सनातन परंपरा में माँ प्रत्यंगिरा देवी को नकारात्मकता निवारण की एक अत्यंत शक्तिशाली और उग्र स्वरूप वाली देवी माना जाता है। माँ प्रत्यंगिरा आदिशक्ति का वह रूप हैं, जो अचानक उत्पन्न होने वाली बाधाओं, भय, नकारात्मक दृष्टि और अनदेखी ऊर्जा प्रभावों से रक्षा के भाव से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि जब जीवन में कारण स्पष्ट न होने पर भी स्थितियाँ बिगड़ने लगें, मन भारी रहने लगे या बार-बार रुकावटें सामने आने लगें, तब माँ प्रत्यंगिरा की उपासना साधक को भीतर से स्थिर और सजग बनाने की दिशा में मार्गदर्शन देती है।
माँ प्रत्यंगिरा का स्वरूप तेजस्वी और उग्र है, जो नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को शांत करने वाले शक्ति तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। शास्त्रों में यह धारणा है कि माँ की साधना व्यक्ति के चारों ओर एक प्रकार की सुरक्षा भावना उत्पन्न करती है, जिससे मन भय और भ्रम से मुक्त होकर संतुलन की ओर बढ़ता है। यही कारण है कि माँ प्रत्यंगिरा को विशेष रूप से बुरी नज़र, ऊर्जा असंतुलन और अदृश्य नकारात्मक प्रभावों से जुड़ी समस्याओं के संदर्भ में स्मरण किया जाता है। आज के समय में कई लोगों को यह अनुभव होता है कि पूरी मेहनत और प्रयास के बावजूद काम बनते-बनते बिगड़ जाते हैं।
कभी रिश्तों में बिना कारण तनाव बढ़ जाता है, कभी करियर या व्यापार में अचानक रुकावट आ जाती है, तो कभी मन में अनजाना डर और बेचैनी बनी रहती है। ऐसा माना जाता है कि कई बार इसके पीछे बाहरी कारणों के साथ साथ सूक्ष्म ऊर्जा असंतुलन भी भूमिका निभाता है। ऐसी स्थितियों में माँ प्रत्यंगिरा की साधना को भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर संतुलन बनाने का माध्यम माना गया है। माँ प्रत्यंगिरा की कृपा प्राप्ति के लिए देवी साधना में विशेष दिनों का महत्व बताया गया है। शुक्रवार को शक्ति उपासना के लिए उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि यह दिन देवी तत्व से जुड़ा हुआ है।
इसी परंपरा के अनुसार शुक्रवार को आदिशक्ति महाकाली दस महाविद्या सिद्धपीठ मंदिर में माँ प्रत्यंगिरा हवन का आयोजन किया जा रहा है। यह हवन देवी को समर्पित मंत्रों और आहुतियों के माध्यम से किया जाता है, जिससे साधना का वातावरण गंभीर और ऊर्जा केंद्रित बना रहता है। माँ प्रत्यंगिरा हवन को साधक द्वारा अपनी चिंताओं, भय और नकारात्मक प्रभावों को देवी चरणों में अर्पित करने की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस साधना से व्यक्ति अपने भीतर आत्मबल, सजगता और मानसिक स्थिरता का अनुभव करता है।
श्री मंदिर के माध्यम से इस माँ प्रत्यंगिरा हवन में भाग लेकर साधक इस देवी साधना परंपरा से जुड़ सकते हैं।