🔱 मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में पितृ कर्म कर, पितरों की शांति और परिवार में सौहार्द व आशीर्वाद का दिव्य संकल्प करें।
🔱 मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में पितृ कर्म कर, पितरों की शांति और परिवार में सौहार्द व आशीर्वाद का दिव्य संकल्प करें।
🔱 मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में पितृ कर्म कर, पितरों की शांति और परिवार में सौहार्द व आशीर्वाद का दिव्य संकल्प करें।
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मौनी अमावस्या माघ मेला विशेष

पितृ दोष शांति महापूजा एवं त्रिवेणी संगम आरती

पैतृक श्रापों से मुक्ति पाने और दिवंगत आत्माओं को शांति दिलाने के लिए।
temple venue
त्रिवेणी संगम, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश
pooja date
18 जनवरी, रविवार, माघ कृष्ण अमावस्या
पूजा बुकिंग बंद होने में शेष समय:
Day
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Min
Sec
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अब तक3,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं
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आपके पूरे पूजा की वीडियो रिकॉर्डिंग 2 दिनों में शेयर की जाएगी
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पूरे विधि द्वारा पूजा होगी
मंदिर के सर्वश्रेष्ठ पंडितजी आपकी पूजा करेंगे
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विशेष मंत्र द्वारा कृपा मिलेगी
भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्र शेयर किया जाएगा
आशीर्वाद बॉक्स icon
आशीर्वाद बॉक्स
पूजा के बाद आशीर्वाद बॉक्स आपके घर पर पहुँचाया जाएगा

🔱 मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में पितृ कर्म कर, पितरों की शांति और परिवार में सौहार्द व आशीर्वाद का दिव्य संकल्प करें।

✨ मौनी अमावस्या सनातन परंपरा में आत्मचिंतन, मौन और भीतर की शुद्धि से जुड़ा अत्यंत विशेष दिन माना जाता है। इस दिन व्यक्ति बाहरी शोर से हटकर अपने विचारों, भावनाओं और पूर्वजों से जुड़े संस्कारों पर ध्यान करता है। इसी कारण मौनी अमावस्या को पितृ कर्मों के लिए भी महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह दिन मन को शांत करके श्रद्धा के साथ अर्पण करने का अवसर देता है।

✨ इस पावन तिथि पर प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम का महत्व और अधिक गहरा हो जाता है। गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम सदियों से आत्मिक शुद्धि और संतुलन का प्रतीक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन संगम तट पर किया गया पितृ तर्पण और अर्पण श्रद्धा के भाव से जुड़ता है और पितरों की आत्मा की शांति की कामना का माध्यम बनता है।

✨ मौनी अमावस्या माघ मास के दौरान आती है, जब प्रयाग क्षेत्र में माघ मेला भी आयोजित होता है। माघ मास को साधना और पुण्य का काल माना गया है। इस समय संगम का वातावरण संयम, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा रहता है, जो पितृ शांति से जुड़े कर्मों को भावनात्मक रूप से अधिक गहराई प्रदान करता है। हालांकि माघ मेला इस दिन की पृष्ठभूमि बनता है, लेकिन साधना का मुख्य केंद्र मौनी अमावस्या की शांत और गंभीर ऊर्जा ही रहती है।

✨ ऐसा माना जाता है कि कभी-कभी पूर्वजों से जुड़े अधूरे भाव या कर्म वर्तमान जीवन में मानसिक बेचैनी, पारिवारिक असंतुलन या जीवन में रुकावट के रूप में महसूस हो सकते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या पर की जाने वाली पितृ शांति पूजा व्यक्ति को अपने पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने और भीतर के भावनात्मक बोझ को समझने का अवसर देती है। यह पूजा समाधान का दावा नहीं करती, बल्कि संतुलन और शांति की दिशा में एक आध्यात्मिक प्रयास मानी जाती है।

✨ त्रिवेणी संगम पर मौनी अमावस्या के दिन संपन्न होने वाली इस विशेष पूजा में विधिवत पितृ तर्पण, अर्पण और आरती की जाती है। ऐसा माना जाता है कि संगम की शांत और पवित्र धारा इस साधना को भावनात्मक रूप से गहरा बनाती है और परिवार में शांति व सकारात्मकता के भाव को मजबूत करती है।

✨ श्री मंदिर के माध्यम से त्रिवेणी संगम पर आयोजित इस मौनी अमावस्या पूजा में सहभागी बनकर आप भी इस पावन वातावरण से जुड़ सकते हैं और अपने पितरों की शांति तथा परिवार के लिए श्रद्धा के साथ कामना कर सकते हैं।

पूजा लाभ

puja benefits
पूर्वजों की शांति और मोक्ष की कामना
पितृ दोष शांति महापूजा और त्रिवेणी संगम आरती के माध्यम से की गई साधना से दिवंगत पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें सांसारिक बंधनों से आगे बढ़ने का मार्ग मिलता है। यह पूजा अपने प्रियजनों के लिए मन की शांति की भावना को सुदृढ़ करती है और जीवन में चली आ रही पितृ संबंधी नकारात्मकताओं को शांत करने का माध्यम मानी जाती है।
puja benefits
पारिवारिक विवादों में शांति और संतुलन
माघ मेले के दौरान आने वाली माैनी अमावस्या पर की गई यह पूजा उन अधूरे पितृ कर्मों या पितृ ऋण से जुड़ी अशांति को संबोधित करने का अवसर मानी जाती है, जिनके कारण परिवार में तनाव या मतभेद बने रहते हैं। ऐसा विश्वास है कि पितरों की शांति से परिवार में आपसी समझ, सामंजस्य और स्थिरता का भाव मजबूत होता है।
puja benefits
पुण्य लाभ और समृद्धि की भावना
त्रिवेणी संगम पर प्रार्थना और महाआरती में सहभागिता को पुण्यदायी माना गया है। ऐसी धारणा है कि इस पवित्र संगम की दिव्य ऊर्जा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता बढ़ाती है और आर्थिक व भावनात्मक संघर्षों में संतुलन की भावना लाने में सहायक होती है, जिससे नए अवसरों के द्वार खुलने का भाव बनता है।

पूजा प्रक्रिया

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पूजा का चयन करें:

नीचे दिए गए पूजा के विकल्पों में से किसी एक का चुनाव करें।
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अर्पण जोड़ें

गौ सेवा, दीप दान एवं अन्न सेवा जैसे अन्य सेवाओं के साथ अपने पूजा अनुभव को बेहतर बनाएं।
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संकल्प विवरण दर्ज करें

संकल्प के लिए अपना नाम एवं गोत्र भरें।
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पूजा के दिन अपडेट पाएं

हमारे अनुभवी पंडित पूरे विधि विधान से पूजा कराएंगे, पूजा के दिन श्री मंदिर भक्तों की पूजा सामूहिक रूप से की जाएगी। जिसका लाइव अपडेट्स आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
Number-4

पूजा वीडियो और दिव्य आशीर्वाद बॉक्स

3-4 दिनों के अंदर अपने व्हाट्सएप नंबर पर पूजा वीडियो पाएं एवं 8-10 दिनों में दिव्य आशीर्वाद बॉक्स प्राप्त करें।

त्रिवेणी संगम, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश

त्रिवेणी संगम, प्रयागराज, उत्तरप्रदेश

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, देवासुर संग्राम के बाद समुद्र मंथन के दौरान, भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। देवता और दानव दोनों अमरत्व पाने के लिए अमृत को प्राप्त करने के लिए उत्सुक थे। इस प्रयास में अमृत की कुछ बूंदें कलश से गिरकर पृथ्वी के चार पवित्र स्थलों – प्रयागराज, उज्जैन, हरिद्वार और नासिक पर गिरीं। हर 12 साल में इन्हीं स्थानों पर भव्य कुंभ मेला आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि इस पवित्र संगम में स्नान करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष (जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति) प्राप्ति की जाती है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा ने प्रयागराज में एक यज्ञ किया था। इस पवित्र कार्य ने इस स्थल को धर्म, तपस्या और साधना के केंद्र के रूप में स्थापित किया, जिससे इसे "तीर्थराज" या तीर्थों के राजा की उपाधि मिली। समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई माँ लक्ष्मी और उसमें भाग लेने वाले भगवान विष्णु की पूजा महाकुंभ के दौरान अत्यधिक शुभ मानी जाती है। माना जाता है कि पवित्र त्रिवेणी संगम पर उनकी पूजा करने से अपार धन और समृद्धि मिलती है। विशेष रूप से एकादशी के दिन उनकी पूजा करने से इन आशीर्वादों में वृद्धि होती है।

पूजा पैकेज में क्या-क्या शामिल है?

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विद्वान पुरोहितों द्वारा भक्त के नाम-गोत्र का उच्चारण किया जाएगा।

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घर से पूजा में भाग लेने के लिए पंडित जी मंत्र और विधियां बताएंगे।

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पूरी पूजा का वीडियो आपको WhatsApp पर शेयर किया जाएगा।

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तीर्थ स्थल का प्रसाद और आशीर्वाद बॉक्स घर बैठे पाने की सुविधा।

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आप अपने नाम से वस्त्र दान, अन्न दान, दीप दान और गौ सेवा भी करवा सकते हैं

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