झारखंड के प्रसिद्ध मंदिर
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झारखंड के प्रसिद्ध मंदिर

झारखंड के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें

झारखंड के प्रसिद्ध मंदिर के बारे में

झारखंड में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनमें बैद्यनाथ धाम (देवघर) सबसे महत्वपूर्ण है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। रजरप्पा मंदिर माँ छिन्नमस्तिका को समर्पित है। अंगारेश्वर धाम, सूर्य मंदिर (रांची), पारसनाथ जैन मंदिर, पंचघाघ महादेव मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भक्तों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। आइये जानते हैं ऐसे ही कुछ प्रसिद्द मंदिरों के बारे में...

झारखंड के 11 प्रसिद्ध मंदिर

झारखण्ड हमारे देश का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रदेश है, जिसे वनों की भूमि भी कहा जाता है। यह न केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य और खनिज संसाधनों के लिए, बल्कि अपने प्राचीन मंदिरों और इनके आध्यात्मिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है। इस राज्य के मंदिर धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, और इनकी स्थापत्य कला, ऐतिहासिक महत्व और लोककथाएँ इन्हें और भी विशेष बनाती हैं। झारखंड के सैकड़ों मंदिरों में से यहां हम 11 प्रसिद्ध मंदिरों का विस्तार से वर्णन करेंगे।

झारखंड के 11 प्रसिद्ध मंदिर: जानें इतिहास एवं उनकी विशेषताओं के बारे में

बैद्यनाथ धाम, देवघर

स्थान: देवघर, झारखंड विशेषता: बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक

बैद्यनाथ धाम मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसे बाबा बैद्यनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इसका महत्व बहुत ज्यादा है, क्योंकि यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इसे 'कामना लिंग' भी कहा जाता है, क्योंकि मान्यता है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। यहां हर साल श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा के दौरान गंगाजल चढ़ाने आते हैं। इस मंदिर से कई पौराणिक कथाएँ जुड़ी हुई हैं, जिनमें रावण द्वारा भगवान शिव की उपासना का उल्लेख मिलता है।

पारसनाथ मंदिर, गिरिडीह

स्थान: गिरिडीह, झारखंड विशेषता: जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों से जुड़ा तीर्थ स्थल

पारसनाथ पहाड़ी झारखंड की सबसे ऊँची चोटी है और यह जैन धर्म के लिए एक पवित्र स्थल मानी जाती है। इसे "सम्मेद शिखर" के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस जैन तीर्थ का निर्माण मगध राजा बिम्बिसार ने करवाया था।यहाँ जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने मोक्ष प्राप्त किया था। जैन श्रद्धालु यहां पैदल चढ़ाई करते हैं और विभिन्न जैन मंदिरों के दर्शन करते हैं।

राजरप्पा छिन्नमस्तिका मंदिर

स्थान: रामगढ़, झारखंड विशेषता: 51 शक्तिपीठों में से एक और तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र

छिन्नमस्तिका मंदिर देवी दुर्गा के छिन्नमस्तिका स्वरूप को समर्पित है। यह मंदिर अपनी तंत्र साधना से जुड़ी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है,इसलिए इसे माँ कामख्या के बाद दूसरा सबसे शक्तिशाली शक्तिपीठ माना जाता है। यहाँ देवी की प्रतिमा स्वयं का कटा हुआ मस्तक अपने हाथ में धारण किए हुए है, जिससे तीन धाराओं में रक्त प्रवाहित हो रहा है। इस मंदिर का आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व बहुत अधिक है और यहाँ सालभर श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए आते हैं।

मालूटी मंदिर, दुमका

स्थान: दुमका, झारखंड विशेषता: 108 प्राचीन मंदिरों का समूह

मालूटी गाँव अपने प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। इस गाँव में कुल 108 मंदिर थे, जिनमें से कुछ आज भी मौजूद हैं। मलूटी को तांत्रिकों का शक्तिपीठ भी कहा जाता क्योंकि गांव में मौलीक्षा मां का मंदिर है जो तारापीठ की मां तारा की बड़ी बहन के नाम से पुकारी जाती हैं। इन मंदिरों की स्थापत्य कला बंगाली और टेराकोटा शैली में बनी हुई है। ये मंदिर माँ दुर्गा, शिवजी, श्री हरि विष्णु और अन्य देवी-देवताओं को समर्पित हैं।

देवघर का नवलखा मंदिर

स्थान: देवघर, झारखंड विशेषता: राधा-कृष्ण को समर्पित और राजस्थान शैली में निर्मित

यह मंदिर राधा-कृष्ण को समर्पित है और इसकी वास्तुकला राजस्थान के मंदिरों से प्रेरित है। नौलखा मंदिर का निर्माण कोलकाता के पथुरियाघाटा के शाही बंगाली घोष परिवार की रानी चारुशिला ने करवाया था। यह मंदिर 146 फीट ऊँचा है और सफेद संगमरमर से बना हुआ है, जिससे यह अत्यंत भव्य प्रतीत होता है। मंदिर का निर्माण एक संत की प्रेरणा से हुआ था और यह देवघर में बैद्यनाथ मंदिर के पास स्थित है।

पंचघाघ शिव मंदिर, खूंटी

स्थान: खूंटी, झारखंड विशेषता: प्राकृतिक झरनों के समीप स्थित धार्मिक स्थल

खूंटी जिले में स्थित पंचघाघ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। इस मंदिर के पास पंचघाघ जलप्रपात बहता है, जिससे यह एक पर्यटन स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि के समय यहाँ भक्तों की भारी भीड़ लगती है। पंचघाघ शिव मंदिर एक स्वयंभू शिवलिंग की नियमित रूप से पूजा की जाती है। इस मंदिर को आम्रेश्वर धाम भी कहा जाता है क्योंकि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यहां शिव जी की पूजा आम के पत्तों से की जाती थी।

सूर्य मंदिर, रांची

स्थान: रांची, झारखंड विशेषता: 18 पहियों वाले रथ के आकार में निर्मित

रांची का सूर्य मंदिर एक भव्य तीर्थ है, जो सूर्य भगवान को समर्पित है। यह मंदिर एक विशाल रथ के आकार का बना हुआ है, जिसमें 18 पहिए और सात घोड़े हैं। यह झारखंड का एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है और इस मंदिर के परिसर में एक पवित्र तालाब है, यहां छठ पूजा के दौरान विशेष आयोजन किये जाते हैं।

टुंडी का शिव मंदिर, धनबाद

स्थान: धनबाद, झारखंड विशेषता: काशी विश्वनाथ के समान धार्मिक महत्व

टुंडी में स्थित यह शिव मंदिर अत्यंत प्राचीन है, जिसकी तुलना काशी विश्वनाथ मंदिर से की जाती है। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की हर मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। इस मंदिर को नंदा महादेव के नाम से भी जाना जाता है। यह धनबाद के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है और महाशिवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा आयोजित की जाती है।

मां भद्रकाली मंदिर, इटखोरी

स्थान: इटखोरी, चतरा, झारखंड विशेषता: हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म का संगम

इटखोरी का भद्रकाली मंदिर अत्यंत प्राचीन धार्मिक स्थल है, जहाँ देवी काली की पूजा की जाती है। यह तीर्थ स्थल तीन धर्मों का अनूठा संगम है। हिन्दुओं की मां भद्रकाली एवं जैन धर्मावलंबियों के दसवें तीर्थंकर स्वामी शीतलनाथ जी का जन्म स्थल भदलपुर भी यही है। जैन धर्मावलंबी इस मंदिर को भदुली माता का मंदिर भी कहते है। कहा जाता है कि गौतम बुद्ध ने यहाँ कुछ समय ध्यान किया था। मां भद्रकाली मंदिर के निकट एक शिव मंदिर है जिसमें 1,008 शिवलिंग सुशोभित हैं। यहां एक प्राचीन स्तूप है, जिसमें बोधिसत्वों की 104 छवियां हैं और इसके दोनों ओर गौतम बुद्ध के चार उपदेशों के शीलालेख हैं। साथ ही यह एक शिला है जिसके बारे में कहा जाता है कि इस पर जैन धर्म के 10वें तीर्थंकर शीतलनाथ के पैरों के निशान हैं।

देवड़ी मंदिर, तामार

स्थान: तामार, रांची, झारखंड विशेषता: मां दुर्गा के 16 भुजाओं वाले रूप को समर्पित

रांची से लगभग 60 किमी दूर तामार क्षेत्र में स्थित देवड़ी मंदिर, मां दुर्गा के 16 भुजाओं वाले रूप को समर्पित है, और माता की यह प्रतिमा 700 साल पुरानी है। यह मंदिर अपनी चमत्कारी मान्यताओं और रहस्यमय इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि यहां सच्चे मन से की गई हर मनोकामना अवश्य पूरी होती हैं। इस मंदिर परिसर में नवरात्रि के भक्तों का ताँता लगता है।

जगन्नाथ मंदिर, रांची

स्थान: रांची, झारखंड विशेषता: पुरी जगन्नाथ की प्रतीकात्मक संरचन

रांची में स्थित जगन्नाथ मंदिर, उड़ीसा के पुरी जगन्नाथ मंदिर की तर्ज पर बना है। यहां भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर की स्थापना 17वीं सदी में हुई थी और यह अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष रथ यात्रा के अवसर पर यहां भव्य समारोह आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

झारखंड के मंदिर जैसे कि बैद्यनाथ धाम से लेकर चिन्नमस्तिका मंदिर और पारसनाथ पहाड़ियों तक, यहां का धार्मिक परिदृश्य अत्यंत समृद्ध है। यदि आप आध्यात्मिक यात्रा पर जाना चाहते हैं, तो झारखंड के ये प्रसिद्ध 11 मंदिर आपके लिए सर्वोत्तम सिद्ध होंगे।

मंदिरों और धार्मिक स्थलों से संबंधित ऐसी ही विशेष जानकारियों के लिए जुड़े रहिये श्री मंदिर के साथ

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Published by Sri Mandir·March 18, 2025

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