंजीकृत WhatsApp नंबर पर पूजा के 4-5 दिनों में पूजा वीडियो एबं आपके दिए गए पते पर 8-10 दिनों बाद तीर्थ प्रसाद प्राप्त करें ।

श्री तारापीठ मंदिर,पश्चिम बंगाल

श्री तारापीठ मंदिर,पश्चिम बंगाल
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां तारा की उत्पत्ति उस समय हुई थी जब समुद्र मंथन के समय विष निकला था, उस दौरान भगवान शिव ने यह विष ग्रहण कर लिया था, जिसके कारण शिवजी के शरीर में अत्याधिक जलन और पीड़ा होने लगी थी। भगवान शिव को पीड़ा से मुक्त करने के लिए मां काली ने दूसरा स्वरूप धारण किया और शिव जी को स्तनपान कराया, जिसके बाद उनके शरीर की जलन शांत हुई थी। इसलिए कहते हैं कि तारा देवी मां काली का ही दूसरा स्वरूप है।

पुराणों के अनुसार पश्चिम बंगाल में स्थित श्री तारापीठ मंदिर तंत्र साधना का जागृत स्थल माना जाता है। 10 महाविद्या में दूसरा स्थान रखने वाली मां तारा यहां अपने सौम्य रूप में विराजित हैं। मान्यता है कि सुदर्शन चक्र से भगवान विष्णु ने मां सती के शरीर के टुकड़े किए थें। उस दौरान माता सती के अंगों में से आंख की पुतली यहां गिरी थी। बांग्ला में आंख की पुतली को तारा कहते हैं और इसलिए इस जगह का नाम तारापीठ पड़ा। यहां पूजा करने से भक्तों के जीवन से सभी तरह की आपदाएं दूर हो जाती हैं।

कैसा रहा श्री मंदिर पूजा सेवा का अनुभव?

क्या कहते हैं श्रद्धालु?
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