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यमुना छठ कब है 2025?

यमुना छठ 2025 की तिथि, पूजा विधि और महत्व जानें। इस दिन मां यमुना की कृपा पाने के लिए करें ये खास उपाय और पाएं सुख-समृद्धि

यमुना छठ के बारे में

यमुना छठ एक पवित्र हिन्दू पर्व है, जो यमुना मैया की उपासना के लिए मनाया जाता है। इसे चैत्र शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त यमुना नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। विशेष रूप से मथुरा-वृंदावन में इसका महत्व अधिक है।

यमुना छठ 2025

यमुना छठ विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मथुरा-वृन्दावन में मनाई जाती है। विशेषकर यह कृष्ण जी के भक्तों के लिए बेहद खास त्योहार है। यह तिथि चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाई जाती है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन पवित्र नदी यमुना जी पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।

यमुना छठ कब है?

  • यमुना छठ 03 अप्रैल 2025, गुरुवार को मनाई जायेगी।
  • षष्ठी तिथि 02 अप्रैल 2025 को 11:49 PM पर प्रारंभ होगी
  • षष्ठी तिथि का समापन 03 अप्रैल 2025 को 09:41 PM पर होगा।

यमुना छठ के शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 AM से 05:01 AM तक
प्रातः सन्ध्या04:38 AM से 05:47 AM तक
अभिजित मुहूर्त11:36 AM से 12:26 PM
विजय मुहूर्त02:06 PM से 02:56 PM तक
गोधूलि मुहूर्त06:14 PM से 06:37 PM तक
सायाह्न सन्ध्या06:15 PM से 07:24 PM तक
अमृत काल09:29 PM से 11:00 PM तक
निशिता मुहूर्त03 अप्रैल, 11:38 PM से 04 अप्रैल 12:24 AM तक

विशेष योग

रवि योग

03 अप्रैल 07:02 AM से 04 अप्रैल 05:51 AM

भक्तों, यमुना जयंती कृष्ण भक्तों द्वारा अत्यंत ही उत्साह से मनाई जाती है। इस दिन भक्तजन सुबह जल्दी उठते हैं और पवित्र नदी में स्नान करते हैं। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से तन के साथ मन की भी शुद्धि होती है।

यमुना छठ का महत्व

आज हम आपके लिए लेकर आये हैं मथुरा-वृंदावन के विशेष पर्व यमुना छठ की रोचक जानकारी। जिसमें हम आपको इस दिन के महत्व एवं इससे जुड़े उत्सव के बारे में बताएँगे।

आइये जानते हैं,

  • क्या है यमुना छठ ?
  • यमुना छठ का महत्व क्या है ?
  • यमुना छठ उत्सव क्या है ?

क्या है यमुना छठ ?

पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना नदी धरती पर चैत्र माह की नवरात्रि की षष्ठी तिथि के दिन अवतरित हुई थी। तब से यमुना छठ धरती पर यमुना जी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसे यमुना जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व मथुरा - वृंदावन एवं गुजरात में यह दिन विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन यमुना जी एवं कृष्ण जी की पूजा का विधान है। इस विशेष तिथि पर यमुना स्नान अत्यंत पवित्र माना जाता है।

यमुना छठ का महत्व क्या है ?

हिन्दू धर्म में यमुना नदी को अत्यंत पवित्र माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यमुना जी को श्रीकृष्ण की पत्नी भी माना गया है। इस कारण मथुरा और वृन्दावन में यमुना छठ अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। यमुना छठ के दिन यमुना नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार यह स्नान मनुष्य की आत्मा को शुद्ध करता है साथ ही इस लोक के समस्त सुखों के साथ मनुष्य को मृत्यु उपरांत मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

इसके अतिरिक्त इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना का भी विधान है। कहते हैं कि यमुना जयंती के दिन यदि भगवान कृष्ण का आशीर्वाद मिल जाये तो भक्तों का जीवन सुख-शांति से समृद्ध हो जाता है।

यमुना छठ उत्सव क्या है ?

यमुना छठ के दिन मथुरा के विश्राम घाट पर इस दिन की विशेष तैयारी की जाती है। संध्या काल में यमुना माता की आरती की जाती है और उन्हें छप्पन भोग का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

इस दिन भक्त जन भोर में उठकर यमुना जी में आध्यात्मिक स्नान करते हैं। इस दिन देवी यमुना की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। हमारे शास्त्रों में यमुना जी को भगवान कृष्ण की संगिनी माना जाता है, अतः इस दिन भक्त भगवान कृष्ण की पूजा भी करते हैं।

भक्तों, परंपराओं में अनुसार ऐसा माना जाता है कि यमुना छठ पर यमुना नदी में डुबकी लगाने से तन मन शुद्ध हो जाता है एवं परम आनंद की प्राप्ति होती है। अतः आप भी इस दिन माँ यमुना और कृष्ण जी की भक्ति करें। साथ ही इस दिन की अन्य जानकारी के लिए श्री मंदिर के साथ बनें रहें।

यमुना छठ की कथा

नमस्कार, श्री मंदिर में आपका स्वागत है। भक्तों, पौराणिक काल से ही हिन्दू धर्म में नदियों को विशेष महत्व दिया गया है एवं उन्हें माता के समान पूजनीय माना गया है। आज हम आपके लिए लेकर आये हैं कृष्ण प्रिया कही जाने वाली यमुना नदी के अवतरण दिवस यमुना छठ की पौराणिक कथा।

प्रचलित पौराणिक कथा के अनुसार,

भगवान सूर्यदेव की पत्नी देवी छाया थीं। इन्हें संतान स्वरूप यमुना जी ने पुत्री एवं यमराज जी पुत्र के रूप में प्राप्त हुए। बाल्यकाल से भाई यमराज अपनी बहन यमुना से अत्यधिक स्नेह करते थे। अतः यमराज ने अपनी बहन यमुना को यह आर्शीवाद दिया था कि जो कोई भी मुनष्य यमुना नदी में स्नान करेगा, वह यमलोक नहीं जाएगा। इसी मान्यता के आधार पर प्राचीन काल से ही यमुना में स्नान करना अत्यंत पवित्र माना जाता है।

इसके साथ ही एक अन्य कथा भी प्रचलित है कि जब भगवान श्री विष्णु जी ने लक्ष्मी जी को राधा के रूप में धरती पर अवतार लेने के लिए कहा तब माता लक्ष्मी अपने साथ यमुना जी को भी ले आयीं। इसलिए द्वापर युग में यमुना धरती पर नदी के रूप में अवतरित हुईं। तब से ही ब्रज में यमुना जी को पूजा जाता है तथा यमुना छठ पर विशेष पूजा-पाठ करने के लिए यमुना घाट पर भक्तजन एकत्रित होते हैं।

तो भक्तों ये थी यमुना छठ से जुड़ी कथा। ऐसी ही अन्य धार्मिक कथाओं के लिए श्री मंदिर से जुड़ें रहें। धन्यवाद।

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Published by Sri Mandir·March 17, 2025

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