फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण वैदिक परंपरा में अत्यंत प्रभावशाली और जागृत आध्यात्मिक समय माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र देव मन के स्वामी हैं और मन की शांति, भावनात्मक संतुलन, पारिवारिक सामंजस्य, धन के प्रवाह और जीवन की सुख-समृद्धि पर उनका सीधा प्रभाव पड़ता है। जब चंद्रमा मजबूत होता है तो व्यक्ति का दृष्टिकोण सकारात्मक रहता है, निर्णय संतुलित होते हैं और रिश्तों में मधुरता बनी रहती है, लेकिन जब उनका प्रभाव कमजोर होता है तो मन अशांत होने लगता है और जीवन की दिशा अस्थिर महसूस होती है। इसलिए चंद्र ग्रहण का समय चंद्र शक्ति को संतुलित और जागृत करने के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
यह संपूर्ण शांति अनुष्ठान हरिद्वार के पवित्र गंगा घाट पर संपन्न होगा, जहाँ की दिव्य धारा को मन और भावनाओं की शुद्धि का सर्वोच्च माध्यम माना गया है। मान्यता है कि गंगा तट पर किया गया जप, दान और अर्घ्य साधना के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है और चंद्र ऊर्जा को शीघ्र जागृत करने में सहायक होता है। पवित्र जल के सान्निध्य में की गई चंद्र उपासना मन की अशांति को शांत करने और भीतर शीतलता स्थापित करने की भावना से जुड़ी होती है।
इस दिव्य अवसर पर 1,51,000 चंद्र मंत्रों का सामूहिक जाप किया जाएगा, जिसे मानसिक शांति, भावनात्मक मजबूती और जीवन में स्थिरता लाने का शक्तिशाली माध्यम माना जाता है। ग्रहण काल में किया गया मंत्र जाप सामान्य समय की तुलना में अधिक जागृत माना जाता है और इसका प्रभाव सीधे साधक के मन और ऊर्जा पर पड़ता है। जब इतनी बड़ी संख्या में चंद्र मंत्रों का उच्चारण होता है, तो यह विचारों को स्थिर करने, सकारात्मक भावनाओं को बढ़ाने और जीवन में संतुलन स्थापित करने की भावना से जुड़ा होता है।
चंद्र ग्रहण के समय दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। इस अनुष्ठान में 101 वैदिक ब्राह्मणों को महादान किया जाएगा, जिसे अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यह दान केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि जीवन में स्थिरता, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह की प्रार्थना का माध्यम होता है। गंगा घाट, हरिद्वार जैसे दिव्य तीर्थ पर किया गया यह महादान साधना के प्रभाव को और अधिक जागृत करने वाला माना जाता है।
इसके साथ ही चंद्र अर्घ्य पूजा की जाएगी, जो मन की शीतलता, भावनाओं की पवित्रता और जीवन में संतुलन का प्रतीक मानी जाती है। अर्घ्य अर्पित करने का भाव यह होता है कि जीवन की बेचैनी, अस्थिरता और मानसिक दबाव गंगा जल की पवित्र धारा में समर्पित हो जाएँ और भीतर शांति, संतोष और सकारात्मकता का प्रकाश स्थापित हो।
आज के समय में मानसिक तनाव, मूड स्विंग, रिश्तों में गलतफहमी, आर्थिक अस्थिरता और भावनात्मक असंतुलन जैसी स्थितियाँ सामान्य हो गई हैं। वैदिक मान्यता के अनुसार इन सभी का संबंध चंद्र ऊर्जा से माना जाता है। इसलिए हरिद्वार के गंगा घाट पर चंद्र ग्रहण के इस प्रभावशाली समय में किया गया यह संपूर्ण शांति अनुष्ठान मन को स्थिर करने, भावनात्मक शक्ति बढ़ाने, वैवाहिक जीवन में मधुरता लाने और जीवन को संतुलित दिशा देने की भावना से किया जाता है।
श्री मंदिर के माध्यम से आप इस दुर्लभ अनुष्ठान में अपने नाम से संकल्प जोड़ सकते हैं और गंगा तट पर संपन्न इस पावन साधना के द्वारा चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने का दिव्य अवसर पा सकते हैं। यह साधना मन की शांति, रिश्तों में प्रेम, आर्थिक संतुलन और जीवन में समग्र स्थिरता की प्रार्थना का पवित्र माध्यम मानी जाती है।