जानिए 2025 में चैती छठ पूजा कब है? नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की पूरी जानकारी
बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड और अब पूरे भारत में मनाया जाने वाला छठ आस्था का एक महापर्व है। यह पूजा सूर्य देव और उनकी पत्नी उषा देवी की उपासना के रूप में होती है, जिसमें श्रद्धालु उगते सूर्य को अर्घ देते हैं। ये पर्व आज इतना लोकप्रिय हो चुका है कि अब इसकी चर्चा विदेशों में भी होने लगी है। छठ एक प्रकृति पर्व है जिसे करने से सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। चैती छठ पर्व हर साल चैत्र महीने में मनाया जाता है। यह व्रत सूर्य देव और छठी माई को समर्पित होता है। यह प्रकृति से जुड़ा महापर्व है, जो चार दिनों तक श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस पर्व में क्या-क्या होता है अगर आप जानना चाहते हैं चैती छठ से संबंधित अन्य जानकारियां तो पढ़िए हमारे इस लेख को।
चैती छठ पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी माई की पूजा के लिए समर्पित होता है। भक्तगण इस पूजा के माध्यम से सुख, समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। चैती छठ की शुरुआत नहाय-खाय से होती है और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। इस पूजा को करने से व्यक्ति को बल, आरोग्य, समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस बार चैती छठ पूजा का महापर्व 1, अप्रैल 2025, मंगलवार को प्रारंभ होगा और इसका समापन 4 अप्रैल 2025, शुक्रवार को होगा।
चैती छठ पूजा में सूर्यदेव को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। 2025 में यह पावन पर्व शुभ मुहूर्त में किया जाएगा, जिससे भक्तों को अधिक पुण्य की प्राप्ति होगी। इस दौरान भक्त नदी, तालाब या पवित्र जलाशयों में खड़े होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं और परिवार के सुखी रहने की मंगल कामना करते हैं। संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) – शाम 6:00 बजे से 6:30 बजे तक उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) – सुबह 5:30 बजे से 6:00 बजे तक
दर्शकों, छठ पूजा वैदिक काल से चला आ रहा पर्व है। इस पर्व में शुद्धता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। संपूर्ण विधि के साथ छठ पूजा करने से रोग-दोष दूर होते हैं, संपन्नता आती है और पति की उम्र लंबी होती है।
तो यह थी छठ पूजा से संबंधित विशेष जानकारी। यदि आप इसके महत्व और पूजन विधि के बारे में जानना चाहते हैं तो श्री मंदिर ऐप पर अवश्य जाएं।
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