🕉️ महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन रात्रि मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार इसी रात्रि भगवान शिव अनंत ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे और इसी दिन शिव जी-माता पार्वती का दिव्य मिलन भी माना जाता है। इस रात्रि की गई पूजा, जप और अभिषेक को विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। भक्त व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और रात्रि जागरण के माध्यम से महादेव से जुड़ने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि इस रात्रि की गई साधारण पूजा भी जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्थिरता का अनुभव कराती है।
🕉️ इस दिव्य अवसर को और भी विशेष बनाता है प्रयागराज में आयोजित माघ मेला। त्रिवेणी संगम- जहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम होता है, सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है। यहां किया गया शाही स्नान शरीर के साथ-साथ मन और भावनाओं को भी शुद्ध करने की भावना से जुड़ा माना जाता है। यह महाशिवरात्रि माघ मेले के अंतिम शाही स्नान का दिन है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन साधु-संतों, अखाड़ों और लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस अवसर को अत्यंत दुर्लभ और पावन बनाती है।
🕉️ महाशिवरात्रि और अंतिम शाही स्नान के इस विशेष संयोग पर त्रिवेणी संगम पर शिव रुद्राभिषेक और रुद्र हवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि संगम स्थल पर शुभ तिथि में की गई शिव आराधना सीधे महादेव तक पहुंचती है। इस अवसर पर भक्त अपनी मनोकामनाएं, आर्थिक स्थिरता और जीवन में संतुलन के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं। संगम के पवित्र जल, रुद्र हवन की अग्नि और शिव अभिषेक के माध्यम से वातावरण में श्रद्धा, समर्पण और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव होता है।
✨श्री मंदिर के माध्यम से आयोजित यह विशेष पूजा महाशिवरात्रि, माघ मेला के अंतिम शाही स्नान और भगवान शिव की कृपा, तीनों का दिव्य संगम आपके जीवन में लाने का पावन अवसर प्रदान करती है।