देवी की कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन के विशेष उपाय और अनुष्ठान के बारे में जानें।
वर्ष में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती है। चैत्र नवरात्रि, आषाढ़ नवरात्रि, आश्विन नवरात्रि और माघ नवरात्रि। ये सभी नवरात्र प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तिथि तक चलती हैं। इन चारों नवरात्रों को चार ऋतुओं के आगमन के रूप में भी देखा जाता है। जहां, चैत्र नवरात्र के साथ ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत होती है। वहीं, आषाढ़ नवरात्र के साथ वर्षा ऋतु, आश्विन नवरात्र के साथ शरद ऋतु, और माघ नवरात्र के साथ वसंत ऋतु की शुरुआत मानी जाती है।
नवरात्रि पर्व माँ आदिशक्ति भगवती को समर्पित है। हर नवरात्र के यह नौ दिन और रातें माता के भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। इन नौ रात्रिओं का सम्बन्ध सिद्धि से होता है। इसीलिए माता की आराधना की यह नौ रातें आपके कई कार्यों को सरलता से सिद्ध कर सकती हैं। आइए, जानते हैं नवरात्र के चौथे दिन का महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी।
“सुरासम्पूर्ण कलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥”
माँ दुर्गा के चौथे शक्ति स्वरूप को कूष्माण्डा के नाम से जाना जाता है, और चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन माँ कूष्माण्डा को समर्पित है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, चैत्र नवरात्रि की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी 1 अप्रैल 2025 को पड़ेगी। जिस दिन माँ कूष्माण्डा की साधना की जाएगी।
देवी कूष्माण्डा सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी आठ भुजाएं हैं, इसीलिए उन्हें दुर्गा का अष्टभुजा अवतार भी कहा जाता है। माता के शरीर की कांति और ऊर्जा सूर्य के समान हैं, क्योंकि केवल माता कूष्माण्डा के पास ही वो शक्ति है, जिससे वे सूर्य के केंद्र में निवास कर सकती हैं।
नवरात्र के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्माण्डा की पूजा का बहुत महत्व है। इस वर्ष नवरात्रि का चौथा दिन 1 अप्रैल 2025 को है।
माँ दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा नवरात्रि के चौथे दिन की जाती है। इस दिन मालपुए का भोग लगाया जाता है। यदि आप किसी कारणवश मालपुए का भोग न लगा पाएं तो मातारानी को गुड़ का भोग भी लगाया जा सकता है।
मालपुए बनाने के लिए, सबसे पहले दूध में चीनी डालकर एक घंटे के लिए रख दें। इसके बाद, एक बर्तन में आटा छानें। फिर इसमें सौंफ, इलायची और नारियल का बुरादा डालकर मिलाएं। जब दूध में चीनी घुल जाए, तो इसको आटे में डालें और मिलाएं। इसके बाद एक कड़ाही में घी डालकर उसको गर्म करें, फिर उसे पूरी के आकार में घी में डालें। मालपुआ को दोनों तरफ से पलट कर लाल होने तक सेकें और फिर माता को इसका भोग लगाएं।
मां कूष्मांडा का बीज मंत्र: ऐं ह्री देव्यै नम:।
शारदीय नवरात्र के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा करने से साधक के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। कूष्माण्डा माता भक्तों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी प्रसन्न हो जाती हैं और उन्हें आयु, यश, बल और आरोग्य का आशीर्वाद देती हैं। माँ कूष्माण्डा को लाल रंग अतिप्रिय है। और इस बार शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्माण्डा की पूजा के लिए शुभ रंग पीला है।
अपनी मनमोहक मुस्कान से इस ब्रह्मांड का निर्माण करने के कारण इन्हें देवी कूष्माण्डा के नाम से विख्यात किया गया। जिस समय सृष्टि का निर्माण नहीं हुआ था तथा चारों ओर अंधकार का वास था तब देवी कूष्माण्डा ने ही अपने ईशत हास्य के माध्यम से ब्रह्मांड की सरंचना की। उनकी इस अद्भुत लीला की वजह से उन्हें सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति का नाम दिया गया। देवी कुष्मांडा की अष्ट भुजाएं हैं इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। देवी कूष्माण्डा अथवा अष्टभुजा के हाथों में क्रमशः कमंडल, धनुष, बाण, कमल पुष्प, अमृत पूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। इसके साथ ही देवी कूष्माण्डा के आठवें हाथ में सिद्धियों तथा निधियों को प्रदान करने वाली जप माला धारण हैं। देवी कूष्माण्डा का प्रिय वाहन सिंह है। देवी कूष्माण्डा को कुम्हड़े की बलि अत्यंत प्रिय है। संस्कृत भाषा में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं। इस कारण भी देवी को कूष्माण्डा कहते हैं। देवी कूष्माण्डा का सूर्यमंडल के अंदर लोक में निवास करती हैं। सूर्यमंडल में निवास करने की शक्ति मात्र इन्हीं देवी के पास है। इनका तेज़ सर्वव्यापी है। जगत का हर प्राणी, मनुष्य इन्हीं के तेज़ से उज्ज्वल है। इनकी कांति, ओज तथा दिव्य स्वरूप सर्व लोक में उजागर है। ब्रह्मांड का कण – कण देवी कूष्माण्डा की शक्ति का प्रतीक है। देवी कुष्मांडा की सच्चे मन से पूजा करने वाले भक्तों को शक्ति, तेज़ प्राप्त होता है। यह देवी भक्ति तथा सेवा से प्रसन्न होकर आशीर्वाद तथा मनोकामना को सिद्ध करती हैं।
ॐ जय कूष्मांडा माँ
मैया जय कूष्मांडा माँ
शरण तिहारी आए
शरण तिहारी आए
कर दो माता दया
जय जय कूष्मांडा माँ
ॐ जय कूष्मांडा माँ
मैया जय कूष्मांडा माँ
शरण तिहारी आए
शरण तिहारी आए
कर दो माता दया
ॐ जय कूष्मांडा माँ
अष्टभुजा जय देवी
आदिशक्ति तुम माँ
मैया आदिशक्ति तुम माँ
आदि स्वरूपा मैया
आदि स्वरूपा मैया
जग तुमसे चलता
ॐ जय कूष्मांडा माँ
चतुर्थ नवरात्रों में
भक्त करे गुणगान
मैया भक्त करे गुणगान
स्थिर मन से माँ की
स्थिर मन से माँ की
करो पूजा और ध्यान
ॐ जय कूष्मांडा माँ
सच्चे मन से जो भी
करे स्तुति गुणगान
मैया करे स्तुति गुणगान
सुख समृद्धि पावे
सुख समृद्धि पावे
माँ करे भक्ति दान
ॐ जय कूष्मांडा माँ
शेर है माँ की सवारी
कमंडल अति न्यारा
मैया कमंडल अति न्यारा
चक्र पुष्प गले माला
चक्र पुष्प गले माला
माँ से उजियारा
ॐ जय कूष्मांडा माँ
ब्रह्माण्ड निवासिनी
ब्रह्मा वेद कहे
मैया ब्रह्मा वेद कहे
दास बनी है दुनिया
दास बनी है दुनिया
माँ से करुणा बहे
ॐ जय कूष्मांडा माँ
पाप ताप मिटता है
दोष ना रह जाता
मैया दोष ना रह जाता
जो माता में रमता
जो माता में रमता
निश्चित फल पाता
ॐ जय कूष्मांडा माँ
अष्ट सिद्धियां माता
भक्तों को दान करें
मैया भक्तों को दान करें
व्याधि मैया हरती
व्याधि मैया हरती
सुखों से पूर्ण करे
ॐ जय कूष्मांडा माँ
कुष्मांडा माता की
आरती नित गाओ
आरती नित गाओ
माँ करेगी सब संभव
माँ करेगी सब संभव
चरण सदा ध्याओ
ॐ जय कूष्मांडा माँ
ॐ जय कूष्मांडा माँ
मैया जय कूष्मांडा माँ
शरण तिहारी आए
शरण तिहारी आए
कर दो माता दया
जय जय कूष्मांडा माँ
ॐ जय कूष्मांडा माँ
मैया जय कूष्मांडा माँ
शरण तिहारी आए
शरण तिहारी आए
कर दो माता दया
जय जय कूष्मांडा माँ
ॐ जय कूष्मांडा माँ
मैया जय कूष्मांडा माँ
शरण तिहारी आए
शरण तिहारी आए
कर दो माता दया
जय जय कूष्मांडा माँ
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