क्या जीवन में बार-बार परेशानियां आ रही हैं? क्या पारिवारिक कलह और आर्थिक बाधाएं थम नहीं रही हैं? 💰🏠
🙏 पापमोचनी एकादशी के शुभ अवसर पर पूर्वजों की आत्मा की शांति और जीवन की सभी बाधाओं से मुक्ति पाएं। ✨🕉️💫
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पापमोचनी एकादशी चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है और इसे आध्यात्मिक उत्थान एवं मोक्ष के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को समर्पित यह शुभ तिथि पिछले पापों को समाप्त कर दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक है। साथ ही, इसे पितृ दोष से जुड़े अनुष्ठानों के लिए भी अत्यंत शुभ समय माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा मान्धाता मोक्ष की खोज में ऋषि लोमश के पास गए। ऋषि ने उन्हें च्यवन ऋषि के पुत्र मेधावी की कथा सुनाई, जो अप्सरा मंजुघोषा के आकर्षण में आकर अपनी तपस्या भूल गए थे। जब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उन्होंने मंजुघोषा को श्राप दे दिया। लेकिन जब मंजुघोषा ने सच्चे मन से पश्चाताप किया, तो मेधावी ने उसे पापमोचनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी। इस व्रत को श्रद्धा से करने के बाद मंजुघोषा अपने श्राप से मुक्त हो गईं। जिसके बाद मेधावी ने भी व्रत किया और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त की। यही कारण है कि पापमोचनी एकादशी को पापों को मिटाने, मोक्ष प्राप्त करने और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए बेहद फलदायी माना जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, पितृ दोष पूर्वजों की अधूरी इच्छाओं और नकारात्मक कर्मों के कारण उत्पन्न होता है। इससे प्रभावित व्यक्ति के जीवन में आर्थिक परेशानियां, रिश्तों में तनाव और नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बना रहता है। मान्यता है कि पितृ दोष शांति महापूजा करने से इन बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है। शास्त्रों में इस महापूजा के साथ गंगा अभिषेक का विशेष उल्लेख मिलता है, और मोक्ष नगरी काशी में पितृ पूजा का विशिष्ट महत्व बताया गया है। कहा जाता है कि काशी में पितृ पूजा करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। इसके अतिरिक्त, पवित्र गंगोत्री धाम का भी विशेष महत्व है। पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गंगोत्री धाम में कठोर तपस्या की थी, जिसके फलस्वरूप मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ। भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा को धारण कर उनके प्रवाह को संतुलित किया। इसी कारण गंगोत्री गंगा अभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। इसीलिए पापमोचनी एकादशी के शुभ अवसर पर काशी में पितृ दोष शांति महापूजा एवं गंगोत्री गंगा अभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। आप भी श्री मंदिर के माध्यम से इस दिव्य अनुष्ठान में भाग लें और अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्राप्त करें।