ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, साढ़ेसाती तब प्रारंभ मानी जाती है जब शनि देव जन्म कुंडली की चंद्र राशि से बारहवें भाव में प्रवेश करते हैं, इसके बाद चंद्र राशि पर गोचर करते हैं और फिर दूसरे भाव में संचरण करते हैं। शनि प्रत्येक राशि में लगभग ढाई वर्ष तक रहते हैं, इसलिए यह संपूर्ण अवधि लगभग साढ़े सात वर्ष की होती है। शास्त्रीय दृष्टि से इसे दंड का समय नहीं, बल्कि कर्मों के परिणामों को समझने और जीवन में अनुशासन सीखने का काल माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में व्यक्ति को अपने पूर्व कर्मों के अनुरूप परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण देरी, जिम्मेदारियाँ, मानसिक दबाव या चुनौतियाँ बढ़ी हुई प्रतीत हो सकती हैं।
परंपरागत शनि उपासना के अनुसार, साढ़ेसाती के प्रभाव को संतुलित करने के लिए केवल एक साधारण पूजा पर्याप्त नहीं मानी जाती। शनि देव को अनुशासन, सेवा, संयम और करुणा प्रिय माने गए हैं। इसलिए मंत्र जाप, तिल तेल अभिषेक, सेवा और दान जैसे उपायों को सम्मिलित रूप से करना अधिक फलदायी माना जाता है। इसी कारण शनि शांति के लिए कई विशेष अनुष्ठानों का विधान बताया गया है, जिन्हें श्रद्धा और विधि पूर्वक करने की परंपरा है।
🪐 शनि मूल मंत्र जाप- मान्यता है कि शनि मूल मंत्र का 23,000 बार जाप बार बार आने वाली रुकावटों, देरी और ठहराव के कारणों को शांत करने में सहायक होता है तथा मन को स्थिरता और धैर्य प्रदान करता है।
🪐 शनि तिल तेल अभिषेक- तिल तेल से अभिषेक को शनि देव की तीव्र ऊर्जा को संतुलित करने का उपाय माना गया है। इससे कर्ज, विवाद, कानूनी दबाव और मानसिक बोझ में कमी आने की धारणा है।
🪐 शनि महा सेवा- सेवा भाव शनि उपासना का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। यह अनुशासन, जिम्मेदारी और विनम्रता जैसे गुणों को मजबूत करता है, जो शनि देव को प्रिय माने जाते हैं।
🪐 कौआ सेवा- कौआ शनि देव का दूत माना गया है। उसे अन्न अर्पित करना शनि कृपा प्राप्त करने का सरल उपाय माना जाता है, जिससे दोष और रुकावटें कम होती हैं।
🛕 यह चारों अनुष्ठान उज्जैन स्थित नवग्रह शनि मंदिर में संपन्न किए जा रहे हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार उज्जैन को ग्रह उपासना का महत्वपूर्ण केंद्र माना गया है, जहां शनि देव की पूजा अन्य नवग्रहों के साथ की जाती है।
🙏 इन सभी अनुष्ठानों को एक साथ विधि पूर्वक करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। श्री मंदिर के माध्यम से भक्त इन पूजाओं में सरल और सुविधाजनक रूप से भाग ले सकते हैं, जहां शनि महा सेवा और कौआ सेवा जैसी आवश्यक सेवाएं भी एक ही व्यवस्था में सम्मिलित होती हैं। यह एक सहज माध्यम है, जिससे श्रद्धालु श्रद्धा भाव के साथ शनि उपासना कर सकते हैं।