शास्त्रों में ऐसा माना गया है कि माँ कमलात्मिका, माँ लक्ष्मी का तांत्रिक और मूल स्वरूप हैं। वह उस शक्ति का प्रतीक हैं, जिससे जीवन में समृद्धि के विभिन्न रूप प्रकट होते हैं। इसमें केवल धन ही नहीं, बल्कि संसाधन, सही समय पर मिलने वाले अवसर और भीतर की संतुलित संपन्नता भी शामिल मानी जाती है। यह भी कहा जाता है कि उनकी कृपा क्षणिक लाभ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन की जड़ में बसे मूल धन और स्थिर आधार से जुड़ी होती है। विशेष रूप से तब माँ कमलात्मिका की उपासना का महत्व बताया गया है, जब जीवन में श्री लक्ष्मी तो आती हैं, लेकिन टिक नहीं पातीं। शास्त्र संकेत देते हैं कि धन को बनाए रखने के लिए केवल प्राप्ति नहीं, बल्कि सुरक्षा, अनुशासन और संतुलन भी आवश्यक होते हैं।
इसी कारण माँ कमलात्मिका की पूजा भगवान कुबेर के साथ की जाती है। भगवान कुबेर को देवताओं का कोषाध्यक्ष माना गया है और उनकी नव निधियाँ संचित संपत्ति, भंडार, संसाधन और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। दैनिक जीवन में कई बार ऐसा अनुभव होता है कि आय बढ़ती है, नए अवसर मिलते हैं, लेकिन फिर भी बचत नहीं बन पाती। कभी अचानक खर्च बढ़ जाते हैं, तो कभी धन बिना स्पष्ट कारण के बाहर चला जाता है। शास्त्रों में इसे उस स्थिति से जोड़ा गया है, जब लक्ष्मी तत्व सक्रिय तो होता है, लेकिन उसे स्थिर आधार नहीं मिल पाता। माँ कमलात्मिका की उपासना को इस असंतुलन को समझने और भीतर से संतुलन स्थापित करने का मार्ग माना गया है।
यह पूजा व्यक्ति को स्पष्टता, अनुशासन और धर्म व परिश्रम पर आधारित समृद्धि की दिशा की ओर जागरूक करने का भाव दे सकती है। इस साधना को पूर्ण करते हैं भगवान कुबेर, जो धन के संरक्षण और संतुलन के प्रतीक माने जाते हैं। ऐसी धारणा है कि जहाँ लक्ष्मी की कृपा चंचल हो सकती है, वहीं कुबेर की निधियाँ स्थायित्व का भाव देती हैं। इसी कारण माँ कमलात्मिका और भगवान कुबेर को मिलकर स्थिर और संतुलित समृद्धि का प्रतीक माना गया है।
रुद्रप्रयाग के कालीमठ मंदिर में माँ कमलात्मिका के लिए 10008 कमल गट्टा बीज अर्पण और कुबेर नव निधि पूजा की जा रही है। यह पूजा शुक्रवार के दिन संपन्न की जाती है, जिसे देवी साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह अनुष्ठान केवल धन प्राप्ति की भावना से नहीं, बल्कि भीतर एक संतुलित कोष ऊर्जा को जाग्रत करने के उद्देश्य से किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह साधना स्थिरता, संरक्षण और जिम्मेदारी के साथ समृद्धि को समझने की आध्यात्मिक नींव रखने में सहायक होती है और धन से जुड़े निर्णयों में संतुलन और समझदारी का भाव विकसित करती है।
आप भी इस विशेष पूजा में श्री मंदिर के माध्यम से भाग लेकर वित्तीय संतुलन, दीर्घकालिक स्थिरता और जीवन में शांति का अनुभव कर सकते हैं। 🌸