नवरात्रि के नौवें दिन को माता के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा करने का विधान यह दिन इन्ही को समर्पित होता है। इसे नवमी या महानवमी के नाम से भी जाना जाता है।
नवरात्रि में भक्ति से परिपूर्ण 9 दिनों में सबसे आखिरी दिन, देवी माँ के सिद्धिदात्री स्वरूप को समर्पित होता है। देवी माँ का यह स्वरूप भक्तों और साधकों को सिद्धियाँ प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
नवरात्रि में भक्ति से परिपूर्ण 9 दिनों में सबसे आखिरी दिन, देवी माँ के सिद्धिदात्री स्वरूप को समर्पित होता है। देवी माँ का यह स्वरूप भक्तों और साधकों को सिद्धियाँ प्रदान करने के लिए जाना जाता है। आज 9 देवियों की जानकारी की कड़ी में हम इस लेख में लेकर आए हैं माता सिद्धिदात्री को समर्पित नवरात्र के नौवें दिन का महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।
नवरात्रि के नौवें दिन को माता के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा करने का विधान यह दिन इन्ही को समर्पित होता है। इसे नवमी या महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन हवन करने और कन्या पूजन का विधान है। सभी भक्तों के जीवन में यह पर्व भक्ति की एक नई तरंग लेकर आता है। इस दौरान भक्त विभिन्न प्रकार से माता के प्रति अपने समर्पण को व्यक्त करते हैं।
कमल पुष्प पर विराजमान माँ सिद्धिदात्री की चार भुजाएं हैं, और उनका वाहन सिंह है। देवी जी के सिरपर ऊंचा मुकुट है और उनके चेहरे पर मंद सी मुस्कान है। देवी सिद्धिदात्री, सर्व सिद्धियां प्रदान करने वाली हैं। उपासक या भक्त पर इनकी कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी आसानी से संभव व सिद्ध हो जाते हैं। साथ ही वह हर प्रकार के भय व रोगों को भी दूर करती हैं।
नवरात्र के नौवें दिन यानी नवमी को महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल नवमी का यह उत्सव पर नवमी तिथि 7 अप्रैल, सोमवार 2025 को पड़ रही है।
वन्दे वाञ्छित मनोरथार्थ चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
कमलस्थिताम् चतुर्भुजा सिद्धीदात्री यशस्विनीम्॥
स्वर्णवर्णा निर्वाणचक्र स्थिताम् नवम् दुर्गा त्रिनेत्राम्।
शङ्ख, चक्र, गदा, पद्मधरां सिद्धीदात्री भजेम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन पयोधराम्।
कमनीयां लावण्यां श्रीणकटिं निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
हिन्दू धर्म के धार्मिक अनुष्ठानों को सफल बनाने के लिए अंतिम चरण में हवन किया जाता है। किसी भी वैदिक पूजा में हवन करना अनिवार्य होता है। हवन द्वारा समापन न किए जाने पर हर पूजा अधूरी मानी जाती है।
नवमी होम को चंडी होम या नवमी हवन के नाम से भी जाना जाता है। नवरात्रि और दुर्गा पूजा के दौरान हवन या नवमी होम बहुत महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और 9 दिनों की पूजा-पाठ के बाद अष्टमी या नवमी के दिन हवन करके नवरात्रि पूजा की पूर्ण आहुति दी जाती है। मां दुर्गा से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है और बीज मंत्रों द्वारा माँ दुर्गा का आवाह्न किया जाता है। हवन करने से आदिशक्ति देवी मां भगवती प्रसन्न होती है और अपने भक्तों को अच्छा स्वास्थ्य, सुख समृद्धि प्रदान करती है।
प्रातःकाल उठकर, स्नानादि कार्यों से निवृत हो जाएं। नवमी के दिन विधिवत सिद्धिदात्री जी की पूजा करें। पूजा-पाठ और कन्या पूजन के बाद हवन किया जाएगा। हवन से पहले हवन की संपूर्ण सामग्री एकत्रित कर लें। इसके बाद जहां हवन करना है, उस स्थान को साफ कर लें। हवन वेदी पर हल्दी कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं, और पुष्प से सजाएं। आमतौर पर, हवन किसी पंडित या ब्राह्मण द्वारा करवाया जाता है, क्योंकि हर किसी को अग्नि स्थापना की अनुमति नहीं होती है। हालांकि कई लोग स्वयं भी हवन करते हैं। आप अपने घर की परंपरा के अनुसार हवन करवाएं।
इस प्रकार हवन संपूर्ण हो जाता है, इस बात का ध्यान रखें कि हवन की अग्नि को खंडित नहीं करना चाहिए। हम आशा करते हैं कि आपके हवन शुभ एवं फलदायी हो।
नवरात्रि के आखिरी दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा होती है। इस दिन, खासतौर पर मां को तिल का भोग लगाते हैं। ऐसे में आप तिल के लड्डू भी बना सकते हैं या अनार भी अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करने से, माँ दुर्गा अनार के दानों की तरह आपकी जिंदगी के अलग- अलग पड़ाव को भी एक कवच प्रदान करती हैं।
माँ सिद्धिदात्री का बीज मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥
एक पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था। साथ ही मां सिद्धिदात्री की कृपा ने भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाए। मां दुर्गा का यह अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप है। शास्त्रों के अनुसार, देवी दुर्गा का यह स्वरूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है। कहते हैं कि दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागणम भगवान शिव और प्रभु विष्णु के पास गुहार लगाने गए थे। तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ। उस तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ। जिन्हें मां सिद्धिदात्री के नाम से जाते हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार मां सिद्धिदात्री के पास अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व सिद्धियां हैं। माता रानी अपने भक्तों को सभी आठों सिद्धियों से पूर्ण करती हैं। मां सिद्धिदात्री को जामुनी या बैंगनी रंग अतिप्रिय है। ऐसे में भक्त को नवमी के दिन इसी रंग के वस्त्र धारण कर मां सिद्धिदात्री की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से माता की हमेशा कृपा बनी रहती हैं।
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री
मैया जयति जय सिद्धिदात्री
हम भक्तों की मैया
हम भक्तों की मैया
तुम हो महतारी
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री
मैया जयति जय सिद्धिदात्री
हम भक्तों की मैया
हम भक्तों की मैया
तुम हो महतारी
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
अष्ट सिद्धि प्रदायिनी
तुम हो जग माता
मैया तुम हो जग माता
तुमसे कुछ न असंभव
तुमसे कुछ न असंभव
सब तुमसे आता
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
ऋषि मुनि देव योगी
नर गुणगान करे
मैया नर गुणगान करे
दुष्टों को माँ मारे
दुष्टों को माँ मारे
काल भी माँ से डरे
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
जग में अनुपम महिमा
दुःख दरिद्र मिटे
मैया दुःख दरिद्र मिटे
दया तुम्हारी मैया
दया तुम्हारी मैया
समृद्धि बरसे
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
शुम्भ निशुम्भ को मारा
लीला अति न्यारी
मैया लीला अति न्यारी
अपना दास बनाओ
अपना दास बनाओ
भोले की प्यारी
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
शंख गदा और चक्र
पुष्प कमल सोहे
मैया पुष्प कमल सोहे
छवि माँ की प्यारी
छवि माँ की प्यारी
सबका मन मोहे
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
नवराते में नावें दिन
करते माँ का ध्यान
करते माँ का ध्यान
मनवांछित फल पावे
मनवांछित फल पावे
मिट जावे अज्ञान
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
माँ गृह मेरे विराजो
सदा सहाय बनो
मैया सदा सहाय बनो
काज संवारना मैया
काज संवारना मैया
मेरे मन में बसो
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
माँ सिद्धिदात्री के आरती
जो मन से गावे
मैया जो मन से गावे
सर्व सिद्धि वो पावे
सर्व सिद्धि वो पावे
मन नहीं घबरावे
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री
मैया जयति जय सिद्धिदात्री
हम भक्तों की मैया
हम भक्तों की मैया
तुम हो महतारी
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री
मैया जयति जय सिद्धिदात्री
हम भक्तों की मैया
हम भक्तों की मैया
तुम हो महतारी
ॐ जयति जय सिद्धिदात्री मैया
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