कर्नाटक के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
कर्नाटक, जो अपनी समृद्ध संस्कृति और भव्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। चाहे बात हो बेलूर-हलेबिडु के होयसला मंदिरों की, या फिर श्रृंगेरी शारदा पीठ और उडुपी कृष्ण मंदिर की, हर एक स्थल भक्तों और इतिहास प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इस लेख में हम कर्नाटक के 11 ऐसे प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में जानेंगे।
हम्पी का विरुपाक्ष मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह कर्नाटक के सबसे ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। यह मंदिर यूनेस्को द्वारा संरक्षित विश्व धरोहर स्थल का हिस्सा है। इसका निर्माण 7वीं शताब्दी में हुआ था, लेकिन विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने इसे और भी भव्य बनाया। मंदिर की स्थापत्य कला द्रविड़ शैली की उत्कृष्ट मिसाल है, और इसका 160 फीट ऊँचा गोपुरम दूर से ही श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर में देवी पंपा की भी पूजा की जाती है, जिन्हें भगवान शिव की पत्नी माना जाता है।
इस मंदिर तक पहुँचने के लिए आपको पहले हम्पी पहुँचना होगा। हम्पी का निकटतम रेलवे स्टेशन होस्पेट जंक्शन है, जो यहाँ से लगभग 13 किलोमीटर दूर स्थित है। होस्पेट से हम्पी तक बस और टैक्सी सेवाएँ आसानी से उपलब्ध हैं। अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं, तो निकटतम हवाई अड्डा हुबली हवाई अड्डा है, जो 165 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर के दर्शन के लिए सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक का समय निर्धारित है।
बेलूर स्थित चेन्नाकेशव मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और यह होयसला राजवंश की स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में राजा विष्णुवर्धन ने करवाया था। मंदिर के बाहरी और भीतरी भाग में हजारों उत्कृष्ट नक्काशियों से सजी मूर्तियाँ हैं, जो रामायण, महाभारत और पुराणों की कथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। मंदिर का गर्भगृह और विशाल मंडप अपनी जटिल नक्काशी के लिए प्रसिद्ध हैं।
यह मंदिर बेलूर में स्थित है, जो हासन से लगभग 38 किलोमीटर दूर है। यहाँ तक पहुँचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हासन जंक्शन है। हासन से बेलूर के लिए नियमित बस और टैक्सी सेवाएँ उपलब्ध हैं। अगर आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं, तो निकटतम हवाई अड्डा मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो यहाँ से 168 किलोमीटर दूर है। मंदिर में दर्शन का समय सुबह 7:30 बजे से रात 9:00 बजे तक निर्धारित है।
होयसलेश्वर मंदिर हलेबिडु में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर 12वीं शताब्दी में होयसला राजा विष्णुवर्धन ने बनवाया था। यह एक द्वैत मंदिर है, जहाँ दो गर्भगृह हैं और दोनों में शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों पर रामायण और महाभारत के दृश्य उकेरे गए हैं, जो इसे कला प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाते हैं।
इस मंदिर की यात्रा के लिए आपको पहले हलेबिडु पहुँचना होगा, जो हासन जिले में स्थित है। हलेबिडु का निकटतम रेलवे स्टेशन हासन जंक्शन है, जो यहाँ से 31 किलोमीटर दूर है। हासन से हलेबिडु के लिए टैक्सी और बस सेवाएँ आसानी से मिल जाती हैं। मंदिर में दर्शन का समय सुबह 9:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित है।
अरब सागर के किनारे स्थित मुरुदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यहाँ भगवान शिव की विश्व की दूसरी सबसे ऊँची प्रतिमा (123 फीट) स्थित है। इस मंदिर का संबंध रामायण से भी जोड़ा जाता है। यहाँ का 20 मंजिला गोपुरम और समुद्र तट के किनारे स्थित शिव प्रतिमा इसे एक अनोखा धार्मिक और पर्यटन स्थल बनाते हैं।
मुरुदेश्वर मंदिर तक पहुँचने के लिए आपको पहले मुरुदेश्वर पहुँचना होगा, जो भटकल जिले में स्थित है। यहाँ का निकटतम रेलवे स्टेशन मुरुदेश्वर रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से केवल 2 किलोमीटर दूर है। हवाई मार्ग से यात्रा करने वालों के लिए मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे निकटतम विकल्प है, जो लगभग 153 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर के दर्शन के लिए सुबह 3:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे और शाम 3:00 बजे से रात 8:00 बजे तक का समय निर्धारित है।
गोकर्ण स्थित महाबलेश्वर मंदिर भगवान शिव के आत्मलिंग को समर्पित है और इसे दक्षिण भारत का काशी भी कहा जाता है। यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसकी कथा भगवान गणेश द्वारा भगवान शिव के आत्मलिंग को यहाँ स्थापित करने से जुड़ी हुई है। यह मंदिर कर्नाटक के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है और समुद्र तट के किनारे स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।
गोकर्ण मंदिर तक पहुँचने के लिए आपको पहले गोकर्ण पहुँचना होगा, जो कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन गोकर्ण रोड रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। हवाई यात्रा के लिए मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नजदीक है, जो लगभग 238 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मंदिर में दर्शन सुबह 6:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे और शाम 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक किए जा सकते हैं।
कोल्लूर स्थित मूकाम्बिका मंदिर देवी शक्ति को समर्पित एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मंदिर की मान्यता के अनुसार, यहाँ आदि शंकराचार्य को देवी मूकाम्बिका का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था। मंदिर में माँ मूकाम्बिका की स्वर्ण प्रतिमा विराजमान है, जिसे अत्यंत दिव्य और शक्तिशाली माना जाता है। मंदिर के चारों ओर पश्चिमी घाट की हरी-भरी पहाड़ियाँ और सौंदर्य से भरपूर वातावरण इसे विशेष आकर्षण प्रदान करता है।
कोल्लूर का निकटतम रेलवे स्टेशन कुण्डापुरा रेलवे स्टेशन (35 किमी दूर) है। यहाँ से टैक्सी या बस के माध्यम से मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। यदि आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं, तो निकटतम हवाई अड्डा मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (140 किमी दूर) है। मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
भगवान मंजुनाथेश्वर को समर्पित यह मंदिर कर्नाटक के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा की जाती है, लेकिन विशेष बात यह है कि मंदिर का प्रबंधन जैन समुदाय के परिवार द्वारा किया जाता है। यहाँ प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं और अन्नदान (भोजन सेवा) भी इस मंदिर का एक मुख्य आकर्षण है।
निकटतम रेलवे स्टेशन मेंगलुरु जंक्शन रेलवे स्टेशन (74 किमी दूर) है। मंदिर तक पहुँचने के लिए टैक्सी और बस सेवाएँ उपलब्ध हैं। निकटतम हवाई अड्डा मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (65 किमी दूर) है। दर्शन का समय सुबह 6:15 बजे से रात 8:30 बजे तक है।
भगवान सुब्रमण्य (कार्तिकेय) को समर्पित यह मंदिर विशेष रूप से नाग दोष निवारण पूजा के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पश्चिमी घाट के घने जंगलों के बीच स्थित है, जिससे इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा और भी अधिक बढ़ जाती है। यहाँ नाग देवता की भी पूजा की जाती है, और ऐसी मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से सर्प दोष और अन्य ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन सुब्रमण्य रोड रेलवे स्टेशन (12 किमी दूर) है। यहाँ से बस या टैक्सी द्वारा मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (115 किमी दूर) है। मंदिर में दर्शन का समय सुबह 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
यह मंदिर देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है और यह मैसूर के चामुंडी हिल्स पर स्थित है। इस मंदिर को मैसूर के राजा विशेष रूप से पूजते थे, और आज भी यह मंदिर कर्नाटक के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ की देवी दुर्गा का रूप मानी जाती हैं, जिन्होंने महिषासुर नामक राक्षस का संहार किया था। मंदिर से मैसूर शहर का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन मैसूर जंक्शन (13 किमी दूर) है। यहाँ से बस या टैक्सी द्वारा मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा मैसूर हवाई अड्डा (20 किमी दूर) है। दर्शन का समय सुबह 7:30 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है और यहाँ भगवान की मूर्ति एक छोटी खिड़की से दर्शन के लिए रखी गई है। इस मंदिर की स्थापना संत माधवाचार्य ने 13वीं शताब्दी में की थी। मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहाँ भगवान कृष्ण के दर्शन एक छोटी-सी खिड़की से किए जाते हैं, जिसे "कन्हा कट्टी" कहा जाता है।
निकटतम रेलवे स्टेशन उडुपी रेलवे स्टेशन (3 किमी दूर) है। यहाँ से बस या टैक्सी द्वारा मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा मेंगलुरु अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (60 किमी दूर) है। दर्शन का समय सुबह 4:30 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
बनशंकरी अम्मा मंदिर देवी पार्वती के एक रूप, माँ बनशंकरी को समर्पित है। यह मंदिर 7वीं शताब्दी में चालुक्य राजाओं द्वारा बनवाया गया था और यह अपनी अनूठी द्रविड़ और नागर शैली की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। विशेष रूप से माघ मास में यहाँ भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।
निकटतम रेलवे स्टेशन बादामी रेलवे स्टेशन (5 किमी दूर) है। यहाँ से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक पहुँचा जा सकता है। निकटतम हवाई अड्डा हुबली हवाई अड्डा (110 किमी दूर) है। दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
कर्नाटक के इन मंदिरों की यात्रा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन मंदिरों की भव्य वास्तुकला, पौराणिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य इन्हें न केवल श्रद्धालुओं बल्कि इतिहास और कला प्रेमियों के लिए भी विशेष बनाता है। यदि आप आध्यात्मिक शांति की खोज में हैं या भारतीय संस्कृति की समृद्ध धरोहर को करीब से देखना चाहते हैं, तो कर्नाटक के इन मंदिरों की यात्रा अवश्य करें।
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