✨ बाला त्रिपुर सुंदरी और मां ललिता की पूजा श्रीविद्या परंपरा की अत्यंत महत्वपूर्ण साधना मानी गई है। बाला त्रिपुर सुंदरी को माँ ललिता का बाल रूप कहा जाता है, जो सरलता, संरक्षण और शीघ्र फल प्रदान करती हैं। उनकी उपासना से भय, अस्थिरता और मानसिक चंचलता शांत होती है। माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी की पूजा साधक को बच्चों की भलाई, समृद्धि, आकर्षण और आध्यात्मिक चेतना प्रदान कर सकती है। दोनों की संयुक्त उपासना से जीवन में संतुलन, आत्मविश्वास और सकारात्मक परिवर्तन आता है और बच्चों की भलाई, उन्नति के नए रास्ते बन सकते हैं।
परिवार में बच्चों की सुख-शांति, सुरक्षा और समग्र विकास के लिए बाला त्रिपुर सुंदरी जप, ललिता सहस्रनाम पाठ और हवन अत्यंत प्रभावशाली साधना मानी जाती है। बाला त्रिपुर सुंदरी माँ ललिता का कोमल स्वरूप हैं, जो बच्चों को भय, नकारात्मक प्रभाव और मानसिक अस्थिरता से सुरक्षित रखती हैं। उनके मंत्रों के जप से बुद्धि का विकास, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है। घर-परिवार में बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य, भविष्य की दिशा और समग्र कल्याण के नए रास्ते मिल सकते हैं।
विद्वान मानते हैं कि मां ललिता सहस्रनाम पाठ से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे वातावरण शांत और संस्कारपूर्ण बनता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान दिव्य काल में हवन के माध्यम से साधना की ऊर्जा सूक्ष्म रूप से पूरे परिवार में फैलती है और बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भावनात्मक संतुलन को बल मिलता है। यह संयुक्त साधना बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और पारिवारिक कल्याण के लिए विशेष फलदायी मानी गई है। कहते हैं कि यदि घर में बच्चों का भविष्य संवर गया, उनकी उन्नति हो गई तो पूरे परिवार के लिए सौभाग्य की दिशा तय हो जाती है। इसी भाव और प्रार्थना के साथ दो महासिद्ध तीर्थों में यह अनुष्ठान होने जा रहा है।
🕉️ हैदराबाद के बाला त्रिपुर सुंदरी मंदिर और प्रयागराज के मां ललिता शक्तिपीठ में होने जा रहे सहस्रनाम और हवन में श्री मंदिर के माध्यम से घर बैठे भाग ल सकते हैं।