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महानवमी 2025

जानिए कब है, शुभ मुहूर्त, तारीख और समय

महानवमी के बारे में

महा नवमी नवरात्रि का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और माता की विदाई की तैयारी भी शुरू हो जाती है। नवरात्रि का 9वां दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है। कहते हैं कि माता के इस स्वरूप की पूजा करने से सभी तरह के दुखों से छुटकारा मिलता है, साथ ही जीवन से सभी अंधकार दूर हो जाते हैं।

कब मनाई जाएगी महानवमी?

  • राम नवमी (नवमी तिथि): 27 मार्च 2026 (शुक्रवार)
  • नवमी तिथि प्रारंभ: 26 मार्च, दोपहर 02:16 बजे से
  • नवमी तिथि समाप्त: 27 मार्च, दोपहर 12:02 बजे तक

महानवमी का महत्व

  • महा नवमी के दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर जैसे राक्षसों का वध करके बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक स्थापित किया था। यह दिन हमें सदाचार और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
  • कन्याओं को देवी का स्वरूप माना जाता है। महा नवमी के दिन कन्या पूजन करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
  • हवन और यज्ञ से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह हमें धार्मिक रूप से जुड़ने और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने का अवसर देता है।
  • अन्नकूट का भोग लगाकर हम प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और भगवान से समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।
  • महा नवमी के दौरान लोग एक साथ आते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। इससे सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना बढ़ती है।

महानवमी के लाभ

  • नवरात्रि का नौवां दिन माता सिद्धिदात्री को समर्पित है। अतः इस दिन आप माँ के सिद्धिदात्री स्वरूप का ध्यान कर उनसे प्रार्थना करें कि आपका दिन सफल बने, निश्चय ही आपको माँ का अपार स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त होगा।
  • इस दिन आप पूरे मन से मां सिद्धिदात्री के मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नम:' का 3 बार जाप करें। यह मंत्र जितना सरल है इसका प्रभाव उतना ही दिव्य है।
  • इसके साथ ही आप मां दुर्गा का ध्यान करते हुए “या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः” का 3 बार जाप करके अपना दिन सफल बना सकते हैं।
  • इस दिन मां सिद्धिदात्री को भोग के रूप में हलवा, चना-पूरी, खीर आदि चढ़ाएं। यह भोग मां का बेहद प्रिय माना गया है। कहते हैं कि माता सिद्धिदात्री ये भोग अर्पित करने से जातक के जीवन में सुख समृद्धि आती है। अगर हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाना संभव न हो पा रहा हो तो आप ‘श्री मंदिर’ पर भी मां को भोग लगा सकते हैं।

महा नवमी की हवन सामग्री

  • कपूर
  • घी
  • चावल
  • गुड़
  • नारियल
  • दूध
  • दही
  • शहद
  • फल
  • मिठाई
  • सुखी मेवे
  • पत्ते (पीपल, बेल, तुलसी)
  • लकड़ी (पीपल, बेल)
  • समिधा (होली की लकड़ी)
  • कुमकुम
  • रोली
  • चंदन
  • हल्दी
  • काली मिर्च
  • लौंग
  • इलायची
  • जावित्री
  • दालचीनी
  • कत्था
  • अजवाइन
  • सौंफ
  • हींग

महानवमी पर ऐसे करें हवन

  • प्रातः काल उठकर, स्नानादि कार्यों से निवृत हो जाएं। नवमी के दिन विधिवत सिद्धिदात्री जी की पूजा करें।
  • पूजा-पाठ और कन्या पूजन के बाद हवन किया जाएगा। हवन से पहले हवन की संपूर्ण सामग्री एकत्रित कर लें।
  • इसके बाद जहां हवन करना है, उस स्थान को साफ कर लें। हवन वेदी पर हल्दी कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं, और पुष्प से सजाएं। आमतौर पर, हवन किसी पंडित या ब्राह्मण द्वारा करवाया जाता है, क्योंकि हर किसी को अग्नि स्थापना की अनुमति नहीं होती है। हालांकि कई लोग स्वयं भी हवन करते हैं। आप अपने घर की परंपरा के अनुसार हवन करवाएं।
  • हवन का प्रारंभ अग्नि देव के आह्वान और स्थापना से होता है।
  • अग्नि देवता को भोजन अर्पित करने के हिसाब से आहुति दी जाती है।
  • इसके बाद मनसा आहुति दी जाती है।
  • फिर गृह शांति होम किया जाता है।
  • प्रधान देवता होम- इसके अंतर्गत पहले नर्वाण मंत्र की माला से होम करते हैं, फिर दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय से होम किया जाता है, फिर से नर्वाण मंत्र की एक माला से होम होता है।
  • इसके पश्चात् स्थान देवता का होम, गुगल होम, पीली सरसों का होम, महालक्ष्मी होम , स्वीष्टकृत होम, पूर्णाहुति होम दिया जाता है।
  • फिर वसोधारा दी जाती है और अग्नि विसर्जन के लिए हवन में अक्षत डाले जाते हैं और अग्नि देवता से प्रार्थना की जाती है कि वह अगले शुभ कार्य में दर्शन दें और उसे संपूर्ण करें।
  • अंत में यजमान के मस्तक पर भस्म का तिलक लगाया जाता है। भगवान जी भोग अर्पित किया जाता है, आरती की जाती है, मंत्र पुष्पांजलि अर्पित की जाती है और क्षमायाचना की जाती है।

रामनवमी पर क्या करें?

  • राम नवमी पर यदि आप अयोध्या की सरयू नदी में स्नान कर सकते हैं, तो अति उत्तम है। अन्यथा इस दिन किसी पवित्र नदी, सरोवर या तालाब में अवश्य स्नान करें। ऐसा करने से जन्म जन्मांतर के पापकर्म नष्ट हो जाते हैं।
  • इस दिन राम रक्षा स्तोत्र, रामायण, बजंरग बाण आदि का पाठ अवश्य करना या सुनना अति उत्तम होता है। ऐसा करने से श्री राम चंद्र हर विपत्ति से सदैव आपकी रक्षा करेंगे।
  • यदि संभव हो तो इस दिन अपने घर में श्रीराम चरित मानस पाठ करें। यदि अखंड रामायण का पाठ करना संभव न हो, तो सिर्फ़ सुंदरकांड का पाठ करके भी भक्तवत्सल भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
  • रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा-आराधना के पश्चात् उनकी मूर्ति को पालने में अवश्य झुलाएं। इससे भगवान राम अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • रामनवमी के दिन किसी राम मंदिर में जाकर पवित्र रामायण पुस्तक का वितरण करना श्रेष्ठ फल देने वाला होता है। साथ ही इस दिन भूखे लोगों को भोजन अवश्य कराएं।
  • इस दिन किसी निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को दान अवश्य दें। ऐसा करने से आपको रामनवमी व्रत के संपूर्ण शुभफलों की प्राप्ति होगी।

रामनवमी पर क्या न करें?

  • रामनवमी के अवसर पर भूलवश भी किसी को कटुवचन या अपशब्द न कहें। साथ ही इस दिन किसी की निंदा करने से भी दूर रहें।
  • इस दिन भोजन में लहसून व प्याज का प्रयोग न करें। साथ ही शराब और मांसाहार का सेवन करने से भी बचें।
  • इस दिन अपने घर में किसी प्रकार की कलह न करें। मानसिक शांति बनाए रखें और पूरे दिन शुद्ध मन से भगवान श्री राम का सुमिरन करते रहें।
  • ध्यान रहे कि रामनवमी के दिन पूजा करते समय आपका मुख ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व के मध्य की दिशा में होना चाहिए। अन्य किसी दिशा में मुख करके पूजा न करें।
  • राम नवमी के दिन किसी ब्राह्मण, कन्या या निर्धन व्यक्ति का भूलवश भी अपमान न करें, इससे भगवान श्रीराम आपसे रूष्ट हो सकते हैं।

महानवमी पर कैसे करें कन्या पूजन?

  • कन्या पूजन के लिए सबसे पहले प्रातः काल स्नान करके मातारानी की पूजा-अर्चना करने के बाद भोजन तैयार कर लें
  • कन्याभोज में खीर, पूरी, देसी चने और हलवा आदि अवश्य शामिल करें। कन्याओं को बुलाकर शुद्ध जल से उनके पांव धोएं।
  • इसके बाद सभी कन्याओं का रोली और अक्षत से तिलक करें। तिलक करने के बाद स्नेहपूर्वक उनको भोजन कराएं।
  • नौ कन्याओं के साथ एक छोटे बालक को भी भोज कराने का प्रचलन है, जिसे कंजक कहा जाता है जिसे भैरव बाबा का स्वरूप माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कन्या पूजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा देने का विशेष महत्व होता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार कन्याओं को विदा करते समय अनाज, रुपया या वस्त्र आदि भेंट करें और उनके पैर छूकर आशीर्वाद प्राप्त करें। माना जाता है कि इन कन्याओं के रूप में मां दुर्गा ही आपके घर आती हैं और उनके आर्शीवाद से घर-परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है एवं भक्तों पर मां दुर्गा की अपार कृपा बरसती है।

कन्या पूजन का महत्व क्या है?

नौ दिनों तक हम नवरात्र में माँ के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती हैं। बाल कन्याओं में भी मातारानी का ही वास होता हैं। इसलिये उनके प्रतीकात्मक रूप में नौ कन्याओं के पूजन तथा उन्हें भोजन खिलाने की परंपरा का निर्वहन किया जाता हैं। इस प्रकार भक्तजन मातारानी के प्रति अपनी श्रद्धा व आस्था को प्रकट करते हैं और माँ की असीम कृपा के अधिकारी बनते हैं।

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Published by Sri Mandir·March 23, 2026

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