जब फाल्गुन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होता है, तब उस अंधकार में दीपक मोक्ष का सेतु बन जाता है! 4 दिव्य स्थलों पर दीपदान कर मोक्ष का आशीर्वाद पाएं।
3 मार्च 2026 की रात्रि कोई साधारण पूर्णिमा नहीं, बल्कि हिन्दू वर्ष की अंतिम रात्रि है, जो चंद्र ग्रहण के दुर्लभ साये में होगी। अग्नि पुराण और मत्स्य पुराण के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा पर जब ग्रहण का योग बनता है, तब ब्रह्मांड के कपाट स्वयं मोक्ष के लिए खुल जाते हैं। इस संधिकाल में किया गया दीपदान साधक के कई जन्मों के संचित पापों का शमन करने की शक्ति रखता है।
🪔 4 दिव्य दीपदान स्थल
🔱 अस्सी घाट, काशी: महादेव का कृपा क्षेत्र
वाराह पुराण के अनुसार, जहाँ असी नदी गंगा में मिलती है, वह साक्षात् रुद्र का निवास है। ग्रहण के समय यहाँ दीपदान करने से भगवान विश्वनाथ स्वयं आत्मा को तारक मंत्र प्रदान करते हैं, जो सीधे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
🌊 गंगा घाट, हरिद्वार: अमृत संजीवनी का स्पर्श
पद्म पुराण साक्षी है कि समुद्र मंथन के समय अमृत की बूंदें यहीं छलकी थीं। ग्रहण की छाया जब इस अमृतमयी धरा पर पड़ती है, तब यहाँ प्रज्वलित एक दीपक आपके पितरों को अंधकार से निकालकर पितृलोक में स्थान दिलाता है।
🌸 ब्रह्मा सरोवर, कुरुक्षेत्र: आदि-यज्ञ की साक्षी
मत्स्य पुराण के अनुसार, सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र के इस सरोवर में किया गया दीपदान, अश्वमेध यज्ञ के समान फल देता है। यह वही स्थान है जहाँ ब्रह्मा जी ने सृष्टि का प्रथम यज्ञ संपन्न किया था। यहाँ का दीपदान आपके प्रारब्ध के चक्र को बदल सकता है।
✨ त्रिवेणी संगम, प्रयागराज: तीर्थों के राजा का मोक्ष द्वार
स्कंद पुराण में प्रयाग को तीर्थराज कहा गया है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन बिंदु पर ग्रहण काल में दीपदान करना, स्वयं को त्रिविध तापों (दैहिक, दैविक, भौतिक) से मुक्त करने का एकमात्र मार्ग है।
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