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हनुमान जयन्ती कब है 2025?

हनुमान जयन्ती 2025 की तिथि, पूजा विधि और महत्व जानें। इस पवित्र दिन पर हनुमान जी की पूजा से प्राप्त करें आशीर्वाद और विजय।

हनुमान जयन्ती के बारे में

हनुमान जयंती भगवान हनुमान के जन्म उत्सव के रूप में मनाई जाती है। यह दिन चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जी को शक्ति, भक्ति और साहस का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, व्रत रखते हैं और राम भक्त हनुमान की पूजा करते हैं।

हनुमान जयन्ती 2025

देश के कोने-कोने में भक्तगण अपनी स्थानीय मान्यताओं के आधार पर वर्ष में भिन्न-भिन्न समय पर हनुमान जयन्ती के रूप में हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाते हैं। विशेषकर उत्तर भारतीय राज्यों में ये पर्व अत्यंत उत्साह के साथ मनाया जाता है, जोकि सबसे अधिक लोकप्रिय भी है।

हनुमान जयन्ती कब मनाई जाएगी ?

  • हनुमान जयन्ती 12 अप्रैल, शनिवार को मनाई जाएगी।
  • पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल 2025 को सुबह 03 बजकर 21 मिनट पर प्रारंभ होगी।
  • पूर्णिमा तिथि का समापन 13 अप्रैल 2025 को सुबह 05 बजकर 51 मिनट पर होगा।

इस दिन के शुभ मुहूर्त

मुहूर्तसमय
ब्रह्म मुहूर्त 04:08 AM से 04:53 AM
अमृत काल11:23 AM से 01:11 PM
अभिजीत मुहूर्त11:33 AM से 12:24 PM
राहुकाल08:49 AM से 10:24 AM
सूर्योदय 05:38 AM
सूर्यास्त 06:19 PM
चंद्रोदय05:52 PM
चन्द्रास्त05:33 AM, 13 अप्रैल
नक्षत्रहस्त
योग व्याघात

ऐसा मान्यता है कि कपीश हनुमान सूर्योदय के समय जन्मे थे। इस पर्व पर मन्दिरों में प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में आध्यात्मिक प्रवचनों का आयोजन होता है और ये आयोजन सूर्योदय होते ही समाप्त हो जाते हैं।

हनुमान जयंती क्या है? जानें महत्व?

गोस्वामी तुलसीदास हनुमान जी को सम्बोधित करते हुए जी कहते हैं कि -

‘चारो जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा।’

पुराणों के अनुसार पवनसुत हनुमान एकमात्र ऐसे देवता हैं, जो चारो युग में किसी न किसी रूप में संसार के लिए संकटमोचन के रूप में मौजूद रहते हैं। माना जाता है कि हनुमान जी इस पृथ्वी पर सशरीर विद्यमान हैं। हनुमान जी सतयुग में भी थे, रामायण काल व महाभारत काल में भी थे, और आज कलयुग में भी वो इस धरती पर विद्यमान हैं। भक्त इन्ही संकटमोचन हनुमान जी की जन्म तिथि को हनुमान जयंती के रूप में मनाते हैं।

चलिए जानते हैं कि

  • हनुमान जयंती क्या है?
  • इसका महत्व क्या है?
  • ये पर्व कैसे मनाया जाता है?

हनुमान जयंती क्या है? इसे क्यों मनाते हैं?

चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। हालांकि विभिन्न राज्यों में ये पर्व अलग-अलग तिथियों पर मनाया जाता है। कुछ भक्त कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्दशी को हनुमान जी की जयंती के रूप में मनाते हैं। ऐसी मान्यता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की सेवा के लिए महादेव जी ने एकादश रुद्र को ही हनुमान के रूप में अवतरित किया था।

हनुमान जयंती का महत्व क्या है?

प्रत्येक हनुमान भक्त के लिए हनुमान जयंती का दिन विशेष महत्व रखता है-

  • पवनसुत, मंगलमूर्ति, संकटमोचन आदि कहे जाने वाले श्री हनुमान के नाम के स्मरण मात्र से ही भक्तों के समस्त दुखों का नाश हो जाता हैं।
  • इस दिन हनुमान जी की उपासना करने से अतुलनीय बल की प्राप्ति होती है, वहीं पवन की गति से चलने वाले पवन पुत्र अपने भक्तों की बुद्धि भी अत्यंत तीव्र करते हैं।
  • हनुमान जयंती के अवसर पर हनुमान चालीसा का पाठ करने मात्र से ही व्यक्ति के समस्त संकट टल जाते है, साथ ही असाध्य रोगों से भी मुक्ति मिलती है।
  • इस दिन हनुमान रक्षा स्त्रोत का पाठ करने से आपके जीवन की हर बाधा दूर होती है, और भूत-प्रेत आदि बुरी आत्माओं का प्रभाव भी नष्ट होता है।

हनुमान जयंती पर्व कैसे मनाया जाता है?

  • हनुमान जयंती के दिन भक्त प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से शुद्ध होकर हनुमान जी की पूजा करने का संकल्प लेते हैं।
  • इस दिन भक्त हनुमान मंदिर में दर्शन के लिए जाते है। कुछ भक्त हनुमान जयंती के अवसर पर व्रत रखते हैं, एवं भंडारे आदि का आयोजन कराते हैं।
  • हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की मूर्तियों पर सिंदूर और चांदी का वर्क चढ़ाने की विशेष परम्परा है।
  • इस दिन दिन मंदिरों व घरों में विशेष सुंदरकांड, हनुमान चालीसा का पाठ व भजन-कीर्तन का भी आयोजन होता है।
  • हनुमान जयंती के अवसर पर बजरंग बली के भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उन्हें सिंदूर लाल वस्त्र, ध्वजा, चंदन, पीले फूल, धूप, अगरबती, गाय के शुद्ध घी का दीपक, लड्डू का भोग आदि अर्पित करते हैं।

तो भक्तों, ये थी हनुमान जयंती के महत्व से जुड़ी विशेष जानकारी। हमारी कामना है कि आपकी पूजा व व्रत सफल हो, हनुमान जी आप पर प्रसन्न हों और आजीवन अपनी कृपा बनाएं रखें।

हनुमान जयंती की पूजा विधि

जब हमारे मन को कष्ट व निराशा घेर लेते हैं, जब कभी हम अंधेरी रातों में भयभीत हो जाते हैं, तब कंठ से स्वत: ही बोल फूट पड़ते हैं, जय हनुमान ज्ञान गुन सागर! जय कपीश तिह़ु लोक उजागर!! बजरंग बली के सुमिरन मात्र से ही हमें अपने समीप उनकी उपस्थिति का अहसास होता है, और यही अहसास हमें हमारी चिंता, डर आदि पर काबू पाने का हौसला देता है।

चलिए जानते हैं,

  • हनुमान जयंती कैसे मनाएं?
  • हनुमान जयंती की पूजा विधि

हनुमान जयंती कैसे मनाएं?

  • पूर्णिमा यानि हनुमान जयंती से एक दिन पहले की रात को भूमि पर सोएं और भगवान राम, देवी सीता व भगवान हनुमान जी का ध्यान करें।
  • हनुमान जयंती के अवसर पर बजरंग बली की पूजा करने से पूर्व अपने अंतर्मन को शुद्ध कर लें, यानि किसी के प्रति छल कपट या क्रोध आदि न रखें।
  • पूजा के लिए एक चौकी, लाल कपड़ा, हनुमान जी की मूर्ति या फोटो, अक्षत, घी का दीपक, फूल, चंदन या रोली, गंगाजल, तुलसी की पत्तियां, धूप, नैवेद्य आदि सामग्रियां पहले से एकत्र कर लें।

हनुमान जयंती की पूजा विधि

  • हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें, एवं स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • उसके पश्चात् हाथ में जल लेकर हनुमान जी के सम्मुख व्रत का संकल्प लें।
  • अब हनुमान जी की मूर्ति के सम्मुख बैठकर उनकी पूजा करें।
  • पूजा करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें, कि आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  • अब हनुमान जी को तिलक, अक्षत, फूल आदि सामग्री अर्पित करें।
  • इस दिन हनुमान जी को सिंदूर का चोला अवश्य चढ़ाएं।
  • इसके पश्चात् हनुमान चालीसा पढ़ें, और षोडशोपचार यानि 16 संस्कारों के समस्त अनुष्ठानों का पालन करते हुए बजरंग बली की पूजा करें।
  • हनुमान चालीसा का पाठ करने के पश्चात् उन्हें भोग अर्पित करें।
  • इसके बाद दीपक व धूप जला कर बजरंगबली की आरती उतारें।
  • इस दिन आप हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें। और यदि संभव हो तो सुंदरकांड का पाठ भी अवश्य करें।
  • हनुमान जयंती के दिन व्रत रखकर अगले दिन स्नान करने के पश्चात् भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी का ध्यान करके अपने व्रत का पारण करें।
  • इस प्रकार पूजा करने से हनुमान जी अपने भक्तों से अत्यंत प्रसन्न होते हैं, और समस्त दुखों का नाश करते हैं।

तो भक्तों, ये तो थी हनुमान जयंती की सबसे आसान पूजा विधि। हमारी कामना है कि आपका पूजा सफल हो, और इस पावन पर्व का संपूर्ण फल मिले।

हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान चालीसा के पाठ को सबसे प्रभावी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि यदि ग्यारह दिन तक नियम पूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ किया जाए, तो बजरंग बली की कृपा से हर मनोकामना पूर्ण होती है।

चलिए जानते हैं हनुमान चालीसा पाठ के नियम

  • हनुमान चालीसा का पाठ प्रारंभ करने से पूर्व सर्वप्रथम भगवान श्री राम, माता सीता, तत्पश्चात् हनुमान जी का आह्वान करना चाहिए। हनुमान जी श्री राम के अनन्य भक्त हैं, इसलिए बिना अपने आराध्य श्री राम के आह्वान के वो किसी भी पूजा पाठ से संतुष्ट नहीं होते हैं।

  • हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए एक समय निर्धारित करें, यदि सुबह संभव हो तो प्रतिदिन सुबह के समय यह पाठ करें, अन्यथा शाम में हनुमान चालीसा का पाठ करने का नियम बनाएं।

  • हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए एक पवित्र स्थान का निर्धारण करना भी अति आवश्यक है। घर के ईशान कोण में बने पूजास्थल या मंदिर में जहां भी आपके लिए प्रतिदिन ये पाठ करना संभव हो, उसी जगह का चयन करें।

  • हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर को लकड़ी के पाटे पर लाल वस्त्र बिछाकर स्थापित करें, और स्वयं कुशा के आसन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। ध्यान रहे कि प्रतिदिन आप इसी आसन पर बैठकर पाठ करें। ये आसन घर का कोई अन्य सदस्य प्रयोग में न लाए।

  • अब अपने दाहिने हाथ में जल व पुष्प लेकर संकल्प लें कि आप ग्यारह दिन तक प्रतिदिन ग्यारह बार हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। जिस कामना को सिद्ध करने के लिए आप इस पाठ का आरंभ कर रहे हैं, उसे भी संकल्प लेने के दौरान दोहराएं,

  • हनुमान चालीसा का पाठ के प्रारंभ एवं समापन के समय अनजाने में होने वाली किसी भी भूल के लिए हनुमान जी से क्षमा-प्रार्थना करें।

  • हनुमान चालीसा का पाठ करने से पूर्व उनकी तस्वीर या मूर्ति को गंगाजल से पवित्र करके उन्हें तुलसी की माला या जनेऊ अवश्य अर्पित करें। साथ ही उन्हें लाल पुष्प व भोग भी लगाएं।

  • हनुमान चालीसा का पाठ प्रारंभ करने से पूर्व चमेली के तेल या शुद्ध घी का दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। ये दीपक चालीसा पाठ पूर्ण होने तक जलते रहना चाहिए।

  • हनुमान चालीसा का पाठ करते समय ध्यान रहे कि आपका स्वर मध्यम हो, और उच्चारण शुद्ध हो।

  • हनुमान चालीसा के पाठ के दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि स्त्रियां हनुमान चालीसा का पाठ कर रही हैं, तो ध्यान रहे कि संकल्प के ग्यारह दिनों के दौरान वो पूर्ण रूप से शुद्ध हों।

  • हनुमान चालीसा का पाठ आप निष्काम भाव से भी कर सकते हैं, यानि जब आपके ऊपर कोई संकट न हो, या कुछ पाने की लालसा न हो, तो भी आप हनुमान चालीसा का पाठ करें। इससे भविष्य में आने वाले संकट भी टल जाते हैं और आप पर परिवार सहित हनुमान जी का आशीर्वाद बना रहता है।

भक्तों, यदि आप हनुमान चालीसा का पाठ करते समय इन बातों का ध्यान रखेंगे तो आपको बजरंग बली जी की कृपा अवश्य प्राप्त होगी।

हनुमान जयंती के दिन क्या करना चाहिए क्या नहीं

भक्तों जब भी हम मनुष्यों पर कोई विपदा आई है तो सबसे पहले हम संकट मोचन हनुमान जी का ही सुमिरन करते हैं उनके सुमिरन मंत्र से ही साड़ी पीड़ा और संकट समाप्त हो जाते हैं तभी तो कहा गया है की संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमरे हनुमत बलबीरा

दोस्तों हनुमान जयंती के अवसर पर आज हम जानेंगे की हनुमान जयंती पर बजरंगबली का सुमिरन करते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखें? क्या सावधानियां बरतें? चलिए जानते हैं -

हनुमान जयंती पर क्या करना चाहिए?

  • हनुमान जयंती के अवसर पर ब्रह्मचर्य का पालनपुर अवश्य करें।
  • हनुमान जयंती के अवसर पर पूरे दिन बजरंगबली का ध्यान करें। इस दिन मास मदिरा का सेवन बिलकुल भी ना करें, शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
  • यदि घर में हनुमान जी की टूटी तस्वीर या मूर्ति है तो आदर पूर्वक उसे जल में प्रवाहित कर दें, खंडित मूर्ति की पूजा ना करें।
  • बजरंगबली की पूजा करते समय लाल भगवा या पीले रंग के वस्त्र ही धरण करें
  • भोग में आप हनुमान जी को चैन की दाल, गुड, बूंदी के लड्डू, इमरती आदि का भोग अर्पित कर सकते हैं।

हनुमान जयंती पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • हनुमान जयंती की पूजा में भूल कर भी सफेद या काले रंग के वस्त्र ना पहने।
  • ध्यान रहे की हनुमान जी को कभी भी चरणामृत का भोग ना लगाएँ, इससे वो रुष्ट हो जाते हैं
  • हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं इसलिए स्त्रियां उनकी पूजा करते समय उन्हें स्पर्श ना करें, दूर से ही उनकी आराधना कर ले। स्त्रियां कभी भी हनुमान जी को वस्त्र, जनेउ, चोला आदि अर्पित ना करें, यह सब आप घर के किसी पुरुष के हाथों चढ़वा सकते हैं।
  • हनुमान जयंती के दिन यदि आप व्रत का अनुष्ठान कर रहे हैं तो इस दिन व्रत आहार में नमक का सेवन बिल्कुल ना करें।
  • यदि आपके कुटुंब में किसी का देहांत हो गया है एवं सूतक चल रहा है तो हनुमान जयंती का व्रत या पूजा ना करें। सूतक के समय आप अशुद्ध होते हैं इसलिए 13 दोनों तक किसी की भी पूजा पाठ में हिस्सा ना लें।

तो भक्तों यह तो थी हनुमान जयंती पर पूजा पाठ के दौरान बरती जानें वाली सावधानियों से जुड़ी पूरी जानकारी।

हनुमान जयंती के दिन करे यह 5 सरल उपाय, मिलेंगे चमत्कारी फल

भक्तों नमस्कार! श्री मंदिर पर आपका स्वागत है। हनुमान जयंती का पर्व बजरंगबली के भक्तों के लिए अत्यंत विशेष होता है। इस दिन वो विधि विधान से हनुमान जी की उपासना करते हैं, और स्वयं को समस्त संकटों से उबारने की कामना करते हैं। आज हम आपको बता रहे ऐसे 5 विशेष उपाय, जिन्हे करके आप इस हनुमान जयंती पर बजरंगबली की संपूर्ण कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

चलिए जानते हैं,

हनुमान जयंती पर किए जाने वाले 5 विशेष उपाय

संकटों से मुक्ति के लिए - हनुमान जयंती के दिन किसी पास के हनुमान मंदिर में जाएं और बजरंग बली के दर्शन करें। इसके पश्चात् ग्यारह बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से हनुमान जी अति शीघ्र प्रसन्न होंगे, और आपको जीवन के समस्त संकटों से मुक्ति मिलेगी।

आर्थिक उन्नति के लिए - यदि आपकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, तो इस दिन हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली की प्रतिमा के सामने चमेली के तेल का दीप प्रज्जवलित करें, साथ ही हनुमान जी को सिंदूर लगाकर चोला अर्पित करें।

धन हानि से सुरक्षा के लिए - यदि आप अपव्यय या अधिक धन हानि से बचना चाहते हैं, तो हनुमान जयंती के अवसर पर पीपल की पत्तियों पर श्रीराम का नाम लिखें, और इसे बजरंगबली को अर्पित करें। कहा जाता है कि इससे धनहानि की समस्या दूर होती है।

कष्टों से रक्षा हेतु - हनुमान जन्मोत्सव के दिन बजरंग बली को पान का बीड़ा बनवाकर अर्पित करें। ऐसा करने से हनुमान जी अति शीघ्र प्रसन्न होते हैं, और आपके सभी कष्टों का निवारण करते हैं।

हनुमत कृपा पाने के लिए - हनुमान जयंती के अवसर पर बजरंग बली की कृपा प्राप्त करने के लिए उन्हें गुलाब के पुष्प की माला अर्पित करें। हनुमान जी को प्रसन्न करने एवं उनका आशीर्वाद पाने के लिए यह सबसे सरल उपाय है।

तो भक्तों, ये तो थी हनुमान जयंती पर किए जाने वाले 5 विशेष उपाय। हमारी कामना है कि आपकी हनुमान जयंती की पूजा सफल हो, और बजरंगबली की कृपा आप पर आजीवन बनी रहे।

हनुमान जन्मोत्सव पर जपें ये विशेष मंत्र

ऐसी मान्यता है कि हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर जो भक्त हनुमान जी का ध्यान करते हैं, और उनके मंत्रों का जाप करते हैं, उन पर बजरंगबली की विशेष कृपा हमेशा बनी रहती है। साथ ही उनके जीवन के समस्त संकट और परेशानियां भी समाप्त हो जाती हैं।

इस लेख में हम जानेंगे

  • श्री हनुमान मूल मंत्र, अर्थ और उसके लाभ।
  • रुद्र हनुमान मंत्र, अर्थ और उसके लाभ।
  • हनुमान गायत्री मंत्र, अर्थ और उसके लाभ।
  • हनुमान जी की आरती

श्री हनुमान मूल मंत्र

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ॐ ऐं ह्रीं हनुमते श्री रामदूताय नमः

मंत्र का अर्थ: सभी लोगों के संकटों को करने वाले, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के दूत वीर हनुमान को हमारा नमस्कार है। वे हम सभी की रक्षा करें और संकटों से मुक्ति प्रदान करें। मंत्र का लाभ: इस मंत्र से मन का भय दूर हो आत्मविश्वास और भक्ति की प्राप्ति होती है |

रुद्र हनुमान मंत्र

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ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा

मंत्र का अर्थ: हे हनुमान आप रूद्र के अवतार हो और रामदूत हो | हमारे सर्व शत्रु का नाश कीजिए, आपकी कृपा दृष्टि से सर्व रोगों का हरण कीजिए, हे राम दूत हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आपकी कृपा से हमारे सभी कार्य में सफलता और कीर्ति प्राप्त हो। हे संकटमोचन देव हम आपको प्रणाम करते हैं।

मंत्र का लाभ: इस मंत्र के पठन से, मनुष्य को सर्व रोगों से मुक्ति मिलती है तथा सभी शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है। हनुमान बुरे वक्त की मार से रक्षा कर, समय को अनुकूल, सुख-समृद्ध भी कर देते हैं।

हनुमान गायत्री मंत्र

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ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्

मंत्र का अर्थ: श्री अंजना और पवन देव के पुत्र, विशेष बुद्धि के धारक श्री वीर हनुमान हम पर आपकी दया दृष्टि बनाए रखें एवं हमें अपनी शरण प्रदान करें। मंत्र का लाभ: इस मंत्र के जाप से भय का नाश, मानसिक शांति मिलती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

हनुमान जी की आरती

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे । रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

लंका जारि असुर संहारे । सियाराम जी के काज सँवारे ॥

लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे । लाये संजिवन प्राण उबारे ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे । अहिरावण की भुजा उखारे ॥

बाईं भुजा असुर दल मारे । दाहिने भुजा संतजन तारे ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें । जय जय जय हनुमान उचारें ॥

कंचन थार कपूर लौ छाई । आरती करत अंजना माई ॥\

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे । बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥

लंक विध्वंस किये रघुराई । तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।

दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

तो भक्तों ये थे हनुमान जी के चमत्कारी मंत्र एवं आरती। हनुमान जयंती के अवसर पर आप इन मंत्रों का पाठ अवश्य करें। बजरंग बली प्रसन्न होकर आपकी समस्त मनोकामना पूर्ण करेंगे।

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Published by Sri Mandir·March 17, 2025

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