image
downloadDownload
shareShare
ShareWhatsApp

महातारा जयंती कब है 2025?

महातारा जयंती 2025 की तिथि, पूजा विधि और महत्व जानें। इस शुभ अवसर पर मां महातारा की उपासना कर पाएं आशीर्वाद और सिद्धि!

महातारा जयंती के बारे में

महातारा जयंती माँ महातारा (महातारा देवी) की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह तिथि तांत्रिक और शक्तिपीठ परंपराओं में विशेष महत्व रखती है। माँ महातारा को आदि शक्ति और महाविद्या तारा देवी का एक रूप माना जाता है, जो रक्षा, ज्ञान और मुक्ति प्रदान करती हैं। आइये जानते हैं इसके बारे में...

महातारा जयंती 2025

जगतजननी माता आदिशक्ति को अपने हर भक्त के कष्ट का निवारण करने वाली माना गया है। माता अपने भक्त की एक पुकार पर उनके समस्त मनोकामना पूर्ण करती हैं। जातक अपनी आस्था अनुसार उनके विभिन्न स्वरूप की आराधना करते हैं। माता आदिशक्ति के उन्हीं स्वरूपों में से एक है देवी का 'महातारा' अवतार। भारत देश के कोने-कोने में महातारा जयंती का पर्व बहुत ही श्रद्धा व विश्वास के साथ मनाया जाता है।

महातारा जयंती कब है?

महातारा जयंती चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथी को मनाई जाती है। साल 2025 में ये पर्व 6 अप्रैल, रविवार को मनाया जाएगा।

  • महातारा जयन्ती रविवार, 06 अप्रैल, 2025, रविवार को है।
  • नवमी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 05, 2025 को 07:26 पी एम बजे से
  • नवमी तिथि समाप्त - अप्रैल 06, 2025 को 07:22 पी एम बजे तक

महातारा जयंती का महत्व क्या है?

महातारा जयंती के अवसर पर हिंदू धर्म के लोगों द्वारा कई मतवपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। आपको बता दें कि भगवती महातारा दस महाविद्याओं में से एक हैं। यह देवी शक्ति का बहुत ही उग्र और आक्रामक स्वरूप है।

ये देवी तंत्र साधकों के लिए सर्वसिद्धि का वरदान देने वाली मानी जाती हैं, इसलिए इस दिन तांत्रिक लोग विशेष रूप से माता के महातारा स्वरूप की उपासना करते हैं। साथ ही इस दिन जो जातक सच्चे मन से इनकी पूजा-अर्चना करते हैं, उन्हें सुख, सौभाग्य एवं अकाट्य ज्ञान का वरदान मिलता है। इसके अलावा ये भी मान्यता है कि देवी तारा सदैव शत्रुओं से अपने भक्तों की रक्षा करती हैं, व उन्हें मोक्ष प्रदान करती हैं।

देवी महातारा की उत्पत्ति कैसे हुई?

पुराणों में वर्णन मिलता है कि पृथ्वी की उत्पत्ति से पूर्व संपूर्ण ब्रह्मांड में घोर अंधकार था। इस ऊर्जा विहीन अंधकार की स्वामिनी माता काली थीं। इसके पश्चात् जब पृथ्वी की उत्पत्ति हुई, तो इस अंधकार में एक प्रकाश की किरण उत्पन्न हुई, जिसे तारा के रूप में जाना जाने लगा। ऐसा कहा जाता है कि देवी तारा अक्षोभ्य नाम के एक संत की शक्ति हैं। उन्हें ब्रह्मांड के हर पिंड की स्वामिनी माना जाता है। देवी का प्रादुर्भाव पृथ्वी की उत्पत्ति के समय हुई थी, इस कारण उन्हें महातारा के रूप में जाना जाता है

देवी महातारा की पूजा कैसे की जाती है?

देवी महातारा की पूजा करने के लिए 'महातारा जयंती' पर भक्त प्रातःकाल उठकर सर्वप्रथम नित्यकर्म से निवृत होते हैं। उसके पश्चात् माता की छवि पर गंगाजल छिड़ककर उसे पूजा स्थल की चौकी पर स्थापित किया जाता है। फिर उनका श्रृंगार करके धूप, दीप, नैवेद्य आदि अर्पित कर पूजा की जाती है। इस दिन जातक यथाशक्ति निराहार या फलाहार व्रत का भी पालन करते हैं। इस दिन माता के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ फल देने वाला माना जाता है।

जैसा कि आपको ज्ञात है कि माता का स्व उपभाव उग्र होता है, इसलिए पूजा के पश्चात् किसी भी भूल के लिए माता से क्षमा याचना अवश्य करें। इससे यदि आपके द्वारा की गई पूजा में कोई भूल हुई होगी तो माता उसे क्षमा कर देंगी, और आप पर क्रुद्ध नहीं होंगी

देवी महातारा के अन्य नाम क्या हैं?

जैसा कि हमने आपको बताया कि देवी महातारा आदिशक्ति का उग्र रूप हैं। इन्हें तारिणी विद्या, एकजटा, नील सरस्वती, नीलतारा, उग्रतारा तथा महानीला आदि नामों से भी जाना जाता है।

माँ महातारा का नाम 'महानीला' व 'नीलतारा' कैसे पड़ा?

देवी तारा के महानीला व नीलतारा नाम पड़ने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है, जिसके अनुसार, देवताओं व राक्षसों के मध्य समुद्र मंथन के दौरान, कई भिन्न-भिन्न वस्तुएं समुद्र से बाहर निकलीं। उसी समय जब विष बाहर आया, तब सभी संतों और देवों ने मिलकर भगवान शंकर से सहायता की याचना की। उनकी पुकार सुनकर संसार की रक्षा हेतु भगवान शिव ने संपूर्ण विष का पान कर उसे अपने कंठ में ही रोक लिया, जिस कारण उनके पूरे शरीर का रंग नीला पड़ गया।

जब माँ भगवती ने ये दृश्य देखा तो उन्होंने भगवान शंकर की पीड़ा दूर करने के उद्देश्य से उनके शरीर में प्रवेश किया, और विष के प्रभाव को कम कर उन्हें राहत दी। इस तरह विष के प्रभाव के कारण देवी का शरीर नीला हो गया। तत्पश्चात् भगवान् शिव ने उन्हें 'महानीला' नाम से सम्बोधित किया। इसी कारण देवी को 'नीलतारा' नाम से भी पूजा जाता है।

तो भक्तों, यह थी महातारा जयंती के बारे में संपूर्ण जानकारी। हमारी कामना है कि मां आपकी आराधना से प्रसन्न हों, शत्रुओं से आपकी रक्षा करें, और उनकी कृपा स्वरूप आजीवन आपको सुख व सद्बुद्धि की प्राप्ति हो। व्रत, त्यौहार व अन्य धार्मिक जानकारियों के लिए जुड़े रहिए 'श्री मंदिर' एप पर।

divider
Published by Sri Mandir·March 17, 2025

Did you like this article?

srimandir-logo

श्री मंदिर ने श्रध्दालुओ, पंडितों, और मंदिरों को जोड़कर भारत में धार्मिक सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया है। 50 से अधिक प्रसिद्ध मंदिरों के साथ साझेदारी करके, हम विशेषज्ञ पंडितों द्वारा की गई विशेष पूजा और चढ़ावा सेवाएँ प्रदान करते हैं और पूर्ण की गई पूजा विधि का वीडियो शेयर करते हैं।

Address:

Firstprinciple AppsForBharat Private Limited 435, 1st Floor 17th Cross, 19th Main Rd, above Axis Bank, Sector 4, HSR Layout, Bengaluru, Karnataka 560102

Play StoreApp Store

हमे फॉलो करें

facebookinstagramtwitterwhatsapp

© 2025 SriMandir, Inc. All rights reserved.