क्या बार-बार रुकावटें, बिना कारण बनने वाली समस्याएँ और मन का बोझ आपको आगे बढ़ने नहीं दे रहा? इस अंतिन एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का यह दिव्य अनुष्ठान कई जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई शुरुआत का पावन अवसर देता है।
क्या बार-बार रुकावटें, बिना कारण बनने वाली समस्याएँ और मन का बोझ आपको आगे बढ़ने नहीं दे रहा? इस अंतिन एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का यह दिव्य अनुष्ठान कई जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई शुरुआत का पावन अवसर देता है।
क्या बार-बार रुकावटें, बिना कारण बनने वाली समस्याएँ और मन का बोझ आपको आगे बढ़ने नहीं दे रहा? इस अंतिन एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का यह दिव्य अनुष्ठान कई जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई शुरुआत का पावन अवसर देता है।
क्या बार-बार रुकावटें, बिना कारण बनने वाली समस्याएँ और मन का बोझ आपको आगे बढ़ने नहीं दे रहा? इस अंतिन एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का यह दिव्य अनुष्ठान कई जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई शुरुआत का पावन अवसर देता है।
क्या बार-बार रुकावटें, बिना कारण बनने वाली समस्याएँ और मन का बोझ आपको आगे बढ़ने नहीं दे रहा? इस अंतिन एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का यह दिव्य अनुष्ठान कई जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई शुरुआत का पावन अवसर देता है।
हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी – 7 जन्मों के पाप नाशक विशेष

7 जन्मों के पाप नाशक विशेष 11 विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं पाप क्षय महायज्ञ

7 जन्मों के पापों की शांति और जीवन में नई सकारात्मक शुरुआत हेतु
temple venue
एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर, तिरुनेलवेली, तमिलनाडु
pooja date
15 मार्च, रविवार, चैत्र कृष्ण एकादशी
पूजा बुकिंग बंद होने में शेष समय:
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अब तक3,00,000+भक्तोंश्री मंदिर द्वारा आयोजित पूजाओ में भाग ले चुके हैं
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पूरे विधि द्वारा पूजा होगी
मंदिर के सर्वश्रेष्ठ पंडितजी आपकी पूजा करेंगे
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विशेष मंत्र द्वारा कृपा मिलेगी
भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विशेष मंत्र शेयर किया जाएगा
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आशीर्वाद बॉक्स
पूजा के बाद आशीर्वाद बॉक्स आपके घर पर पहुँचाया जाएगा

क्या बार-बार रुकावटें, बिना कारण बनने वाली समस्याएँ और मन का बोझ आपको आगे बढ़ने नहीं दे रहा? इस अंतिन एकादशी पर विष्णु सहस्रनाम का यह दिव्य अनुष्ठान कई जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई शुरुआत का पावन अवसर देता है।

हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी को सनातन परंपरा में अत्यंत दुर्लभ और जागृत तिथि माना गया है। मान्यता है कि यह वह पावन क्षण होता है जब पूरे वर्ष के कर्म, प्रार्थनाएँ और साधना भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित की जाती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यह एकादशी केवल सामान्य व्रत का दिन नहीं है, बल्कि आत्मिक शुद्धि और कर्मिक संतुलन का विशेष अवसर है। इसी कारण इसे ऐसी एकादशी माना गया है जो साधक को अपने पिछले जन्मों के संचित कर्मों को भगवान को समर्पित कर नई आध्यात्मिक शुरुआत करने का अवसर देती है।

सनातन मान्यताओं के अनुसार मनुष्य के जीवन में जो भी सुख-दुख, रुकावटें या अनजानी कठिनाइयाँ आती हैं, उनका संबंध केवल वर्तमान कर्मों से ही नहीं बल्कि पूर्व जन्मों के संचित कर्मों से भी माना जाता है। कई बार व्यक्ति पूरी मेहनत करने के बाद भी सफलता से दूर रह जाता है, बिना कारण समस्याएँ बढ़ने लगती हैं या मन पर एक अनजाना बोझ बना रहता है। शास्त्रों में इन स्थितियों को कर्म बंधन का प्रभाव बताया गया है। ऐसे समय में भगवान विष्णु की शरण को जीवन में संतुलन और शांति का मार्ग माना गया है।

भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता और धर्म की रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। उनके विष्णु सहस्रनाम को सनातन परंपरा में अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र माना गया है, जिसमें भगवान विष्णु के एक हजार दिव्य नामों का वर्णन मिलता है। मान्यता है कि इन नामों का श्रद्धा से किया गया स्मरण साधक के जीवन में संचित नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और भीतर की शांति को जागृत करने में सहायक माना जाता है। हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी पर जब 11 विष्णु सहस्रनाम पाठ और पाप क्षय महायज्ञ जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं, तब यह केवल एक पूजा विधि नहीं रहती, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक प्रक्रिया बन जाती है।

इस अनुष्ठान में वैदिक मंत्रों के साथ भगवान विष्णु का आह्वान किया जाता है और पवित्र अग्नि में आहुति अर्पित कर साधक अपने संचित कर्मों को भगवान को समर्पित करने का भाव प्रकट करता है। यह प्रक्रिया नकारात्मकता के क्षय और शुभ ऊर्जा के आरंभ का प्रतीक मानी जाती है।

क्यों इतनी खास है यह एकादशी?
हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी को इसलिए भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है क्योंकि इसे पूरे वर्ष की आध्यात्मिक यात्रा का समापन बिंदु माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया जप, पाठ और हवन साधक को पुराने कर्मों के बोझ से हल्का होने की दिशा देता है और नए वर्ष में प्रवेश से पहले आत्मिक शुद्धि का अवसर प्रदान करता है। इसी कारण इसे ऐसी एकादशी माना जाता है जिसमें कई जन्मों से जुड़े पापों की शांति की प्रार्थना की जाती है। जब साधक अपने नाम से संकल्प जोड़कर इस अनुष्ठान में सम्मिलित होता है, तो वह प्रतीक रूप में अपने कई जन्मों के कर्मों का भार भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित करता है। यह भाव केवल पाप शांति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन में नई सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और दिव्य संरक्षण को आमंत्रित करने का मार्ग भी माना जाता है।

इसी पवित्र भावना के साथ आयोजित यह 7 जन्मों के पाप नाशक 11 विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं पाप क्षय महायज्ञ साधक को अपने अतीत के कर्मों को भगवान को समर्पित कर शांति, संतुलन और नई शुरुआत का आशीर्वाद प्राप्त करने का दिव्य अवसर प्रदान करता है। यदि आप जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं, अनजाने बोझ या रुकी हुई प्रगति से मुक्ति पाकर नई सकारात्मक शुरुआत करना चाहते हैं, तो हिंदू वर्ष की अंतिम एकादशी पर किया जाने वाला यह पावन अनुष्ठान आपके लिए अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है।

श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य साधना में सम्मिलित होकर आप अपने और अपने परिवार के लिए शांति, आध्यात्मिक उन्नति और नए जीवन मार्ग का आशीर्वाद प्राप्त करने की प्रार्थना कर सकते हैं।

पूजा लाभ

puja benefits
जीवन की बाधाओं में कमी
पाप क्षय महायज्ञ के माध्यम से अग्नि में आहुति देकर जीवन में बार-बार आने वाली रुकावटों और असफलताओं को भगवान को समर्पित किया जाता है। इससे कार्यों में गति, स्थिरता और सही दिशा मिलने की प्रार्थना की जाती है।
puja benefits
मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा
इस विशेष एकादशी पर किया गया विष्णु उपासना का अनुष्ठान मन को शांत करने, नकारात्मक विचारों को कम करने और घर-परिवार में सकारात्मक वातावरण बनाने से जुड़ा माना जाता है।
puja benefits
नई शुरुआत का आशीर्वाद
हिंदू वर्ष के समापन पर किया गया यह अनुष्ठान साधक को अतीत के बोझ से मुक्त होकर नए संकल्प, नई ऊर्जा और शुभ अवसरों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

पूजा प्रक्रिया

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पूजा के दिन अपडेट पाएं

हमारे अनुभवी पंडित पूरे विधि विधान से पूजा कराएंगे, पूजा के दिन श्री मंदिर भक्तों की पूजा सामूहिक रूप से की जाएगी। जिसका लाइव अपडेट्स आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
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पूजा वीडियो और दिव्य आशीर्वाद बॉक्स

3-4 दिनों के अंदर अपने व्हाट्सएप नंबर पर पूजा वीडियो पाएं एवं 8-10 दिनों में दिव्य आशीर्वाद बॉक्स प्राप्त करें।

एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर, तिरुनेलवेली, तमिलनाडु

एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर, तिरुनेलवेली, तमिलनाडु
तमिलनाडु के तिरुनेलवेली में स्थित एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर एक पूजनीय तीर्थस्थल है। 120 साल पहले प्रतिष्ठित ऋषि मायांडी सिद्धर द्वारा स्थापित यह मंदिर चिरस्थायी परंपरा और भक्ति का प्रमाण है। ऋषि मायांडी सिद्धर ने भगवान राम के गहन ध्यान और दर्शन के बाद मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर में कई चमत्कार हुए हैं, जिनमें भगवान पेरुमल की मुख्य मूर्ति भी शामिल है, जिसे मूर्तिकला का कोई औपचारिक ज्ञान न रखने वाले एक साधारण व्यक्ति ने गढ़ा था।

मंदिर में कई पवित्र मूर्तियाँ हैं, जिनमें शुद्ध स्पष्ट क्वार्ट्ज से बना उल्लेखनीय स्फटिक लिंगम भी शामिल है। शास्त्रों के अनुसार, स्फटिक लिंगम की पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और शक्ति आती है, साथ ही चिंताएँ और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं।

यह स्फटिक लिंगम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऋषिकेश के बाद भारत में सबसे बड़े स्फटिक लिंगम में से एक है। यह मंदिर भगवान राम से जुड़े होने के कारण भी प्रसिद्ध है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह वह स्थान है जहाँ भगवान राम ने जटायु को मोक्ष प्रदान किया था और अपने पिता का अंतिम संस्कार किया था।

भक्तगण भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव और भगवान हनुमान से आशीर्वाद लेने के लिए एट्टेलुथुपेरुमल मंदिर आते हैं। माना जाता है कि यहाँ पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और उन्हें सभी प्रयासों में सफलता मिलती है।

पूजा पैकेज में क्या-क्या शामिल है?

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विद्वान पुरोहितों द्वारा भक्त के नाम-गोत्र का उच्चारण किया जाएगा।

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घर से पूजा में भाग लेने के लिए पंडित जी मंत्र और विधियां बताएंगे।

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पूरी पूजा का वीडियो आपको WhatsApp पर शेयर किया जाएगा।

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तीर्थ स्थल का प्रसाद और आशीर्वाद बॉक्स घर बैठे पाने की सुविधा।

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आप अपने नाम से वस्त्र दान, अन्न दान, दीप दान और गौ सेवा भी करवा सकते हैं

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Safal Srivastava

Safal Srivastava

23 July, 2025

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Jai shree mahakal apki mandir app k wajah se yeh pooja complete ho payi .


Mamta kapooor family

Mamta kapooor family

23 July, 2025

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Sabkuch peaceful thank you thank you very much sab kuchh bahut Sundar Hai sab kuchh peaceful hai


आकाश सोलंकी एवं समस्त परिवार

आकाश सोलंकी एवं समस्त परिवार

22 July, 2025

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aap Sabhi pujniya Pandit Ji ko mere aur mere Parivar ki or se कोटि-कोटि Charan Sparsh Puja Karke Puja ki video Dekhkar Atma Ham logon ka bahut jyada prasann Hua aap Sabhi Brahman Pandit Ji ko dhanyvad Bhagwan Hamari samast manokamna purn Kare

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