आंध्र प्रदेश के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
आंध्र प्रदेश, भारत का एक ऐसा राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। तिरुपति बालाजी मंदिर, जहाँ भक्तों की अपार श्रद्धा उमड़ती है, से लेकर श्रीशैलम के पवित्र ज्योतिर्लिंग तक, यहां के हर मंदिर की अपनी अनूठी धार्मिक और ऐतिहासिक विशेषता है। आइए जानते हैं आंध्र प्रदेश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में।
विजयवाड़ा का कनक दुर्गा मंदिर आंध्र प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित मंदिरों में से एक है। यह मंदिर देवी दुर्गा के कनक रूप को समर्पित है और इसे विजयवाड़ा की संरक्षक देवी माना जाता है। मंदिर इंद्रकीलाद्री पहाड़ी पर स्थित है, जो कृष्णा नदी के किनारे पर स्थित है। इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व अत्यधिक है।
पौराणिक कथा
कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने यहीं महिषासुर का वध किया था और वह यहीं निवास करती हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, अर्जुन ने यहां देवी दुर्गा की तपस्या की थी और उनसे पाशुपतास्त्र प्राप्त किया था। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा और आयोजन होते हैं, जिसमें हजारों भक्त शामिल होते हैं।
विशेषता
यह मंदिर प्राचीन और आधुनिक वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। यहां के गोपुरम और अन्य निर्माण भारतीय स्थापत्य कला के बेहतरीन उदाहरण हैं। मंदिर की दिव्य शक्ति और शांत वातावरण भक्तों के लिए अत्यधिक आकर्षक हैं।
स्थान: अर्जुन स्ट्रीट, इंद्रकीलाद्री, विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश
श्रीशैलम स्थित श्री मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती के पूजा स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे 18 शक्तिपीठों में भी शामिल किया जाता है। यहां भगवान शिव मल्लिकार्जुन स्वरूप में और देवी पार्वती ब्रह्मराम्बा रूप में पूजित हैं। यह मंदिर नल्लामाला पहाड़ियों में स्थित है और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है।
पौराणिक कथा
कहा जाता है कि जब भगवान कार्तिकेय नाराज होकर दक्षिण की ओर चल पड़े थे, तब शिव और पार्वती उनसे मिलने श्रीशैलम आए थे। इस मंदिर में शिव और शक्ति की संयुक्त पूजा होती है, जो भक्तों के लिए एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रस्तुत करती है।
विशेषता
यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण भक्तों को आकर्षित करता है। यहां महाशिवरात्रि के दौरान विशेष आयोजन होते हैं, जब मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और पूजा की जाती है।
स्थान: श्रीशैलम, नल्लामाला पहाड़ियाँ, आंध्र प्रदेश
लेपाक्षी का वीरभद्र मंदिर, विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य कला का अद्वितीय नमूना है। यह मंदिर भगवान शिव के वीरभद्र रूप को समर्पित है। मंदिर का सबसे आकर्षक हिस्सा यहां स्थित विशाल नंदी प्रतिमा है, जो एक ही ग्रेनाइट पत्थर से बनी है। इस मंदिर में रामायण, महाभारत और पुराणों से संबंधित घटनाओं को दर्शाने वाली नक्काशियां भी देखने को मिलती हैं।
पौराणिक कथा
यह स्थान भगवान शिव से जुड़ी एक पुरानी कथा से संबंधित है, जहां भगवान शिव ने वीरभद्र रूप में प्रकट होकर राक्षसों का संहार किया। इस मंदिर में "हैंगिंग पिलर" नामक स्तंभ भी है, जो भारतीय स्थापत्य कला के रहस्यमय पहलू को दर्शाता है।
विशेषता
मंदिर की वास्तुकला और यहां के अद्भुत नक्काशी और पिलर भारतीय स्थापत्य कला के बेहतरीन उदाहरण हैं। यह मंदिर दर्शन के अलावा स्थापत्य कला के शौक़ीन लोगों के लिए भी एक आकर्षण का केंद्र है।
स्थान: लेपाक्षी, अनंतपुर जिला, आंध्र प्रदेश
तिरुपति का वेंकटेश्वर मंदिर न केवल आंध्र प्रदेश, बल्कि पूरे भारत का सबसे प्रसिद्ध मंदिर है। यह भगवान वेंकटेश्वर, जो भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, को समर्पित है। तिरुमला की सात पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर धार्मिक और आस्थात्मक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु आते हैं।
पौराणिक कथा
यह मंदिर भगवान विष्णु के वेंकटेश्वर रूप को समर्पित है, जिन्होंने तिरुमला पहाड़ियों पर आकर भक्तों को आशीर्वाद दिया। यह मंदिर भारतीय हिन्दू धर्म के एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है और भक्तों का विश्वास है कि यहां दर्शन से जीवन में समृद्धि और सुख-शांति प्राप्त होती है।
विशेषता
मंदिर की वास्तुकला द्रविड़ शैली में है और यहां के सोने से बने गोपुरम और गर्भगृह का डिज़ाइन अत्यधिक भव्य और आकर्षक है। यह मंदिर दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में से एक है और यह भारत के 108 दिव्य देशमों में से एक है।
स्थान: तिरुमला, तिरुपति, चित्तूर जिला, आंध्र प्रदेश
कुर्नूल जिले के अहोबिलम स्थित नरसिंहस्वामी मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को समर्पित है। यह मंदिर 108 दिव्य देशमों में से एक है और यहां भगवान नरसिंह के नौ रूपों की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान नरसिंह ने यहीं हिरण्यकश्यप का वध किया था।
विशेषता
मंदिर परिसर में स्थित "उग्र स्तंभ" वह स्थान माना जाता है जहां भगवान नरसिंह प्रकट हुए थे। इस स्थान का प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण भक्तों को एक अद्भुत अनुभव प्रदान करते हैं।
स्थान: अहोबिलम, कुर्नूल जिला, आंध्र प्रदेश
विशाखापत्तनम में स्थित सिंहाचलम मंदिर भगवान नरसिंह और वराह अवतारों को समर्पित है। यह मंदिर ओडिशा, चालुक्य और चोल शैली के मिश्रण में निर्मित है और इसका वास्तुशिल्प अत्यधिक आकर्षक है। यहां की मूर्ति केवल एक बार, अक्षय तृतीया के दिन, दर्शन के लिए खुलती है, और शेष समय इसे चंदन के लेप से ढका जाता है।
विशेषता
यह मंदिर अपनी विशिष्ट वास्तुकला और धार्मिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है। यहां का वातावरण अत्यधिक शांत और दिव्य है, जो भक्तों को एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
स्थान: सिंहाचलम पहाड़ी, विशाखापत्तनम, आंध्र प्रदेश
श्रीशैलम स्थित ब्रह्मराम्बा देवी मंदिर देवी शक्ति को समर्पित है और इसे 18 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में देवी की मूर्ति अत्यधिक पवित्र मानी जाती है और यह स्थान शांति और भक्ति का प्रतीक है।
विशेषता
यह मंदिर भगवान शिव के मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर के पास स्थित है और दोनों मंदिरों में शिव और शक्ति की पूजा एक साथ की जाती है। यह स्थान भक्तों के लिए अत्यधिक आस्थात्मक और धार्मिक महत्व रखता है।
स्थान: श्रीशैलम, नल्लामाला पहाड़ियाँ, आंध्र प्रदेश
कनिपकम विनायक मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और यह मंदिर 11वीं शताब्दी में चोल राजा कुलोथुंगा द्वारा बनवाया गया था। यहां की गणेश प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि यह प्रतिवर्ष बढ़ती जाती है। यह मंदिर जल स्रोत के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसे पवित्र और रोगनाशक माना जाता है।
विशेषता
यह मंदिर अपनी अद्भुत मूर्ति और जल स्रोत के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में स्थित गणेश की मूर्ति अपने आप में एक अद्वितीय चमत्कारी तत्व प्रस्तुत करती है।
स्थान: कनिपकम, चित्तूर जिला, आंध्र प्रदेश
तिरुपति के पास स्थित यह मंदिर देवी पद्मावती को समर्पित है, जो भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी के रूप में प्रसिद्ध हैं। यह मंदिर विशेष रूप से नवरात्रि और दीपावली के समय होने वाले उत्सवों के लिए प्रसिद्ध है।
विशेषता
यह मंदिर आध्यात्मिक शांति का प्रतीक है और यहां भक्तों के लिए दिव्य अनुभव होता है। मंदिर की भव्यता और आस्था इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बनाती है।
स्थान: तिरुचानूर, तिरुपति, आंध्र प्रदेश
गुंटूर जिले के मंगलागिरी में स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के नरसिंह रूप को समर्पित है। यहां के चमत्कारी "पानकं" का विशेष उल्लेख है, जिसमें भगवान के मुख से शरबत बाहर आता है, जिसे भक्त चमत्कारी मानते हैं।
विशेषता
मंदिर की चमत्कारी विशेषताएं और पहाड़ी की चोटी से दृश्य इसे एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल बनाती हैं।
स्थान: मंगलागिरी, गुंटूर जिला, आंध्र प्रदेश
नेल्लोर स्थित श्री रंगनाथस्वामी मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और यह पेनना नदी के किनारे स्थित है। मंदिर की स्थापत्य कला और गोपुरम अत्यधिक आकर्षक हैं।
विशेषता
यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है और यहां विशेष रूप से मकर संक्रांति और ब्रह्मोत्सव के दौरान आयोजन होते हैं।
स्थान: नेल्लोर, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला और सांस्कृतिक धरोहर की अनमोल धरोहर भी हैं। इन मंदिरों की यात्रा आत्मिक शांति, वास्तुकला की भव्यता और पौराणिक कथाओं की रोमांचक दुनिया से परिचय कराती है। यदि आप कभी आंध्र प्रदेश जाएं, तो इन पवित्र स्थलों की यात्रा अवश्य करें और भारतीय आध्यात्मिकता के इस समृद्ध अनुभव का हिस्सा बनें।
ऐसे ही रोचक लेख, धर्म और आस्था की जानकारी, मंदिरों के इतिहास और पौराणिक कथाओं से जुड़े किस्सों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। हम आपके लिए श्री मंदिर से जुड़ी ऐसी ही ज्ञानवर्धक और दिलचस्प जानकारी लाते रहेंगे।
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