मासिक दुर्गा अष्टमी 2025: कब है, क्या है शुभ मुहूर्त, पूजा में कौन-कौन सी सामग्री चाहिए और विधि क्या है? जानें माँ दुर्गा की कृपा पाने का सही तरीका!
हर महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाता है। यह दिन माता दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत के लिए विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तगण इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से माता दुर्गा की उपासना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मुहूर्त | समय |
ब्रह्म मुहूर्त | 04:13 ए एम से 04:59 ए एम तक |
प्रातः सन्ध्या | 04:36 ए एम से 05:45 ए एम तक |
अभिजित मुहूर्त | 11:36 ए एम से 12:26 पी एम तक |
विजय मुहूर्त | 02:06 पी एम से 02:56 पी एम तक |
गोधूलि मुहूर्त | 06:15 पी एम से 06:38 पी एम तक |
सायाह्न सन्ध्या | 06:16 पी एम से 07:25 पी एम तक |
अमृत काल | 03:07 ए एम, अप्रैल 06 से 04:43 ए एम, (06 अप्रैल) तक |
निशिता मुहूर्त | 11:37 पी एम से 12:23 ए एम, (06 अप्रैल) तक |
रवि योग | 05:32 ए एम, अप्रैल 06 से 05:44 ए एम, (06 अप्रैल) तक |
दुर्गा अष्टमी मनाने का मुख्य उद्देश्य देवी दुर्गा के प्रति श्रद्धा और आस्था प्रकट करना है। हिंदू मान्यता के अनुसार, अष्टमी के दिन मां दुर्गा ने राक्षस महिषासुर का वध कर संपूर्ण ब्रह्मांड को उसके अत्याचार के प्रकोप से मुक्त किया था। इस दिन मां दुर्गा ने अपने उग्र रूप भद्रकाली का अवतार लिया था।
हर महीने मनाया जाने वाला दुर्गा अष्टमी का पर्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन मां दुर्गा के भक्त विधि विधान से माता की उपासना करते हैं, जिसके प्रभाव से दुख दरिद्रता दूर होती है, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मासिक दुर्गा अष्टमी का व्रत करने से भक्तों पर माँ दुर्गा की कृपा दृष्टि बनी रहती है। इस व्रत के फलस्वरूप भक्तों के सभी कष्टों का निवारण होता है और उनके जीवन में सुख-शांति का वास होता है। इसके साथ ही माँ दुर्गा की आराधना करने से भक्तों को साहस और शक्ति प्राप्त होती है, जो उनके जीवन की समस्याओं को हल करने में सहायक सिद्ध होती है।
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