नवरात्रि के पावन अवसर पर सीधे मां वैष्णों देवी तीर्थ क्षेत्र से जुड़े और पाएं मां दुर्गा और उनके 9 स्वरुपों की संयुक्त कृपा 🌺🔱
हिंदू धर्म में नवरात्रि को अत्यंत पवित्र एवं शक्ति साधना की महत्वपूर्ण अवधि माना गया है। विशेष रूप से चैत्र नवरात्रि में अष्टमी एवं नवमी के दिन देवी उपासना का विशेष महत्व है। कहते हैं कि इस पावन अवसर पर माँ वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र का आध्यात्मिक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माँ वैष्णो देवी के परम भक्त श्रीधर, जो नि:संतान होने के कारण अत्यंत दुखी रहते थे, नवरात्रि के दौरान माँ की भक्ति में लीन थे। तभी माँ वैष्णो कन्या रूप में प्रकट हुईं और उनसे भंडारे के आयोजन का आग्रह किया। श्रीधर ने श्रद्धापूर्वक इस आदेश का पालन किया और ग्रामवासियों सहित गुरु गोरखनाथ के शिष्य भैरवनाथ को भी आमंत्रित किया। जब भंडारे में माँ ने अपने दिव्य पात्र से सभी को भोजन परोसा, तो भैरवनाथ ने सात्त्विक भोजन को अस्वीकार कर मांस और मदिरा की मांग की।
माता ने उसकी इच्छा को अस्वीकार कर दिया, जिससे क्रोधित होकर भैरवनाथ ने उनका अपमान किया और जबरन रोकने का प्रयास किया। भैरवनाथ की दुष्टता को भांपते हुए माँ तत्काल त्रिकूट पर्वत की ओर उड़ चलीं और एक गुफा में नौ माह तक तपस्या की। यही गुफा आज 'अर्धकुंवारी' अथवा 'गर्भजून' के नाम से प्रसिद्ध है और भवन के समान इसका भी विशेष आध्यात्मिक महत्व है। नौ माह पश्चात माता गुफा से प्रकट हुईं और जब भैरवनाथ ने पुनः उनका पीछा किया, तो माता ने महाकाली का रौद्र रूप धारण कर उसका संहार कर दिया। ऐसी मान्यता है कि माता वैष्णो देवी आज भी इसी पवित्र क्षेत्र में वास करती हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।
🌺🔱 मां शक्ति को समर्पित इस दो दिवसीय अनु्ष्ठान में भाग लेकर पाएं मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीष
नवरात्रि भक्तों के लिए माँ दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों से जुड़ने का श्रेष्ठ अवसर है। इसी उपलक्ष्य में वैष्णो देवी तीर्थ क्षेत्र स्थित नव दुर्गा धाम में "108 कन्या पूजन एवं दुर्गा-चंडी हवन" का आयोजन किया जा रहा है, जो अष्टमी एवं नवमी तिथि को संपन्न होगा। कन्या पूजन नवरात्रि की प्रमुख परंपरा है, जिसमें कन्याओं को माँ दुर्गा के स्वरूप मानकर पूजित किया जाता है। क्योंकि माँ दुर्गा ने भैरवनाथ का वध कन्या रूप में ही किया था, इसीलिए यह पूजन विशेष महत्व रखता है। वहीं दुर्गा-चंडी हवन के माध्यम से भक्त नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप भी इस शुभ अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इस पावन अनुष्ठान में भाग लें और माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करें।