सावन का दूसरा सोमवार और कामिका एकादशी का दुर्लभ संयोग — भगवान शिव और विष्णु जी की कृपा पाने का अवसर 🔱🕉️
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। यह समय उनके पूजन, व्रत और अभिषेक के लिए अत्यंत शुभ होता है। विशेषकर सावन के सोमवार को किए गए उपासना और संकल्प बहुत फलदायी माने जाते हैं। इस वर्ष सावन का दूसरा सोमवार एक और पवित्र तिथि, कामिका एकादशी, के साथ आ रहा है। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित दिन होता है। जब शिव जी का सोमवार और विष्णु की एकादशी एक साथ पड़ते हैं, तो इसे ईश्वरीय संतुलन का अत्यंत दुर्लभ संयोग माना जाता है।
इस विशेष संयोग पर उत्तराखंड के पवित्र कमलेश्वर महादेव मंदिर में एक आध्यात्मिक आयोजन किया जा रहा है ‘कमलेश्वर शिव–विष्णु रुद्राभिषेक और कमल दान पूजा’ यह पूजा उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है जो ईश्वर की कृपा, मन की शांति, पापों से मुक्ति और जीवन में स्थिरता की कामना रखते हैं। पूजा में गंगाजल, पंचामृत, तुलसी, बेलपत्र और कमल से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया जाएगा। साथ ही श्रद्धालु "कमल दान संकल्प" के अंतर्गत एक कमल अर्पित करके अपने भीतर की किसी मनोवृत्ति, दोष या भय को प्रभु को समर्पित करेंगे। इस विशेष अवसर पर "सुदर्शन दीप सेवा" भी की जाएगी, जो मार्गदर्शन, सुरक्षा और आत्मिक प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है।
🔱 कमलेश्वर महादेव मंदिर: वह धाम जहां विष्णु जी ने भगवान शिव को दान की थी अपनी आँख
उत्तराखंड के गुप्तकाशी क्षेत्र में स्थित कमलेश्वर महादेव मंदिर, शिव और विष्णु दोनों की आराधना का विशेष स्थल माना जाता है। एक प्राचीन कथा के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहां भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए 1008 कमल पुष्प अर्पित किए थे। जब एक कमल कम रह गया, तो उन्होंने अपनी एक आंख अर्पित कर दी, जिसे "चक्षु दान" कहा जाता है। इस समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया। तभी से यह मंदिर शिव–विष्णु के मिलन और परस्पर कृपा का प्रतीक बन गया है। इस प्रकार, सावन के दूसरे सोमवार और कामिका एकादशी के इस अद्भुत संयोग पर कमलेश्वर महादेव में आयोजित यह विशेष पूजा, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वरीय संतुलन प्राप्त करने का एक श्रेष्ठ अवसर बन सकती है।
आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस विशेष अनुष्ठान में भाग लें।