
इस आरती के माध्यम से भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें और सभी विघ्नों का नाश करें।
यदि बुधवार के दिन प्रभु कृष्ण की आरती, आराधना और भक्ति की जाए तो प्रभु श्री जुगल किशोर की विशेष कृपा प्राप्त होती है। बुधवार के दिन जो भी कृष्ण भक्त श्री जुगल किशोर की भक्ति और आरती करता है तो उनकी हर समस्या स्वयं ही दूर हो जाती है और श्री कृष्ण से सुख शांति और समृद्धि प्रदान करते हैं। आइए हम सभी एक साथ ही हैं जुगल किशोर जी की आरती।
आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
गौर श्याम मुख निरखन लीजै।
हरि का स्वरूप नयन भरि पीजै॥
गौर श्याम मुख निरखन लीजै।
हरि का स्वरूप नयन भरि पीजै॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
रवि शशि कोटि बदन की शोभा।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
रवि शशि कोटि बदन की शोभा।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
ओढ़े नील पीत पट सारी।
कुंज बिहारी गिरिवरधारी॥
ओढ़े नील पीत पट सारी।
कुंज बिहारी गिरिवरधारी॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
फूलन सेज फूल की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥
फूलन सेज फूल की माला।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
कंचन थार कपूर की बाती।
हरि आए निर्मल भई छाती॥
कंचन थार कपूर की बाती।
हरि आए निर्मल भई छाती॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी।
आरती करें सकल ब्रज नारी॥
श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी।
आरती करें सकल ब्रज नारी॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
नंदनंदन बृजभान किशोरी।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥
नंदनंदन बृजभान किशोरी।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी॥
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
आरती युगलकिशोर की कीजै।
तन मन भी न्यौछावर कीजै॥
श्री मंदिर साहित्य पर पाए ऐसी ही भक्तिमय आरती का संग्रह।
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शिवरात्रि आरती भगवान शिव की महिमा और आशीर्वाद की प्रार्थना के लिए समर्पित है। यह आरती महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भगवान शिव की विशेष पूजा में गाई जाती है, जो भक्तों को भगवान शिव के प्रति समर्पण और भक्ति से जोड़ती है।

सोमवार व्रत के लिए विशेष आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' का पाठ करें और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें। इस पवित्र आरती से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

अम्बे गौरी की आरती एक भक्तिपूर्ण स्तुति है, जो देवी दुर्गा के शक्ति स्वरूप को समर्पित है। यह आरती देवी गौरी (माँ पार्वती) की महिमा का गुणगान करती है और उनके भक्तों को उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करती है।