भानु सप्तमी व्रत का महत्व और पूजा विधि
भानु सप्तमी व्रत का महत्व और पूजा विधि

भानु सप्तमी व्रत का महत्व और पूजा विधि

मार्च 3, 2024, रविवार जानें यहां पर


भानु सप्तमी से जुड़ी जानकारी (Bhanu Saptami Se Judi Jankari)

सूर्य से ही इस पृथ्वी पर जीवन है। जीव जंतु, वनस्पति, और मनुष्य सभी के लिए सूर्य की किरणें मिलना अति आवश्यक हैं। इसके साथ ही हिंदू धर्म में सूर्य भगवान को ऊर्जा, शक्ति आदि का प्रतीक माना जाता है। भगवान सूर्य को समर्पित कई ऐसे पर्व हैं, जिस दिन भक्त विधि-विधान से उनकी पूजा व जप-तप आदि करते हैं। उन्हीं में से एक पावन तिथि है 'भानु सप्तमी'। इस पर्व पर जातक सूर्य भगवान की आराधना कर अच्छे स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना करते हैं। आइए इस लेख में जानते हैं साल 2024 में कब है भानु सप्तमी और क्या है इस व्रत से मिलने वाले लाभ।

2024 में भानु सप्तमी कब है? ( When Is Bhanu Saptami in 2024)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सप्तमी तिथि पर यदि रविवार होता है, तो उस दिन भानु सप्तमी मनाई जाती है। फाल्गुन मास में ये विशेष संयोग रविवार 03 मार्च को बन रहा है, अतः 03 फरवरी को 'भानु सप्तमी' मनाई जाएगी।

भानु सप्तमी का महत्व ( Importance of Bhanu Saptami)

पुराणों में वर्णन मिलता है कि जब पहली बार सूर्य देव सात घोडे़ के रथ पर सवार होकर प्रकट हुए और धरती से अंधकार को दूर करने के लिए अपनी किरणें फैलाईं, तो उस दिन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि थी। सूर्यदेव के प्राकट्य के उपलक्ष्य में ही 'भानु सप्तमी' या 'सूर्य सप्तमी' मनाई जाती है। भानु सप्तमी के दिन जातक स्नान के बाद सूर्य देवता को जल चढ़ाने के साथ ही स्थल परिक्रमा करते है। इस दिन उपवास करने का भी विधान है। मान्यता है कि ये व्रत मनुष्य को मोक्ष दिलाने वाला होता है। इस दिन यदि सच्चे मन से सूर्य देव की आराधना की जाए तो समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।

भानु सप्तमी के अन्य नाम ( Names of Bhanu Saptami )

भानु सप्तमी को अर्क सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी, सूर्य सप्तमी आदि नामों से भी जाना जाता है।

भानु सप्तमी पर ऐसे करें सूर्य पूजन (Puja Vidhi Of Surya)

  • भानु सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी या जलाशय में स्नान करें।
  • इसके पश्चात् सूर्य भगवान की पूजा करने या व्रत रखने का संकल्प लें।
  • अब पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ़ मुख कर के बैठ जायें।
  • पूजा में सूर्य देव को लाल चंदन, अक्षत्, लाल पुष्प, धूप, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
  • इसके बाद कपूर या गाय के घी के दीपक से सूर्य भगवान की आरती उतारें।
  • इस दिन तांबे के पात्र में स्वच्छ जल भरकर उसमें लाल चंदन, अक्षत और लाल रंग का फूल डालें।
  • अब ‘ॐ सूर्याय नमः’ मन्त्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
  • अर्थ देने के दौरान सूर्य भगवान से प्रार्थना करें कि वो आप पर और आपके परिवार पर सदैव अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
  • भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा करते समय उनके बीज मंत्र ‘ ऊँ घृणि सूर्याय नम:’ और ‘ ॐ सूर्याय नम:’ का जाप अवश्य करें।
  • यदि हो सके तो इस दिन भोजन या फलाहार में नमक का प्रयोग न करें।

भानु सप्तमी पर मिलने वाले लाभ ( Benefits Of Bhanu Saptami)

  • भानु सप्तमी पर सूर्य भगवान की पूजा करने से रोगी व्यक्ति को असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है, और वो दीर्घायु होता है।
  • इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से बुद्धि व व्यक्तित्व का विकास होता है, मानसिक शांति मिलती है, और स्मरण शक्ति अत्यंत तीव्र होती है।
  • भानु सप्तमी के दिन प्रयागराज संगम में डुबकी लगाना भी बहुत शुभ माना जाता है, इससे जातक को मनचाहा फल मिलता है।
  • पूजा-पाठ संपन्न करने के बाद भानु सप्तमी पर दान-पुण्य करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होगी।
  • इस दिन सच्चे मन से सूर्य आराधना करने वाले जातकों के सभी सांसारिक कष्ट दूर होते हैं, और मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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