ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब कुंडली के सातों ग्रह राहु-केतु के मध्य आ जाते हैं तो कालसर्प दोष बनता है। मान्यता है कि स्वाति नक्षत्र पर कालसर्प दोष की पूजा कराकर इसके अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है। स्वाति नक्षत्र स्वामी ग्रह राहु है, जो काल सर्प दोष का महत्वपूर्ण कारक माना जाता है। वहीं बुधवार का दिन केतु के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसलिए स्वाति नक्षत्र एवं बुधवार के शुभ संयोग पर कालसर्प दोष की पूजा कराने से राहु एवं केतु को प्रसन्न कर इस दोष से उत्पन्न होने वाले अशुभ प्रभाव कम किया जा सकता है। इस पूजा सर्पों के साथ उनके अधिपति देवता भगवान शिव का भी आह्वाहन किया जाता है। दिनांक 22 मई 2024 को प्रयागराज में श्री तक्षकेश्वर तीर्थ मंदिर में होने वाली इस पूजा में श्री मंदिर के द्वारा भाग लें और इस अशुभ दोष से मुक्ति का आशीष पाएं।