कालाष्टमी को भगवान काल भैरव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भैरव देव, जो समय, न्याय, भय से मुक्ति और नकारात्मक शक्तियों पर नियंत्रण के अधिपति माने जाते हैं, अपने भक्तों पर विशेष कृपा दृष्टि रखते हैं। कालाष्टमी पर किया जाने वाला 4 प्रहर काल भैरव अभिषेक विशेष आध्यात्मिक साधना के रूप में देखा जाता है। पूरे दिन को चार प्रहरों में विभाजित कर भगवान का जल, दूध, दही, घी, शहद और अन्य पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। इसके साथ श्रृंगार, खप्पर और भोग सेवा भी सम्मिलित रहती है, जिन्हें भक्ति, समर्पण और आंतरिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रों में ऐसी धारणा है कि इस प्रकार विधिपूर्वक किया गया 4 प्रहर अभिषेक साधक के जीवन में चल रही रुकावटों, भय और अदृश्य नकारात्मक प्रभावों को शांत करने में सहायक हो सकता है। विशेष रूप से वे लोग, जो लंबे समय से मानसिक अस्थिरता, अनिश्चित परिस्थितियों या शत्रु बाधा जैसी स्थितियों से गुजर रहे हों, वे इस दिन की उपासना से आध्यात्मिक सहारा अनुभव कर सकते हैं। काल भैरव को ‘काशी का रक्षक’ कहा जाता है, और मान्यता है कि काशी स्थित श्री काल भैरव मंदिर में उनकी पूजा साहस, संरक्षण और कर्म संतुलन की भावना को मजबूत करती है।
पौराणिक कथाओं में वर्णन मिलता है कि जब अधर्म और अन्याय बढ़ा, तब भगवान शिव ने काल भैरव रूप धारण कर दुष्ट शक्तियों का नाश किया और धर्म की रक्षा की। इसी कारण भैरव देव को समय और न्याय का प्रतीक माना जाता है। कालाष्टमी की तिथि पर उनका अभिषेक और पूजन व्यक्ति को अपने भय, भ्रम और नकारात्मक सोच से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है। खप्पर अर्पण उनकी वैराग्य शक्ति का स्मरण कराता है, श्रृंगार सेवा श्रद्धा का प्रतीक है, और भोग सेवा कृतज्ञता की अभिव्यक्ति मानी जाती है।
इसीलिए कालाष्टमी के अवसर पर श्री काल भैरव मंदिर, काशी में 4 प्रहर अभिषेक, श्रृंगार, खप्पर और भोग सेवा जैसे अनुष्ठान संपन्न किए जा रहे हैं। आप भी इस अनुष्ठान में श्री मंदिर के माध्यम से जुड़कर इस साधना में के पुण्यफल के भागी बनकर भैरव कृपा से आंतरिक मजबूती, संरक्षण की भावना और आध्यात्मिक संतुलन का अनुभव कर सकते हैं।