सनातन धर्म में शिव की पूजा के लिए ज्योतिर्लिंगों और शक्ति की पूजा के लिए शक्तिपीठों को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। भगवान शिव के साथ शक्ति की पूजा करने से शुभ एवं शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। श्री ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से चौथा ज्योतिर्लिंग है। कहा जाता है कि इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है। शिव पुराण के अनुसार अगर कोई इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन नहीं कर पाता है, तो द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र करने से 12 ज्योतिर्लिंगों का आशीर्वाद मिलता है। मान्यता है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को निर्भयता का आशीष एवं शिव जी की कृपा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
वहीं, कोल्हापुर महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर को 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव की पत्नी सती ने दक्ष यज्ञ के दौरान आत्मदाह कर लिया था, तब भगवान शिव ने शोक में उनके शरीर को अपने साथ लेकर तांडव करने लगे, तभी भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े कर दिए एवं उनके अंग जिन स्थानों पर गिरें वो पवित्र शक्तिपीठों के रूप में जाने गए। कोल्हापुर महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर में देवी सती का दिव्य नेत्र गिरा था। इस मंदिर में महालक्ष्मी के रूप में शक्ति की पूजा की जाती है, जिससे भक्तों को धन एवं समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। शिव पुराण के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को शिव और शक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है, तो उसे कोई भी हरा नहीं सकता। ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ माँ महालक्ष्मी अम्बाबाई मंदिर में शिव द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र पाठ एवं महालक्ष्मी पूजा का आयोजन किया जाएगा। इस विशेष संयुक्त पूजा में भाग लें और शिव एवं शक्ति का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें।