हिमाचल प्रदेश के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
हिमाचल प्रदेश, जिसे 'देवभूमि' कहा जाता है, अपने सुरम्य पहाड़ों और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। शक्तिपीठ नैना देवी से लेकर ज्वाला देवी के दिव्य ज्योतिर्लिंग तक, हर मंदिर का अपना विशेष महत्व है। मनाली का हिडिंबा देवी मंदिर हो या चामुंडा देवी का शक्तिस्थल, यहां की पवित्रता हर श्रद्धालु को आत्मिक शांति प्रदान करती है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे हिमाचल प्रदेश के 11 प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित ज्वालामुखी मंदिर हिन्दू धर्म के 52 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर माता ज्वालामुखी को समर्पित है, जिन्हें शक्ति का स्वरूप माना जाता है। यहाँ देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि धरती से से निकलती साक्षात नौ अखंड ज्योतियाँ माँ के दिव्य अस्तित्व का प्रतीक मानी जाती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, यह स्थान सती के जिह्वा अर्थात जीभ के गिरने से शक्तिपीठ बना। सदियों से ये 9 ज्योतियां बिना किसी स्रोत के जल रही हैं, जिसे विज्ञान भी स्पष्ट नहीं कर सका। कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर ने इन ज्योतियों को बुझाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहा। प्रतिवर्ष नवरात्रि के दौरान यहाँ देशभर से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। ज्वालामुखी मंदिर आस्था और दिव्यता का अद्भुत केंद्र है, जहाँ भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती है।
नैना देवी मंदिर हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित एक अद्भुत शक्तिपीठ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां देवी सती का बायां नेत्र गिरा था। सुंदर पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर लाखों भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। कहते हैं, इस मंदिर में माता नैना देवी स्वयं विराजमान हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। मंदिर के समीप गोविंद सागर झील और भाखड़ा नांगल बांध भी हैं, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दर्शनीय स्थल है।
चिंतपूर्णी माता का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जिसे चिंतामणि माता के नाम से भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार यहां माता सती का सिर गिरा था, जिससे यह स्थान अत्यधिक पवित्र माना जाता है। हर वर्ष यहां चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ मास के नवरात्रि में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें देशभर से लाखों श्रद्धालु आते हैं। ये श्रद्धालु माता चिंतपूर्णी को लाल चुनरी, और नारियल का भोग अर्पित करते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए माथा टेकते हैं।
यह मंदिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के जाखू पहाड़ी पर स्थित है और भगवान हनुमान को समर्पित है। यहाँ हनुमानजी की 108 फीट ऊँची प्रतिमा स्थित है, जो पूरे शिमला शहर से देखी जा सकती है। मान्यता है कि संजीवनी बूटी लाते समय हनुमानजी ने इस स्थान पर विश्राम किया था।
बाबा बालकनाथ जी का यह मंदिर हमीरपुर जिले के दियोटसिद्ध नामक क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के प्रांतों में रहने वाले भक्तों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, विशेषकर उन जोड़ों के लिए जो संतान प्राप्ति की कामना करते हैं। कहा जाता है कि जो सच्चे मन से यहाँ बाबा बालकनाथ जी की पूजा करते हैं, उन्हें अवश्य संतान की प्राप्ति होती है। यहां के इतिहास के अनुसार बाबा बालकनाथ भगवान दत्तात्रेय के शिष्य थे। इस मंदिर में बाबाजी की वेदी पर रोट का प्रसाद चढ़ाया जाता है। रोट एक हिमाचली पकवान है जिसे आटे और चीनी या गुड को घी में मिलाकर बनाया जाता है। यहाँ पर बकरा भी चढ़ाया जाता है, लेकिन बकरे की बलि नहीं दी जाती बल्कि उनका पालन पोषण किया जाता है।
सराहन में स्थित भीमाकाली मंदिर किन्नौर क्षेत्र का प्रवेश द्वार भी माना जाता है। इस मंदिर की वास्तुकला हिंदू और बौद्ध शैली का मिश्रण है और इस का निर्माण देवदार की लकड़ियों से किया गया है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है। यह मंदिर देवी भीमाकाली को समर्पित है, जिन्हें माता के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां माँ सती का कान गिरा था।
मनाली के घने देवदार के जंगलों में स्थित हिडिंबा मंदिर, महाभारत काल की हिडिंबा देवी को समर्पित है। हिडिंबा देवी 5 पांडवों में द्वितीय, भीम की पत्नी और घटोत्कच की माता थीं। इस मंदिर की लकड़ियों से बनी संरचना और प्राकृतिक वातावरण इसे विशेष बनाते हैं। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार यह मंदिर 1553 में बनाया गया था और इसका पैगोडा रुपी स्थापत्य अद्वितीय है। यहां के स्थानीय निवासी इसे धुंगरी मंदिर के नाम से भी जानते हैं।
मणिकर्ण साहिब गुरुद्वारा एक ऐसा धार्मिक स्थल है जो हिंदू और सिख समुदाय, दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि यहाँ गुरु नानक देव जी ने ध्यान लगाया था। यह कुल्लू जिले में पार्वती नदी के किनारे स्थित है। इस गुरूद्वारे के प्रांगण में कई मंदिर हैं, जिनमें भगवान राम, कृष्ण, विष्णु जी और देवी भगवती की प्रतिमा स्थापित हैं। यहाँ स्थित गर्म पानी के कुंडों को अत्यंत पवित्र माना जाता है,साथ ही इस जल का तापमान हर मौसम में एक जैसा रहता है, और कहते हैं कि यदि इस पानी से चाय बनाई जाए, तो जरूरत से आधी चीनी डालकर भी चाय दो गुना मीठी हो जाती है। इसका कारण जनमानस के लिए एक रहस्य है।
त्रिलोकनाथ मंदिर लाहौल-स्पीति जिले में स्थित है और हिंदू तथा बौद्ध समुदाय दोनों के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव और बोधिसत्व अवलोकितेश्वर को समर्पित है, और इसे 'टुंडा विहार' भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में हुआ था और यहां की वास्तुकला और भव्यता इसे एक अद्वितीय स्थान बनाती है। यहां हर वर्ष अगस्त में पौड़ी महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें हिन्दू और बौद्ध दोनों ही समुदायों के श्रद्धालु शामिल होते हैं।
बिजली महादेव मंदिर कुल्लू जिले में स्थित है तथा भगवान शिव को समर्पित है। कहा जाता है कि यहां हर 12 वर्षों में इस मंदिर के शिवलिंग पर बिजली गिरती है, जिससे मंदिर का शिवलिंग खंडित हो जाता है। इस घटना का आज भी एक रहस्य है। बिजली के वेग से खंडित हुए शिवलिंग के हर टुकड़ों को इकट्ठा करके यहां के पंडित उन्हें अनाज और दाल के आटे में मक्खन मिलाकर बनाए गए एक घोल से जोड़ते हैं। यह घटना लोगों के लिए आज भी श्रद्धा और आश्चर्य प्रतीक बनी हुई है।
यह मंदिर मंडी जिले में स्थित है और इसे एक रहस्यमयी स्थान माना जाता है। यह मंदिर कमरूनाग देवता को समर्पित है और यहाँ एक झील भी स्थित है, जहाँ भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए आभूषण और सिक्के अर्पित करते हैं। यह झील इतनी गहरी है कि इसके तल में जमा सोने-चांदी का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। माना जाता है कि आज भी यक्षगण पृथ्वी में छिपे धन की रक्षा कर रहे है हैं, और कमरूनाग यक्ष का प्रमुख निवास स्थान हैं। यहां के स्थानीय लोग कमरुनाग देवता को बारिश के देवता के रूप में पूजते हैं।
हिमाचल प्रदेश के ये 11 मंदिर धार्मिक महत्व के साथ ही अपनी अद्वितीय वास्तुकला, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इनमें से कई मंदिरों का रहस्य आज भी कोई नहीं सुलझा सका। यह पूरा राज्य ही श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्रदान करता है। यदि आप हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर हैं, तो इन मंदिरों के दर्शन अवश्य करें, एवं ऐसी ही अन्य रोचक और धार्मिक जानकारियों के लिए बने रहिये श्री मंदिर के साथ।
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