महाराष्ट्र के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
महाराष्ट्र जो अपने प्राचीन और दिव्य मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। चाहे वह सिद्धिविनायक गणपति हो या अजंता-एलोरा की गुफाओं में बसा ग्रैंड कैलाश मंदिर, यहाँ हर मंदिर की अपनी-अलग कहानी है। तो आइए इस आर्टिकल में जानते हैं महाराष्ट्र के 11 ऐसे मंदिरों के बारे में जो अपनी खूबसूरती और भव्य कला के लिए मशहूर हैं।
अहमदनगर जिले में स्थित शनि शिंगणापुर मंदिर एक अद्वितीय स्थल है, जो भगवान शनि के लिए समर्पित है। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां के घरों में ताले नहीं लगाए जाते। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि शनि देव स्वयं हर घर की रक्षा करते हैं, जिससे यह गांव पूरी तरह से ताले से मुक्त रहता है।
पौराणिक कथा:
कहा जाता है कि एक दिन प्रवरा नदी में एक विशाल काला पत्थर बहता हुआ आया। जब स्थानीय लोगों ने इसे छुआ, तो उनके भीतर एक अलौकिक शक्ति का अनुभव हुआ। उसी रात भगवान शनि ने एक ग्रामीण को स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि वह इस पत्थर में निवास करते हैं और इस स्थान की रक्षा करेंगे। तभी से यह स्थान शनि देव का पवित्र धाम बन गया।
विशेषता:
यहां भगवान शनि की मूर्ति एक खुले स्थान में रखी गई है और श्रद्धालु तेल चढ़ाकर और प्रार्थना करके अपने जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त करते हैं। यहां का माहौल बहुत ही शांत और निहालित होता है, जो भक्तों को आत्मिक शांति का अहसास कराता है।स्थान: शिंगणापुर, अहमदनगर
औरंगाबाद जिले के वेरुल में स्थित घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव के पूजा स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है, और यहां पर श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा करके उनकी कृपा प्राप्त करते हैं। यह स्थान अपनी सुंदर वास्तुकला और पौराणिक कथाओं के कारण विशेष महत्व रखता है।
पौराणिक कथा:घुष्मा नामक एक भक्त महिला ने 101 शिवलिंगों की स्थापना की और लगातार उनकी पूजा की। जब उनके पुत्र की हत्या कर दी गई, तब भी उन्होंने अपनी भक्ति नहीं छोड़ी। भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हो गए और उनके पुत्र को पुनर्जीवित किया। शिव ने अपने दिव्य रूप में घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में यहां स्वयं को स्थापित किया।
विशेषता:मंदिर की संरचना लाल बलुआ पत्थर से बनी है और इसकी नक्काशी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है। इसके अलावा, यहां का वातावरण बेहद शांति से भरा हुआ है, जो श्रद्धालुओं को ध्यान और भक्ति में खो जाने के लिए प्रेरित करता है।स्थान: वेरुल, औरंगाबाद
मुंबई के प्रभादेवी में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर भगवान गणेश का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह मंदिर अपनी भव्यता और आकर्षण के कारण न केवल महाराष्ट्र बल्कि पूरे भारत से भक्तों को आकर्षित करता है।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि एक वृद्ध महिला ने संतान प्राप्ति की प्रार्थना करते हुए भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की थी। उनकी भक्ति के कारण भगवान गणेश उनकी संतान की इच्छा पूरी करने के लिए प्रकट हुए और मंदिर प्रसिद्ध हो गया।
विशेषता:यहां भगवान गणेश की मूर्ति की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है, जो इस मंदिर को अन्य गणेश मंदिरों से अलग बनाती है और इसे सिद्धपीठ का दर्जा देती है। इस मंदिर की धार्मिक स्थिति और संतान की इच्छा पूरी करने की मान्यता ने इसे न केवल मुंबई बल्कि पूरे देश में एक विशेष स्थान दिलाया है।स्थान: प्रभादेवी, मुंबई
त्र्यंबकेश्वर मंदिर नासिक जिले में स्थित एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह गोदावरी नदी के किनारे स्थित है, जो इसे और भी पवित्र बनाता है।
पौराणिक कथा:यह मंदिर महर्षि गौतम की तपस्या से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने गौतम ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर गोदावरी नदी का प्रकट्य किया और यहां पर त्र्यंबकेश्वर लिंग के रूप में स्वयं को स्थापित किया। मंदिर में तीन प्रमुख देवताओं की प्रतीकात्मक मूर्तियाँ हैं – ब्रह्मा, विष्णु, और महेश।
विशेषता:यहां हर 12 साल में कुंभ मेला आयोजित होता है, जो एक बड़ा धार्मिक आयोजन होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। यह स्थान भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का एक प्रतीक है, जहां श्रद्धालु संप्रदाय की बाधाओं से ऊपर उठकर पूजा करते हैं।स्थान: त्र्यंबकेश्वर, नासिक
गणपतिपुले मंदिर रत्नागिरी जिले में स्थित है और अरब सागर के किनारे स्थित होने के कारण यह अत्यधिक सुंदर और रमणीय है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि भगवान गणेश स्वयं समुद्र तट पर एक सफेद रेत में प्रकट हुए थे, और जब मछुआरों ने यह देखा तो उन्होंने इसे समुद्र तट पर स्थापित किया।
विशेषता:यहां भगवान गणेश की मूर्ति पश्चिम की ओर मुंह किए हुए है, जबकि अन्य मंदिरों में भगवान गणेश की मूर्ति पूर्व दिशा की ओर होती है। मंदिर का वातावरण बहुत ही शांत और सौम्य होता है, जो यहाँ आने वाले भक्तों को विश्राम और शांति प्रदान करता है।स्थान: गणपतिपुले, रत्नागिरी
भीमाशंकर मंदिर पुणे जिले में स्थित है और यह भी बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला में स्थित है और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक आदर्श स्थल है।
पौराणिक कथा:यहां भगवान शिव ने राक्षस भीम को पराजित किया था, जिससे यह स्थान भीमाशंकर के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
विशेषता:मंदिर के आसपास भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य स्थित है, जहां पर्यटक न केवल भगवान के दर्शन करते हैं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का भी अनुभव करते हैं। यहां की हरियाली और शांतिपूर्ण वातावरण के कारण यह स्थल एक आदर्श तीर्थ स्थल बन गया है।स्थान: भीमाशंकर, पुणे
एलोरा की गुफाओं में स्थित कैलाशनाथ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर एक ही पत्थर को काटकर निर्मित किया गया है और यह दुनिया की सबसे बड़ी मोनोलिथिक संरचना मानी जाती है।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि रानी एलोरा ने भगवान शिव से प्रार्थना की थी ताकि उनके पति का स्वास्थ्य ठीक हो सके। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया, जिसके बाद कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण हुआ।
विशेषता:यह मंदिर अपनी विशालता और अद्भुत शिल्प कला के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर वास्तुकला के प्रेमियों के लिए एक अद्वितीय उदाहरण है और इसका धार्मिक महत्व भी अत्यधिक है।स्थान: एलोरा, औरंगाबाद
कोल्हापुर में स्थित महालक्ष्मी मंदिर देवी लक्ष्मी को समर्पित है और यह 'अंबाबाई मंदिर' के नाम से भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर शक्ति पीठों में एक प्रमुख तीर्थस्थल है और नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा और उत्सव आयोजित होते हैं।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि देवी लक्ष्मी ने महिषासुर के वध के बाद कोल्हापुर में विश्राम किया, और तभी से यह स्थान उनके निवास स्थान के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
विशेषता:यह मंदिर शक्ति पीठों में से एक है और यहां नवरात्रि के दौरान बड़े धूमधाम से पूजा अर्चना होती है। मंदिर में देवी लक्ष्मी की अद्भुत मूर्ति स्थापित है, जो भक्तों को आशीर्वाद देती है।स्थान: कोल्हापुर
मोरेश्वर मंदिर पुणे जिले में स्थित है और यह अष्टविनायक यात्रा के पहले मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि एक राक्षस सिंधु ने तपस्या करके अमरत्व का वरदान प्राप्त किया था। वह पृथ्वी पर अत्याचार करने लगा। तब भगवान गणेश ने मोर की सवारी करते हुए उसका वध किया और इस स्थान पर पूजा स्थल की स्थापना हुई।
विशेषता:यहां भगवान गणेश की मूर्ति सिंदूरी रंग की है और इसके पीछे नागों की आकृति बनाई गई है। मंदिर के सौंदर्य और शांति ने इसे एक विशेष तीर्थ स्थल बना दिया है।स्थान: मोरेगांव, पुणे
वसई की पहाड़ियों में स्थित तुंगारेश्वर मंदिर शिव भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। यह मंदिर एक शांति और ध्यान का केंद्र है।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान शिव ने एक तपस्वी को दर्शन दिए थे और तपस्या से प्रसन्न होकर उन्होंने यह स्थान शिव को समर्पित कर दिया।
विशेषता:यह मंदिर शिवरात्रि के दिन भक्तों से भरा रहता है और यहां विशेष रूप से शिव भक्तों का ध्यान और पूजा होती है। यह स्थान अपनी शांति और आंतरिक सुख के लिए प्रसिद्ध है।स्थान: वसई, मुंबई
पंढरपुर विठोबा मंदिर, भगवान विष्णु और रुक्मिणी देवी को समर्पित है और यह महाराष्ट्र के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक है।
पौराणिक कथा:कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने अपने भक्त पुंडलिक की सेवा भावना से प्रसन्न होकर पंढरपुर में साक्षात दर्शन दिए थे।
विशेषता:यहां आषाढ़ी एकादशी पर लाखों श्रद्धालु एकत्र होते हैं और यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। इस मंदिर का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी गहरा है।स्थान: पंढरपुर, सोलापुर
महाराष्ट्र के इन प्रमुख मंदिरों का न केवल धार्मिक महत्व है, बल्कि इनकी पौराणिक कथाएं और अद्भुत वास्तुकला भी इन स्थलों को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं। इन मंदिरों की भव्यता, आस्था और ऐतिहासिक महत्व श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बार-बार आकर्षित करता है। अगर आप धर्म, संस्कृति और इतिहास के प्रेमी हैं, तो इन मंदिरों की यात्रा आपके जीवन का एक अद्वितीय अनुभव हो सकता है।
ऐसे ही रोचक लेख, धर्म और आस्था की जानकारी, मंदिरों के इतिहास और पौराणिक कथाओं से जुड़े किस्सों के लिए हमारे साथ जुड़े रहें। हम आपके लिए श्री मंदिर से जुड़ी ऐसी ही ज्ञानवर्धक और दिलचस्प जानकारी लाते रहेंगे।
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