शनि त्रयोदशी हिंदू पंचांग में एक विशेष व्रत और पूजा का दिन माना जाता है, जो तब आता है जब त्रयोदशी तिथि शनिवार को पड़ती है। इस दिन शनि देव, भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि शनि त्रयोदशी जीवन में कर्म, अनुशासन और आत्मचिंतन से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है। इस तिथि पर की गई साधना व्यक्ति को अपने जीवन में चल रही परिस्थितियों को गहराई से समझने और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
सनातन परंपरा में शनिवार को की जाने वाली शनि साधना को गंभीर और गहन माना गया है। शनि त्रयोदशी के दिन की गई पूजा को कर्मों के संतुलन और मानसिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। इसी अवसर पर उज्जैन के नवग्रह शनि मंदिर में 51 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सामूहिक रूप से 92,000 शनि मूल मंत्र जाप किया जा रहा है। ऐसा माना जाता है कि इस प्रकार का सामूहिक जाप शनिदेव से जुड़े ग्रह प्रभावों, जीवन में आ रही रुकावटों और मन में बने भारीपन को शांत भाव से समझने का माध्यम बनता है। जब यह जाप विधि विधान और संकल्प के साथ किया जाता है, तो वातावरण में अनुशासन और साधना की गंभीरता अनुभव की जाती है।
इसी अनुष्ठान के साथ 1008 हनुमान अष्टक पाठ भी किया जाता है, जिसे वही 51 ब्राह्मण श्रद्धा और नियम के साथ संपन्न करते हैं। हनुमान जी को भय, मानसिक कमजोरी और असमंजस से रक्षा करने वाले देवता के रूप में देखा जाता है। विशेषकर शनिवार और शनि त्रयोदशी के संयोग में किया गया हनुमान अष्टक पाठ मन को स्थिर रखने और आंतरिक साहस को जाग्रत करने की साधना माना गया है। यह पाठ साधक को अपने भीतर चल रहे तनाव और नकारात्मक विचारों को शांत भाव से देखने की प्रेरणा दे सकता है।
शास्त्रों में शनि देव और हनुमान जी के संबंध का उल्लेख मिलता है, जहां यह मान्यता है कि हनुमान जी ने शनिदेव को कष्ट से मुक्त किया था। इसी कारण शनिदेव हनुमान भक्तों के प्रति सौम्यता का भाव रखते हैं। इसी परंपरा के आधार पर शनि त्रयोदशी पर शनि देव और हनुमान जी की संयुक्त उपासना को संतुलन और संरक्षण की साधना के रूप में देखा जाता है। उज्जैन के नवग्रह शनि मंदिर में परंपरागत वैदिक विधि से किया जाने वाला यह संयुक्त अनुष्ठान साधकों को अपने जीवन की गति, कर्म और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्रदान करता है।
जो श्रद्धालु शनि त्रयोदशी के इस विशेष अवसर पर इस साधना परंपरा से जुड़ना चाहते हैं, वे श्री मंदिर के माध्यम से इस सामूहिक अनुष्ठान में भाग ले सकते हैं।