असम के सबसे खूबसूरत और प्राचीन मंदिर! कौन से हैं ये 11 प्रसिद्ध मंदिर और क्यों हैं खास? जानने के लिए आगे पढ़ें!
कामाख्या मंदिर असम के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र मंदिरों में से एक है, जो माँ कामाख्या को समर्पित है। माँ कामाख्या तंत्र साधना की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं, और यह मंदिर तंत्र मंत्र साधकों के लिए एक विशेष स्थान है। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है, और शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। शक्तिपीठों का धार्मिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि इन्हें देवी सती के विभिन्न अंगों के गिरने के स्थल माना जाता है। कामाख्या मंदिर में माँ सती का गर्भ गिरा था, और इस कारण यह स्थल शक्ति साधना के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
कामाख्या मंदिर की धार्मिक मान्यता और इससे जुड़ी कथाएँ इसे एक दिव्य स्थल बना देती हैं। यहाँ प्रतिवर्ष अंबुबाची मेला आयोजित किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। इस मेले में देश-विदेश से श्रद्धालु और तंत्र साधक आते हैं, जो यहाँ देवी माँ से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आते हैं। अंबुबाची मेला विशेष रूप से प्रकृति और शक्ति के मिलन का प्रतीक माना जाता है, जब माँ कामाख्या का प्राकृत रूप जागृत होता है।
इस मंदिर की वास्तुकला भी अत्यंत आकर्षक और विशेष है। मंदिर का शिखर और संकेंद्रित संरचना हिन्दू स्थापत्य कला के अद्वितीय उदाहरणों में से एक मानी जाती है। मंदिर के अंदर देवी माँ की पूजा विधि और यहाँ की धार्मिक परंपराएँ बहुत ही विशिष्ट हैं। मंदिर परिसर में स्थित कुंड और जल का विशेष महत्व है, क्योंकि यहाँ के जल से औषधि और शांति की प्राप्ति मानी जाती है।
कामाख्या मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह असम और पूरे उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यहाँ की शांतिपूर्ण और दिव्य वातावरण श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आत्मिक संतुष्टि का अनुभव कराता है। इस मंदिर का महत्व न केवल असम में, बल्कि भारत और विदेशों में भी लोगों के दिलों में गहरे श्रद्धा के साथ बसता है।
ब्रह्मपुत्र नदी के बीच स्थित पीकॉक आइलैंड पर बना उमानंद मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह दुनिया का सबसे छोटा नदी द्वीप भी माना जाता है। इस द्वीप पर स्थित मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को नाव का सहारा लेना पड़ता है, जो यात्रा को और भी रोमांचक और अद्वितीय बनाता है। यह रास्ता प्रकृति से घिरा हुआ है, जो श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है। यहाँ तक पहुँचने के लिए नाव की यात्रा और नदी के शांत वातावरण का अनुभव श्रद्धालुओं को एक गहरी शांति का अहसास कराता है।
उमानंद मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। इस मंदिर का उल्लेख इतिहास में अहोम राजाओं द्वारा संरक्षित किए जाने के रूप में मिलता है, जो इस मंदिर की ऐतिहासिक धरोहर को और भी मूल्यवान बनाता है। माना जाता है कि इस मंदिर की स्थापना बहुत पुरानी है, और यह स्थल शिव भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल बन चुका है। महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जब श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मंदिर में पहुँचती है। इस दिन विशेष रूप से शिवजी की पूजा और रात्रि जागरण आयोजित होते हैं, जिससे यह दिन अत्यधिक भक्ति और श्रद्धा से भरपूर हो जाता है।
चित्राचल पहाड़ी पर स्थित नवग्रह मंदिर ज्योतिष शास्त्र में रुचि रखने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह मंदिर नौ ग्रहों को समर्पित है और यहाँ प्रत्येक ग्रह की एक मूर्ति स्थापित की गई है। इस मंदिर की स्थापत्य कला और गुवाहाटी शहर का मनोरम दृश्य इसे एक प्रमुख तीर्थ स्थल बनाते हैं। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इस मंदिर का विशेष महत्व है, क्योंकि यहाँ ग्रहों की शांति और अनुकूलता के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
अहोम वंश के शासनकाल में निर्मित शिव डोल असम के सबसे ऊँचे शिव मंदिरों में से एक है। यह लगभग 104 फीट ऊँचा है और भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और इसकी धार्मिक मान्यता इसे विशेष बनाती हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष पूजा और मेले का आयोजन होता है। इस मंदिर की दीवारों पर हिंदू पौराणिक कथाओं से संबंधित भव्य नक्काशी देखी जा सकती है।
शिव डोल के निकट स्थित देवी डोल देवी दुर्गा को समर्पित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर अहोम स्थापत्य शैली में निर्मित है और यहाँ नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर का वातावरण अत्यंत आध्यात्मिक है और यहाँ देवी दुर्गा की पूजा शक्ति के प्रतीक रूप में की जाती है।
केदारेश्वर मंदिर मदनाचल पहाड़ी पर स्थित है और भगवान शिव के केदारनाथ रूप को समर्पित है। इस मंदिर की अष्टकोणीय संरचना और पत्थर की बनी शिवलिंग इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। मंदिर का शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। यह मंदिर अपनी दिव्य ऊर्जा और अध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है।
हयग्रीव माधव मंदिर भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार को समर्पित है। यह मंदिर हिंदू और बौद्ध दोनों समुदायों के लिए पवित्र माना जाता है। इसकी स्थापत्य कला अद्भुत है और यहाँ भगवान बुद्ध के अवतार होने की भी मान्यता है। यह मंदिर धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है और यहाँ हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं के अनुयायी आते हैं।
ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी तट पर स्थित यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। यहाँ जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष उत्सव का आयोजन होता है।
महाभैरव मंदिर भगवान शिव के भैरव रूप को समर्पित है। यह मंदिर असम के प्राचीन राजा बाणासुर द्वारा निर्मित माना जाता है। महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा की जाती है।
तिनसुकिया जिले में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी विशेषता यहाँ स्थित ताम्र से बनी शिवलिंग है। यह मंदिर अपनी आध्यात्मिकता और रहस्यमय वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
बोंगाईगाँव जिले में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसकी स्थापत्य कला इसे असम के प्रमुख मंदिरों में शामिल करती है। यह मंदिर अपने शांत और दिव्य वातावरण के लिए प्रसिद्ध है।
असम के ये मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के प्रतीक भी हैं। इन मंदिरों की वास्तुकला, धार्मिक मान्यताएँ, और आध्यात्मिक वातावरण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। कामाख्या मंदिर, शिव डोल, और हयग्रीव माधव मंदिर जैसे स्थल न केवल असम बल्कि पूरे भारत की धार्मिक चेतना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इन मंदिरों की यात्रा न केवल भक्तों को आध्यात्मिक संतुष्टि देती है बल्कि असम की सांस्कृतिक विविधता को भी दर्शाती है। यदि आप असम की यात्रा करने का मन बना रहे हैं, तो इन मंदिरों के दर्शन अवश्य करें और यहाँ की आध्यात्मिकता एवं ऐतिहासिकता का अनुभव लें।
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