पितृ शांति एवं पारिवारिक क्लेश से मुक्ति के लिए पंच मोक्ष तीर्थ श्राद्ध प्रारंभ विशेष पितृ दोष शांति पंच तीर्थ महापूजा और गंगा दुध अभिषेक
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पंच मोक्ष तीर्थ श्राद्ध प्रारंभ विशेष

पितृ दोष शांति पंच तीर्थ महापूजा और गंगा दुध अभिषेक

पितृ शांति एवं पारिवारिक क्लेश से मुक्ति के लिए
temple venue
गंगा घाट, पिशाच मोचन कुंड, धर्मारण्य वेदी, श्री गंगोत्री धाम, नर्मदा घाट , हरिद्वार, काशी, गया, गंगोत्री धाम, खंडवा
pooja date
18 September, Wednesday, श्राद्ध प्रतिपदा
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पितृ शांति एवं पारिवारिक क्लेश से मुक्ति के लिए पंच मोक्ष तीर्थ श्राद्ध प्रारंभ विशेष पितृ दोष शांति पंच तीर्थ महापूजा और गंगा दुध अभिषेक

पितृपक्ष, जिसे श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू धर्म का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व में से एक है। हर साल यह पर्व भाद्रपद के प्रतिपदा तिथि से शुरु होकर अमावस्या तक चलता है। इस अवधि के दौरान में हिन्दू धर्मावलंबी अपने पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए विशेष अनुष्ठान, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पितृपक्ष का उल्लेख हिन्दू धर्म के प्राचीन ग्रंथों, जैसे वेद, उपनिषद और पुराणों में व्यापक रूप से मिलता है। गरुड़ पुराण में कहा गया है कि पितृऋण से मुक्ति पाने के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान अत्यंत आवश्यक हैं। जो व्यक्ति अपने पितरों का उचित प्रकार से श्राद्ध नहीं करता, उसे जीवन में अनेक प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है। माना जाता है कि जिस परिवार पर पितृ दोष होता है, उन सदस्यों को नौकरी में पदोन्नति जैसी समस्या, बच्चों के करियर और पढ़ाई में दिक्कतों तथा घर के मुख्य सदस्य को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं यह पवित्र अनुष्ठान एक साथ अगर पांच मोक्षस्थली पर की जाए तो हजार गुना अत्यधिक फल की प्राप्ति हो सकती है। तो आइए जानें पितृ पक्ष के प्रारंभ पर इन पंच मोक्ष तीर्थ स्थली में पितृ पूजा का महत्व इस प्रकार है:

🛕गंगा घाट, हरिद्वार: गंगा नदी को मोक्षदायिनी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि गंगा में तर्पण करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद वंशजों को प्राप्त होता है, जिससे उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

🛕पिशाच मोचन कुंड, काशी: वाराणसी में स्थित इस कुंड का महत्व उन पितरों के लिए विशेष है, जिनकी आत्मा संसार में पाप कर्मों के कारण अशांत रहती है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से पितरों को पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है और वे स्वर्ग लोक की ओर प्रस्थान करते हैं।

🛕धर्मारण्य वेदी, गया: मोक्ष स्थल गया में पितृ पूजा और श्राद्ध के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है। यहाँ पर पितरों के लिए किए गए अनुष्ठानों से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष प्राप्त होता है। यह स्थल भगवान विष्णु से जुड़ा है, जिनकी कृपा से पूर्वजों को शांति मिलती है।

🛕श्री गंगोत्री धाम, गंगोत्री धाम: गंगा नदी का उद्गम स्थल होने के कारण यह तीर्थस्थल विशेष महत्व रखता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष प्राप्ति के लिए यहां तपस्या की थी, इसलिए यहाँ गंगा जल का प्रभाव पितृ दोष निवारण के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

🛕नर्मदा घाट, खंडवा: नर्मदा नदी को भी मोक्षदायिनी माना गया है। नर्मदा के तट पर तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है और वे आशीर्वाद प्रदान करते हैं और वंशजों का जीवन कल्याणकारी बनता है।

मान्यता है कि इस पूजा के साथ गंगा दुध अभिषेक करने से पितरों का आशीष प्राप्त होता है। वहीं पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए दान पुण्य करने का भी विधान है। मान्यता है कि इस समय दान करने से दोगुने फल की प्राप्ति होती है, जिनमें पितृ पक्ष विशेष पंच भोग, दीप दान भी शामिल है। इसलिए इस पूजा के साथ अतिरिक्त विकल्प के रूप में दिए गए जैसे पंच भोग, दीप दान एवं गंगा आरती का चुनाव करना आपके लिए फलदायी हो सकता है। ऐसे में इस पूजा में दिए गए इन विकल्पों को चुनकर अपनी पूजा को और भी अधिक प्रभावशाली बनाएं और श्री मंदिर द्वारा पहली बार आयोजित पितृ दोष शांति पंच तीर्थ महापूजा और गंगा दुध अभिषेक में भाग लें।

गंगा घाट, पिशाच मोचन कुंड, धर्मारण्य वेदी, श्री गंगोत्री धाम, नर्मदा घाट , हरिद्वार, काशी, गया, गंगोत्री धाम, खंडवा

गंगा घाट, पिशाच मोचन कुंड, धर्मारण्य वेदी, श्री गंगोत्री धाम, नर्मदा घाट , हरिद्वार, काशी, गया, गंगोत्री धाम, खंडवा
सनातन धर्म में मान्यता है कि पितृ पक्ष में मोक्ष स्थली पर पितृ दोष पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है, इसलिए इस बार पितृ पक्ष के शुभ अवसर पर पहली बार एक साथ इन पंच मोक्ष तीर्थ जैसे (गंगा घाट हरिद्वार, पिशाच मोचन कुंड, धर्मारण्य वेदी, श्री गंगोत्री धाम, नर्मदा घाट में पितृ दोष शांति पंच तीर्थ महापूजा और गंगा दुध अभिषेक का आयोजन किया जाएगा जो भक्तों को अपने आप में आध्यात्मिक अनुभव कराएगा।

हरिद्वार में स्थित गंगा घाट को पवित्र माना जाता है क्योंकि यहाँ गंगा नदी पहाड़ों से उतरकर मैदानों में आती है। यहां पितृ तर्पण और पिंडदान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गंगा के पवित्र जल में पिंडदान और श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है ।
काशी का पिशाच मोचन कुंड, पितरों की आत्मा को शांति प्रदान करने में विशेष महत्व है। यहाँ पितरों का तर्पण करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पिशाच दोष उन आत्माओं को लगता है, जो जीवन में गलत कर्मों के कारण अटक गई होती हैं। इस कुंड में स्नान करने और तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है।

गया का धर्मारण्य वेदी, पितृ दोष निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली है, यहां श्राद्ध कर्म करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह स्थान विष्णु भगवान से जुड़ा हुआ है, इसलिए यहां की गई पितृ पूजा से पितरों को शांति मिलती है।

श्री गंगोत्री धाम, गंगा का उद्गम स्थल होने के कारण यह स्थान पितरों के लिए अत्यंत पवित्र है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगीरथ ने अपने पूर्वजों को मोक्ष प्राप्ति के लिए यहां तपस्या की थी, इसलिए यहाँ गंगा जल का प्रभाव पितृ दोष निवारण के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

नर्मदा नदी को भी पितरों की आत्मा की शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नर्मदा के तट पर तर्पण और पिंडदान करने से पितरों को शांति मिलती है और वे आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इन पंचतीर्थों पर पितृ पूजा करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, जिससे वंशजों का जीवन समृद्ध और सुखमय बनता है।

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