अक्षय तृतीया 2025: सही तिथि और पूजा विधि जानें, और इस शुभ दिन पर आशीर्वाद प्राप्त करें, जिससे आपकी समृद्धि और सुख-शांति में वृद्धि हो।
अक्षय तृतीया हिंदू धर्म में एक अत्यंत शुभ और पवित्र तिथि मानी जाती है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इसे अखा तीज भी कहा जाता है। अक्षय का अर्थ होता है "जिसका कभी क्षय न हो", यानी जो कभी नष्ट न हो। इस दिन किए गए दान, पूजा-पाठ, और पुण्य कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर वर्ष वैशाख मास में शुक्ल पक्ष के तीसरे दिन अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व अप्रैल या मई के महीने में पड़ता है। ये पर्व भगवान विष्णु को समर्पित होता है। आपको बता दें कि अक्षय तृतीया को कई जगहों पर आखातीज के नाम से भी जाना जाता हैं।
जैसा कि आप जानते हैं कि सोना हमेशा भारतीय संस्कृति में धन और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। इसलिए अक्षय तृतीया पर इसकी खरीददारी करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन घर में सोना लाने से संपन्नता बनी रहती है।
पुणे | 06:08 ए एम से 12:32 पी एम तक |
नई दिल्ली | 05:41 ए एम से 12:18 पी एम तक |
चेन्नई | 05:49 ए एम से 12:06 पी एम तक |
जयपुर | 05:49 ए एम से 12:24 पी एम तक |
हैदराबाद | 05:51 ए एम से 12:13 पी एम तक |
गुरुग्राम | 05:42 ए एम से 12:19 पी एम तक |
चण्डीगढ़ | 05:40 ए एम से 12:20 पी एम तक |
कोलकाता | 05:05 ए एम से 11:34 ए एम तक |
मुम्बई | 06:11 ए एम से 12:36 पी एम तक |
बेंगलूरु | 05:59 ए एम से 12:17 पी एम तक |
अहमदाबाद | 06:07 ए एम से 12:37 पी एम तक |
नोएडा | 05:41 ए एम से 12:18 पी एम तक |
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 03:55 ए एम से 04:39 ए एम तक |
प्रातः सन्ध्या | 04:17 ए एम से 05:23 ए एम तक |
अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं |
विजय मुहूर्त | 02:06 पी एम से 02:59 पी एम तक |
गोधूलि मुहूर्त | 06:27 पी एम से 06:49 पी एम तक |
सायाह्न सन्ध्या | 06:28 पी एम से 07:33 पी एम तक |
अमृत काल | 01:26 पी एम से 02:52 पी एम तक |
निशिता मुहूर्त | 11:33 पी एम से 12:17 ए एम, 01 मई तक |
सर्वार्थ सिद्धि योग | पूरे दिन |
रवि योग | 04:18 पी एम से 05:22 ए एम, 01 मई तक |
अक्षय तृतीया हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाया जाने वाला एक पर्व है। माना जाता है कि इस दिन ही भगवान विष्णु का नर-नारायण अवतार हुआ था, इसलिए इस दिन विष्णु पूजा का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए स्नान-दान जप-तप आदि कर्मों के फल जन्म जन्मांतर तक आप के साथ रहते हैं, यानि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल अक्षय हो जाता है। यही कारण है कि इस पर्व को अक्षय तृतीया के नाम से जाना जाता है।
तो भक्तों, ये तो थी अक्षय तृतीया पर्व के महत्व से जुड़ी जानकारी। हमारी कामना है कि आपका अक्षय तृतीया का व्रत सफल हो, और भगवान विष्णु की कृपा सदैव आप पर बनी रहे।
भक्तों, किसी भी व्रत या उपासना का संपूर्ण फल हमें तभी प्राप्त होता है, जब हम अपनी पूजा विधि विधान से करें। इसी प्रकार अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर अक्षय पुण्य फल प्राप्त करने के लिए आप किस प्रकार से भगवान विष्णु की आराधना करें, चलिए इस लेख में जानते हैं।
तो भक्तों, ये थी अक्षय तृतीया की पूजा विधि। हमारी कामना है कि इस पर्व पर आपकी विष्णु आराधना सफल हो, और आप पर आजीवन जगत पालक श्री हरि का आशीर्वाद बना रहे।
ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर माता लक्ष्मी ने अपनी तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न किया था। और जैसा कि आप जानते हैं, सोने को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है। ऐसे में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर सोने की खरीददारी करना , उसे घर में लाना, स्वयं माता लक्ष्मी को अपने घर में आमंत्रित करने जैसा माना जाता है।
इस दिन सोना ख़रीदने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, और उनके आशीर्वाद के प्रभाव से आपके घर में कभी भी धन धान्य की कमी नहीं होती है।
अक्षय तृतीया के दिन को लेकर एक मान्यता ये भी है कि इस दिन किए जाने वाले हर शुभ कार्य का फल अक्षय रहता है, और निरंतर बढ़ता रहता है। इसी प्रकार इस दिन यदि हम अपने घर में सोना लाते हैं, तो हमारा घर सदैव सोने जैसी बहुमूल्य वस्तुओं से भरा रहता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन धन के देवता कुबेर ने भगवान शिव की आराधना की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें समृद्धि का वरदान प्राप्त हुआ था। इसलिए भी इस दिन सोने की खरीददारी करना उत्तम माना जाता है।
भक्तों, इस दिन आप किसी कारण वश सोना न ख़रीद पाएं तो निराश न हों। बस विधि विधान से भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की उपासना करें, ब्राह्मण व निर्धन को यथासंभव दान दें। आप पर अति शीघ्र ही माता लक्ष्मी की कृपा होगी, और आप निश्चय ही सोना व अन्य बहुमूल्य वस्तुएं खरीदने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम हो पाएंगे।
भक्तों नमस्कार! धर्म आस्था के इस मंच श्री मंदिर पर आपका पुनः बहुत-बहुत स्वागत है। जैसा कि आप जानते हैं कि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया या आखा तीज का पर्व मनाया जाता है, और ऐसी मान्यता है कि इस दिन किए गए दान पुण्य से हमें अक्षय शुभ फल की प्राप्ति होती है। परंतु किसी भी पर्व का संपूर्ण फल हमें तभी प्राप्त होता है, जब हम इन बातों का ध्यान रखें कि इस दिन हमें क्या करना है, और क्या नहीं करना चाहिए।
चलिए जानते हैं,
- अक्षय तृतीया पर क्या करें - अक्षय तृतीया पर क्या न करें
तो भक्तों, ये थी अक्षय तृतीया पर्व से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। हमारी कामना है कि आपका ये व्रत सफल हो, और भगवान विष्णु की संपूर्ण कृपा प्राप्त हो। इस पर्व से जुड़ी अन्य जानकारियों के लिए जुड़े रहिए 'श्री मंदिर' ऐप पर।
भक्तों नमस्कार! श्री मंदिर पर आपका स्वागत है। अक्षय तृतीया पर्व पर भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जातक विधिपूर्वक व्रत एवं उपासना करते हैं। लेकिन इस दिन से जुड़े कुछ ऐसे उपाय भी हैं, जिन्हें करके आप अपनी बहुत सारी समस्याओं से निदान पा सकते हैं।
चलिए जानते हैं अक्षय तृतीया के दिन से जुड़े उपाय
अक्षय तृतीया के पर्व पर माता लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु के दर्शन करने से जातक को दोनो का आशीर्वाद मिलता है, जिसके फलस्वरूप व्यक्ति को उसकी इच्छा से अधिक सुख सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
ऐसा कहा जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन जो भक्त सच्चे मन से माता लक्ष्मी के स्वरूप माँ अन्नपूर्णा की उपासना करते हैं, उनके में कभी भी अन्न धन की कमी नहीं होती है।
अक्षय तृतीया के दिन सोने-चांदी की वस्तुएं घर में अवश्य लाएं। इस दिन माता लक्ष्मी के लिए सोने या चांदी की चरण पादुका लाएं और प्रतिदिन इसकी पूजा करें। इससे माता लक्ष्मी अत्यंत प्रसन्न होंगी, एवं आपके परिवार पर अपनी कृपा सदैव बनाए रखेंगी।
अक्षय तृतीया के दिन 11 कौड़ियों को लाल कपड़े में बांधकर मंदिर या घर में बने पूजा स्थल पर रखें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आकर्षित होती हैं, और सदा आपके घर में निवास करती हैं।
अक्षय तृतीया पर पूजा स्थल पर एकाक्षी नारियल स्थापित करें। साथ ही इस दिन केसर व हल्दी से लक्ष्मी जी की पूजा करें। इससे अधिक खर्च की समस्या व आर्थिक परेशानी से छुटकारा मिलता है।
इस दिन पितरों को तृप्त करने एवं उनकी कृपा पाने के लिए जल, कलश, पंखा, खरबूजा, फल, शक्कर, घी, खड़ाऊं, छाता, सत्तू, ककड़ी,आदि को किसी ब्राह्मण को दान स्वरूप भेंट करें।
अक्षय तृतीया पर गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, धान्य, गुड़, चांदी, नमक, शहद एवं कन्या दान का विशेष महत्व होता है। इनमें से जो भी आपके लिए संभव हो, उसका दान अवश्य करें। इस दिन कन्या दान करना अन्य सभी दानों से श्रेष्ठ माना जाता है।
तो भक्तों, ये थी अक्षय तृतीया पर्व पर किए जाने वाले उपाय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी। हमारी कामना है कि आपका ये व्रत सफल हो, और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे।
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