इस विशेष दिन पर देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण उपायों के बारे में जानें।
वर्ष के कुछ ऐसे विशेष दिन हैं, जो पूर्णतः माँ आदिशक्ति को समर्पित हैं, जैसे कि प्रत्येक अष्टमी, नवमी, प्रत्येक शुक्रवार, चैत्र, माघ, आषाढ़ और अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक नौ दिन। इन नौं दिनों माता के विभिन्न रूपों की पूजा का विधान हैं। माता का तीसरा दिन मां के चंद्रघंटा स्वरुप को समर्पित है इस दिन इस रूप में माता की आराधना की जाती है। आइए, जानते हैं नवरात्र के तीसरे दिन का महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।
“पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥”
माँ दुर्गा के तीसरे शक्ति स्वरूप को चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है, इस वर्ष 2025 में चैत्र नवरात्रि की द्वितीया और तृतीया तिथि एक साथ आने से नवरात्रि के दूसरे दिन अर्थात 31 मार्च, सोमवार को देवी माँ के इस स्वरूप की साधना की जाएगी।
माता का यह रूप स्वर्णिम और अलौकिक है। दस भुजाओं वाली देवी चंद्रघंटा के मस्तक पर मुकुट सुशोभित है। जिसमें घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है। यही कारण है कि माता के इस स्वरूप को चंद्रघंटा के नाम से पुकारा जाता है। मां चंद्रघंटा अपनों भक्तों की रक्षा हेतु सदैव तत्पर रहती हैं। मां सभी पीड़ाओं को दूर करने के लिए जानी जाती है।
नवरात्र के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा का बहुत महत्व है। इस वर्ष नवरात्रि का तीसरा दिन 31 मार्च, सोमवार 2025 को है।
नवरात्रि का तीसरा दिन देवी चंद्रघंटा का होता है, जिनको दूध से बनी मिठाई और खीर अत्यधिक प्रिय है। इस दिन, दूध से बनी चीज़ का भोग लगाकर ब्राह्मणों को दान करने से सभी प्रकार के दुख और पीड़ा दूर हो जाती है। ऐसे में, आप भोग में मखाने की खीर बनाएं।
मखाने की खीर बनाने के लिए, सबसे पहले एक पैन में मखाने को भून लें और ठंडा हो जाने पर, उसे बारीक पीस लें। इसके बाद, एक पैन में दूध, मखाना, चीनी, मेवे और इलायची पाउडर डाल कर उसे अच्छे से मिला दें और धीमी आंच पर पकाएं। इस तरह, आपकी मखाने की खीर तैयार है।
मां चन्द्रघण्टा का बीज मंत्र : ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक के समस्त पाप और बाधाओं का नाश होता है। माँ का यह रूप सुख-शांति प्रदान करने वाला है, तथा इनकी साधना करने से साधक को सभी तरह के रोग और दोषों से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक कथा के मुताबिक, माता दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का अवतार तब लिया था जब दैत्यों का आतंक बढ़ने लगा था। उस समय महिषासुर का भयंकर युद्ध देवताओं से चल रहा था। महिषासुर देवराज इंद्र का सिंहासन प्राप्त करना चाहता था। वह स्वर्ग लोक पर राज करने की इच्छा पूरी करने के लिए यह युद्ध कर रहा था। जब देवताओं को उसकी इस इच्छा का पता चला तो वे परेशान हो गए और भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के सामने पहुंचे। ब्रह्मा, विष्णु और महेश ने देवताओं की बात सुन क्रोध प्रकट किया और क्रोध आने पर उन तीनों के मुख से ऊर्जा निकली। यह ऊर्जा दसों दिशाओं में व्याप्त होने लगी। तभी वहां एक कन्या उत्पन्न हुई। तब शंकर भगवान ने देवी को अपना त्रिशूल भेंट किया। भगवान विष्णु ने भी उनको चक्र प्रदान किया। इसी तरह से सभी देवता ने माता को अस्त्र-शस्त्र देकर सजा दिया। इंद्र ने भी अपना वज्र एवं ऐरावत हाथी माता को भेंट किया। सूर्य ने अपना तेज, तलवार और सवारी के लिए शेर प्रदान किया। तब देवी सभी शास्त्रों को लेकर महिषासुर से युद्ध करने के लिए युद्ध भूमि में आ गई। उनका यह विशाल का रूप देखकर महिषासुर भय से कांप उठा। तब महिषासुर ने अपनी सेना को मां चंद्रघंटा के पर हमला करने को कहा। तब देवी ने अपने अस्त्र-शस्त्र से असुरों की सेनाओं को भर में नष्ट कर दिया। इस तरह से मां चंद्रघंटा ने असुरों का वध करके देवताओं को अभयदान देते हुए अंतर्ध्यान हो गई।
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
मैया जय चंद्रघंटा माँ
सर्वजगत की स्वामिनी
सर्वजगत की स्वामिनी
कृपा सदा करना
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
अर्ध-चंद्रमा माथे पर
रूप अति सुन्दर
मैया रूप अति सुन्दर
गृह गृह तुम्हारी पूजा
गृह गृह तुम्हारी पूजा
पूजत नारी नर
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
तृतीय नव रातों में
माँ का ध्यान करो
मैया माँ का ध्यान करो
माँ से ममता पाओ
माँ से ममता पाओ
जय जयकारा करो
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
दस भुज धारिणी मैया
असुरों का नाश करे
मैया असुरों का नाश करे
मोक्ष भक्त को दे माँ
मोक्ष भक्त को दे माँ
विपदा नित माँ हरे
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
खड्ग खप्पर धारिणी
जगजननी है माँ
जगजननी है माँ
दिव्य करे साधक को
दिव्य करे साधक को
देती माँ करुणा
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
कल्याणकारिणी मैया
दुखों का नाश करे
मैया दुखों का नाश करे
मंगल मंगल नित हो
मंगल मंगल नित हो
माँ की जो पूजा करे
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
अनुपम रूप माँ
धर्म सदा ही बढे
मैया धर्म सदा ही बढे
काज सफल करो माता
काज सफल करो माता
द्वारे तेरे खड़े
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
श्रद्धा पुष्प माता को
नित अर्पण करो
मैया नित अर्पण करो
माँ के ध्यान में रमकर
माँ के ध्यान में रमकर
जीवन सफल करो
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
चंद्रघंटा माता की
आरती नित गाओ
आरती नित गाओ
कामना पूरी होगी
कामना पूरी होगी
माँ की शरण आओ
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
मैया जय चंद्रघंटा माँ
सर्वजगत की स्वामिनी
सर्वजगत की स्वामिनी
कृपा सदा करना
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
मैया जय चंद्रघंटा माँ
सर्वजगत की स्वामिनी
सर्वजगत की स्वामिनी
कृपा सदा करना
ॐ जय चंद्रघंटा माँ
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