विषु कानी 2025 में कब है? इस साल का खास दिन कब है और क्यों है यह पर्व इतना महत्वपूर्ण? जानें तिथि, महत्व और कैसे इस दिन का लाभ उठाकर आप अपना जीवन बेहतर बना सकते हैं।
विषु कानी केरल में मनाए जाने वाले विषु पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। विषु कानी का अर्थ है "प्रथम दर्शन", जिसे साल की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे विषु की सुबह देखा जाता है, जिसमें भगवान कृष्ण की मूर्ति, धान, फल, फूल, सोना, दर्पण और दीपक शामिल होते हैं। इसे देखने से वर्षभर सौभाग्य बना रहता है।
मेष राशि में सूर्य के प्रवेश अर्थात मेष संक्रांति का एक रूप है विषु कानी। केरल में इस दिन नया साल मनाया जाता है, इसलिए विशुकानी को मलयालम नववर्ष भी कहते हैं। यह मलयालम माह मेष का वह पहला दिन है, जब सूर्य भूमध्य रेखा पर पहुंचता है।
- विषु कानी का महत्व - अनुष्ठान और रीति-रिवाज - विशुक्कनी एक संस्कृत शब्द
इस त्योहार का गहरा सांस्कृतिक महत्व है, और दुनिया भर में मलयाली हिंदू इसे उत्साह के साथ मनाते हैं। इसे बिसु के नाम से भी जाना जाता है और कर्नाटक के मैंगलोर और उडुपी जिले के लोग भी इस उत्सव का हिस्सा बनते हैं। विशु केरल के लोगों के लिए एक नई शुरुआत है, और यह पूरे राज्य में बड़ी धूमधाम और जोश के साथ मनाया जाता है। विशुकन्नी/विशुकानी की तिथि से केरल के अधिकांश किसान अपनी कृषिक गतिविधियाँ शुरू करते हैं, इसीलिए यह आशा और समृद्धि का पर्व भी माना जाता है।
विशु का सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। इस दिन लोग नए कपड़े खरीदते हैं और इस उत्सव को मनाने के लिए सुबह मंदिरों में जाते हैं। इस दिन केरल राज्य के पारंपरिक खाने के साथ भोज रखा जाता है, और इस भोज में नमकीन, मीठे, खट्टे तथा कड़वे व्यञ्जन समान मात्रा में शामिल किये जाते हैं। केरल के प्रमुख मंदिरों जैसे गुरुवायूर श्री कृष्ण मंदिर और सबरीमाला अयप्पा मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों का ताँता लगता है। इसके अलावा, लोग इस दिन विशुपदक्कम को मनाने के लिए अपने घरों को सजाते हैं। विशु में रामायण या भगवद गीता के छंदों को पढ़ना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि रामायण का जो पन्ना खोला जाता है उसका सम्बन्ध आने वाले वर्ष से होता है।
मलयालम शब्द ‘कानी’ का अर्थ है ‘जो पहले देखा जाता है’ और ‘विशुक्कनी’ का अर्थ है ‘वह जो विशु के दिन सबसे पहले देखा जाता हो। केरल में विशुकनी के एक दिन पहले रात को पूजा कक्ष में ‘विशुक्कनी’ को स्थापित किया जाता है। इसकी पूजन सामग्री में फूल, भगवान विष्णु / कृष्ण की मूर्ति, दीपक, चावल, फल, सब्जियां, सुपारी, नारियल, दर्पण, सोना, पवित्र पुस्तक और सिक्के शामिल होते हैं। यह सभी सामग्री समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं।
परिवार के सभी सदस्यों के लिए विशु दिवस की सुबह जल्दी उठना और पूजा कक्ष में अपनी आँखें बंद करके जाने की प्रथा है, ताकि सबसे पहले वे विशुक्कनी को देखें। इस संस्कार का नाम कनिकानल है। किंवदंती के अनुसार, नए साल में विशुक्कनी को सबसे पहले देखने से आने वाले पूरे वर्ष में शुभ समाचार प्राप्त होते हैं।
यह थी मलयालम नववर्ष विशुकानी पर हमारी छोटी सी पेशकश! ऐसी ही अन्य जानकारी के लिए जुड़े रहें श्री मंदिर से।
शुभ विषु कानी!
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